खून से लाल हो रहीं राजधानी की सडक़ें भारी पड़ रही यातायात नियमों की अनदेखी

दुर्घटनाओं में हर दिन काल के गाल में समा रहे कमाऊ पूत, उजड़ चुके है सैकड़ों घर
जागरूकता अभियान का भी नहीं दिख रहा असर, ट्रैफिक पुलिस भी सुस्त

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी की सडक़ें खून से लाल हो रही हैं। सडक़ दुर्घटनाओं में लोग मारे जा रहे हैं। इसके चलते अब तक सैकड़ों लोगों के घर उजड़ गए हैं। कई मां ने अपने लाल तो विवाहिताओं ने अपने सुहाग खो दिए हैं। यातायात नियमों की अनदेखी जीवन पर भारी पड़ रही है। वहीं जागरूकता अभियान भी असर नहीं दिखा पा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर ट्रैफिक पुलिस सुस्त दिखाई पड़ रही है। लिहाजा हादसे थम नहीं रहे हैं।
खूनी सडक़ें लोगों की जिंदगी लील रही हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता हो जब सूबे में रफ्तार की चपेट में आकर किसी की जान न गई हो। हादसों का आलम यह है कि कहीं किसी मां का इकलौता बेटा अपनों को छोडक़र हमेशा के लिये चला गया है तो कहीं किसी विवाहिता का सुहाग उससे छिन रहा है। अचानक आई इस विपदा से तमाम घर उजड़ चुके हैं। सडक़ हादसों में मौत कभी डंफर के रूप में आती है को कभी कार या बाइक के रूप में। कभी रफ्तार का कहर ऐसा भी देखने को मिला कि चालक ने अपनी गाड़ी से नियन्त्रण खो दिया और वह अनियन्त्रित होकर पलट गयी जिससे चालक की जान चली गई है। पिछले दिनों गोमतीनगर थाना क्षेत्र के समतामूलक चौराहे के पास एक इनोवा कार अनियन्त्रित होकर डिवाइडर से टकरा गयी थी जिसमें कार सवार आलमबाग के गढ़ी कनौरा के रहने वाले अभय सिंह राठौर की मौत हो गयी। बताया जाता है कि अभय अपने दोस्तों के साथ किसी समारोह में भाग लेने के लिये गोरखपुर गया था और उधर से लौटते समय यह हादसा हो गया। अभय इकलौता बेटा था। ऐसी एक वारदात बंथरा थाना क्षेत्र में देखने को मिली।
उन्नाव के हसनगंज कोतवाली के शंकरपुर मोहान गांव का रहने वाला अवध प्रकाश रावत एक शादी समारोह में गया था। वहां से वह सुबह अपनी बाइक पर दो बच्चों व एक महिला को बिठाकर वापस घर आ रहा था। बाइक सवार बंथरा के बनी रोड पर पहुंचा ही था तभी उधर से तेज रफ्तार आ रहे डंफर ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मारी जिससे बाइक सवार अवध प्रकाश और दो बच्चों ने मौके पर दम तोड़ दिया था। बाइक पर बैठी महिला अभी ट्रामा सेन्टर में जिन्दगी और मौत के बीच झूल रही है। बताया जाता है कि अवध अपने परिवार में इकलौता सदस्य था जिसके कंधे पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी। उसकी मौत के बाद अब परिवार वालों पर भी रोजी रोटी का संकट आ गया है। वहीं दूसरी ओर यातायात नियमों का पालन करने के लिए तैनात पुलिस पूरी तरह लापरवाह दिखाई पड़ती है। कई बार पुलिस के सामने लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इससे लोगों में नियमों के प्रति डर नहीं है। हालांकि कभी-कभी यातायात नियमों को लेकर अभियान चलाया जाता है। पुलिस कुछ लोगों का चालान काट कर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ रही है।

राजधानी के खतरनाक जोन
कानपुर रोड का बंथरा और सीतापुर रोड का मडिय़ांव ़क्षेत्र खतरनाक जोन है। इसके अलावा मटियारी और दुबग्गा दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र है। यह क्षेत्र खुला क्षेत्र है और इन जगहों पर लोग बेहद स्पीड में गाड़ी चलाते हैं और स्पीड ज्यादा होने की बजह से चालक गाड़ी पर नियंत्रण नहीं कर पाता और इसकी बजह से वह दुर्घटना का शिकार हो जाता है।

राजधानी में आये दिन हो रही सडक़ दुर्घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह यातायात नियमों की अनदेखी है। बाइक चलाते समय हेलमेट और कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग न करने के कारण भी दुर्घटनाओं में जान जाने की आशंका बनी रहती है। यदि लोग यातायात नियमों का पालन सही तरीके से करें तो दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लगाया जा सकता है। इसके अलावा युवा पीढ़ी में इयर फोन भी दुर्घटना का बड़ा कारण है । लोग गाड़ी चलाते समय मोबाइल व इयर फोन का प्रयोग करते है यह हादसों को न्योता देते हैं।
रवि शंकर निम, एसपी ट्रैफिक

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