प्रदेश में निवेश की कवायद और सवाल

सवाल यह है कि तमाम संसाधनों से युक्त प्रदेश में निवेशकों की दिलचस्पी क्यों नहीं पैदा हो रही है? क्या उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव निवेशकों के आड़े आ रहा है? क्या निवेशकों को लुभाने के लिए सरकार को अपनी नीतियों में मूलभूत बदलाव लाने होंगे?

उत्तर प्रदेश को विकास की राह पर तेज गति से दौड़ाने के लिए योगी सरकार निवेशकों को लुभाने की तमाम कोशिशें कर रही है। देश के विभिन्न राज्यों के उद्योगपतियों और विदेशी निवेशकों को यहां निवेश का न्योता दिया जा रहा है। इसके अलावा निर्माताओं को यहां फिल्म बनाने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। पिछले दिनों यहां कई विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और निवेश को लेकर गहन विचार-विमर्श किया। बावजूद अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। सवाल यह है कि तमाम संसाधनों से युक्त प्रदेश में निवेशकों की दिलचस्पी क्यों नहीं पैदा हो रही है? क्या उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव निवेशकों के आड़े आ रहा है? क्या निवेशकों को लुभाने के लिए सरकार को अपनी नीतियों में मूलभूत बदलाव लाने होंगे? क्या कानून व्यवस्था, लालफीताशाही और जटिल नियम कानून निवेशकों की राह में सबसे बड़े बाधक सिद्ध हो रहे हैं? दरअसल, कोई भी उद्योग लगाने के पहले निवेशक वहां मौजूद संसाधन और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस करता है। उद्योगों के लिए प्रदेश में कच्चा माल और सस्ते संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। लेकिन ये संसाधन निवेशकों की केवल आधी शर्तें पूरी करते हैं। उद्योगों के संचालन के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति, सक्षम कानून व्यवस्था और बाजार की उपलब्धता पहली शर्त होती है। फिलहाल इन तीनों ही मामलों में प्रदेश काफी पीछे नजर आ रहा है। यहां शहरों तक में अबाध विद्युत की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। रही कानून व्यवस्था की बात तो यहां अपराधों का ग्राफ लगतार बढ़ता जा रहा है। वहीं महंगाई और रोजगार के अभाव ने लोगों की क्रय शक्ति को काफी कम कर दिया है। इसके कारण बाजार में मंदी की स्थिति है। इसके अलावा देशी और विदेशी निवेशकों को लालफीताशाही जटिल नियम-कायदों में उलझा कर उनका समय और पैसा दोनों ही बर्बाद कराती है। यह स्थिति निवेश के लिहाज से सही नहीं कही जा सकती है। हालांकि यहां उद्यमियों को सस्ता श्रम और कच्चा माल आसानी से मिल सकता है। यही कुछ खास वजहें है जिसके कारण निवेशक अपना हाथ खींच रहे हैं। अगर सरकार यूपी में भारी मात्रा में निवेश कराना चाहती है तो उसे सबसे पहले इन समस्याओं को दूर करना होगा। इसके अलावा उसे अपनी उद्योग नीति पर भी पुनर्विचार करना होगा। यदि ऐसा हो गया तो निवेशक यहां पंूजी लगाने से हिचकेंगे नहीं। निवेशकों के आने से न केवल प्रदेश का आर्थिक विकास होगा बल्कि यहां के युवाओं को रोजगार भी मिल सकेंगे। यह स्थिति बाजार की मंदी को बहुत हद तक कम कर देगी।

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