स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कैंसर पीडि़तों पर पड़ रही भारी

जानकारी के अभाव में बीपीएल कार्ड धारकों को इलाज व दवाओं के लिए देने पड़ रहे हैं पैसे
केजीएमयू प्रशासन भी नहीं दे रहा सही जानकारी गरीब मरीजों के तीमारदार हो रहे परेशान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही गरीबों पर भारी पड़ रही है। विभाग द्वारा सरकारी योजनाओं का सही प्रचार-प्रसार नहीं करने के कारण बीपीएल कार्ड धारी असाध्य रोगियों को भी इलाज के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। यही नहीं सरकारी अस्पताल भी कैंसर पीडि़तों को सही जानकारी देने के बजाए उनसे पैसे ऐंठ रहे हैं। ऐसे ही कुछ केस केजीएमयू में सामने आए हैं। यहां कई बीपीएल कार्ड धारी मरीज जानकारी नहीं होने के कारण असाध्य रोगों के इलाज में जमीन-जायदाद बेच कर इलाज करा रहे हैं। यही नहीं कैंसर जैसे असाध्य रोगों से पीडि़त गरीब मरीजों को केजीएमयू में निशुल्क इलाज और दवाएं नहीं मिल पा रही है। यही नहीं अस्पताल प्रशासन भी बीपीएल कार्ड धारक मरीजों से सही जानकारी देने से कतराते हैं।
प्रदेश सरकार ने एक साल पहले बीपीएल कार्ड धारी असाध्य रोगियों के लिए निशुल्क इलाज और दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की थी। इसके लिए यूपी सरकार अस्पतालों में समय-समय पर बजट भी जारी करती है। लेकिन अस्पतालों में हकीकत इसके उलट है। केजीएमयू जैसे नामी अस्पताल में गरीब मरीजों से असाध्य रोगों के इलाज और दवाओं के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। कई बार ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को सरकार की योजना की जानकारी नहीं होती है, लिहाजा वे इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते हैं। बावजूद इसके गरीब मरीजों को इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन को देना चाहिए। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग भी सरकार की तमाम योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचा पाने में नाकाम साबित हो रहा है। यही वजह है कि गरीब रोगियों को निशुल्क इलाज नहीं मिल पा रहा है। केजीएमयू में इलाज को पहुंचे कुछ केस पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।

अस्पताल में बीपीएल कार्ड धारकों को निशुल्क इलाज दिया जाता है। कुछ दिनों से दवाइयां नहीं थी, लेकिन अब सभी दवाएं मंगा ली गयी हैं। यदि बीपीएल कार्ड होने के बाद भी निशुल्क इलाज नहीं मिल रहा है तो मरीज मुझसे मिले। हम पूरी मदद करेंगे।
डॉ. विजय कुमार,चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू

सभी अस्पतालों को इसके बारे में जानकारी है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग भी अपनी ओर से सरकार की सभी चिकित्सा योजनाओं की जानकारी लोगों तक समय समय पर पहुंचाता है।
डॉ. पद्माकर सिंह, डीजी हेल्थ

बस्ती की रहने वाले अशोक कुमार अपनी मां की इकलौती संतान हंै। मेहनत मजदूरी कर वह अपना पेट पालता है। दो साल पहले उसके मुंह में एक छोटा सा दाना हुआ और यह कैंसर में तब्दील हो गया। अशोक की मां कांति देवी ने बताया कि अस्पताल में आठ महीने से इलाज चल रहा है। तीन बीघे जमीन थी जिससे गुजर बसर हो जाता था लेकिन जब ऑपरेशन की बारी आयी तो डॉक्टर ने चार लाख का खर्चा बताया। उधारी मांग कर जैसे-तैसे इलाज चल रहा था। चार लाख कहां से लाते। जमीन को गिरवी रखकर ऑपरेशन कराया है। महिला की गरीबी देखकर कुछ लोगो ने उसे बीपीएल कार्ड के बारे में बताया तो पता चला कि महिला के पास बीपीएल कार्ड होने के बावजूद महिला को निशुल्क इलाज के बारे मे अस्पताल प्रशासन ने उसको इस बारे में जानकारी नहीं दी।

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