विकास दर में इजाफा और अर्थव्यवस्था

सवाल यह है कि क्या जीएसटी और नोटबंदी का असर खत्म होने लगा है? ताजा विकास दर का अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या बाजार में लगातार आ रही गिरावट पर लगाम लग सकेगी? क्या महंगाई से जनता को आने वाले दिनों में निजात मिल सकेगी? क्या विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकेगी?

अर्थव्यवस्था की सेहत में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर में वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरी तिमाही में विकास दर में 6.3 फीसदी वृद्धि हुई है। पिछली तिमाही में यह दर 5.7 फीसदी थी। अर्थव्यस्था में सुधार को देखते हुए आने वाले दिनों में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है। सवाल यह है कि क्या जीएसटी और नोटबंदी का असर खत्म होने लगा है? ताजा विकास दर का अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या बाजार में लगातार आ रही गिरावट पर लगाम लग सकेगी? क्या महंगाई से जनता को आने वाले दिनों में निजात मिल सकेगी? क्या विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकेगी? दरअसल, नोटबंदी और जीएसटी के बाद बाजार में अचानक गिरावट आई। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा। नोटबंदी के कारण विनिर्माण, खेती और लघु उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए। वहीं रही सही कसर जीएसटी ने निकाल दी। इसके कारण छोटे कारोबारियों की हालत खराब हो गई। बाजार में मांग और आपूर्ति का सिद्धांत पूरी तरह डगमगा गया। महंगाई आसमान छूने लगी। यहां तक की सब्जियों में प्याज और टमाटर के दाम बेतहाशा बढ़ गए। जनता अभी भी महंगाई की मार झेल रही है। हालांकि सरकार ने जीएसटी में संशोधन कर कारोबारियों को राहत देने की कोशिश की है। बावजूद बाजार में अभी भी मंदी छायी हुई है। महंगाई और रोजगार के साधनों में आई कमी के कारण आम जनता की हालत खराब हो गई है। विपक्ष ने केंद्र सरकार के इन फैसलों की न केवल जमकर आलोचना की बल्कि इसे अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने वाला करार दिया। ऐसे मौके पर जीडीपी ग्रोथ रेट में वृद्धि ने सरकार को निश्चित रूप से राहत दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह विनिर्माण क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन है। इसमें दो राय नहीं है कि आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था में और तेजी आएगी। पिछले दिनों रेटिंग एजेंसी मूडी के भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिए थे। जाहिर है यदि यह विकास दर बनी रही तो विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। हालांकि ताजा आंकड़ों के मुताबिक खेती में सुस्ती अभी भी बनी हुई है। सरकार भी मान रही है कि जल्द ही भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7 फीसदी की दर से बढ़ेगी। बावजूद इसके सरकार को केवल आंकड़ों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। व्यवहारिक स्तर पर महंगाई पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे और रोजगार के साधनों का विकास करना होगा।

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