दिव्यांग बच्चों का सहारा बना लिम्ब सेंटर कृत्रिम अंग लगाकर लौटा रहा मुस्कान

हर वर्ष सैकड़ों बच्चों को लगाए जा रहे कृत्रिम अंग
जल्द शुरू होगी ओपीडी विशेषज्ञों के निरीक्षण में बनते हैं अंग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का कृत्रिम अंग अवयव (लिम्ब सेंटर) हजारों बच्चों को कृत्रिम अंग देकर न केवल बच्चे बल्कि उनके मां-बाप के चेहरे पर मुस्कान के फूल खिला रहा है । दुर्घटना में हाथ-पैर खो चुके बच्चों को कृत्रिम अंग लगाकर लिम्ब सेंटर आत्मनिर्भर बना रहा है। अब तक हजारों बच्चों को कृत्रिम अंग लगाकर सेंटर ने लोगों की खुशियां लौटाई हैं।
लिम्ब सेंटर वल्र्ड डिस्एबल डे पर नई बुलन्दियां छूने जा रहा है। लिम्ब सेंटर में बच्चों का खास ध्यान रखते हुए यहां जल्द पीडियाट्रिक रिहबिलीटेशन की ओपीडी शुरू की जाएगी। केजीएमयू का लिम्ब सेंटर प्रदेश के हजारों दिव्यांग बच्चों को कृत्रिम अंग कम पैसों में लगाने वाला नंबर वन संस्थान है। इस साल केजीएमयू ने सैकड़ों बच्चों को कृत्रिम अंग लगाए हैं। सेंटर में इस वर्ष हजारों बच्चों को सहायक अंग देकर उनकी जन्म से उत्पन्न शारीरिक विकलांगता को दूर किया है। इसके अलावा सेंटर के विशेषज्ञों ने दुर्घटना में अपने हाथ खो चुके चौदह साल के 17 बच्चों को कृत्रिम हाथ लगाकर उन्हें काम करने योग्य बनाया। इसके अलावा एक से पांच साल तक के बच्चे जिन्हें प्रदेश में कहीं पर भी कृत्रिम अंग नहीं लगाए जा सके ऐसे चार बच्चों को केजीएमयू ने कास्मेटिक हाथ देकर उनकी मुस्कुराहट वापस की। इसके अलावा केन्द्र को पोलियो करेक्टिव सर्जरी करने का नोडल सेंटर बना दिया गया है। इसके अलावा नये उपकरण बनाने की कवायद शुरू हो गयी है। इससे केंद्र में अत्याधुनिक कृत्रिम अंग कम शुल्क में बनाये जा सकेंगे। करेक्टिव सर्जरी में लिम्ब सेंटर को नोडल सेंटर बना दिया गया है। करेक्टिव सर्जरी में दवा से लेकर कैलिपर तक दिया जा रहा है। इसके अलावा लेजर पोश्चर विद एससरीज, माड्यूलर वर्क स्टेशन के साथ ही अन्य उपकरण आ जाने के बाद यहां अत्याधुनिक कृत्रिम उपकरण बनाये जाने में मदद मिलेगी।

दिव्यांगों की मुस्कान लौटा रही हैं शगुन सिंह

केजीएमयू के पीएमआर विभाग की सीनियर प्रोस्थेटिस्ट शगुन सिंह ही लिम्ब सेंटर में लगने वाले सभी अंगों को बनाती है। उन्होंने बताया कि आने वाले मरीजों के साइज को ध्यान में रखकर यहां अंगों को बनाया जाता है। फिटिंग का ध्यान रखा जाता है। तीन साल तक के बच्चे की लम्बाई और शरीर के बढऩे के साथ उसी हाथ को एडजेस्ट कर दिया जाता है। इससे परिवार को अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता है। निजी संस्थान में इसका खर्च 75 हजार रुपये से अधिक है। इसके बाद एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी के लिए भी कम से कम 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि केजीएमयू में यह मुफ्त है।

नए उपकरण से हल्के कृत्रिम अंग बनाने में मिलेगी मदद: अरविन्द

सेंटर के डीपीएमआर वर्कशॅप मैनेजर अरविन्द निगम ने बताया कि लिम्ब सेंटर में 308 मेजर व 1592 माइनर ऑपरेशन किये गये। इसके अलावा गरीब मरीजों को निशुल्क उपकरण दिये गये। नये उपकरण आने पर कृत्रिम अंगों को बनाने में सटीक मेजरमेंट करने में मदद मिलेगी। इससे हल्के व हाईटेक कृत्रिम अंग बनाये जाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पीडियाट्रिक रिहैबलेशन यूनिट भी बनाया जाना है। इसकी पहले ओपीडी शुरू की जाएगी। इससे कई जटिल कृत्रिम अंग बनाये जाने में मदद मिलेगी। वर्क स्टेशन बनाये जाने पर कृत्रिम अंग बनाने में सहायता मिलेगी। यहां अत्याधुनिक फिजियोथरेपी यूनिट में सात हजार से ज्यादा मरीजों की इस वर्ष इलाज करने में मदद की गयी।

मैकेनिकल हाथ बदल देता है जिंदगी: डॉ. अनिल

केजीएमयू के पीएमआर विभाग के डॉक्टरों ने प्लास्टिक का मैकेनिकल हैंड लगाकर एजाज को नई जिंदगी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मैकेनिकल हैंड से एजाज पहले की तरह काम कर सकेंगे। केजीएमयू के फिजिकल एंड मेडिसिन रिहैबलिटेशन सेंटर के डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि पहली बार लिम्ब सेंटर में किसी बच्चे का मैकेनिकल हाथ लगा है। अभी तक बच्चों को जो हाथ लगाए जा रहे थे वह केवल कास्मेटिक के लिए लगाए जा रहे थे, जिससे वे कोई काम नहीं कर सकते। अब मैकेनिकल हाथ लगाया जा रहा जिससे बच्चा पहले की तरह सभी काम कर सकेगा।

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