गोमती नगर विस्तार में करोड़ों का कालाधन खपाया राजनेताओं और अफसरों ने

अरबों की काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए खरीदे गए सैकड़ों फ्लैटों का आज तक नहीं खुला ताला
गोमती नगर विस्तार में हैं आईएएस अफसरों और राजनेताओं के दर्जनों फ्लैट
बंद पड़े फ्लैटों के कारण अपार्टमेंट की व्यवस्थाएं हो रहीं चौपट, मेन्टीनेंस के लिए लोगों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ

विनय शंकर अवस्थी
लखनऊ। अगर आप कोई संपत्ति खरीदते हैं तो उसकी देखभाल करते हैं। मगर कोई फ्लैट खरीदे और रजिस्ट्री कराने के बाद पांच साल तक उन फ्लैटों को खोल कर भी न देखे तो आपको हैरानी तो होगी ही। मगर जब आपको पता चले कि एक दो नहीं बल्कि गोमती नगर विस्तार में सैकड़ों फ्लैट ऐसे हैं जो खरीदने के बाद कभी खोले ही नहीं गए तो आपको समझ आ जायेगा कि यह संपत्ति केवल कालाधन खपाने के लिए खरीदी गई है। गोमती नगर विस्तार नौकरशाहों और राजनेताओं की काली कमाई खपाने का एक बड़ा अड्डा बन गया था, यह बात 4पीएम की पड़ताल में सामने आई है।
सरस्वती अपार्टमेंट में 319 फ्लैट हैं, जिसमें से 42 फ्लैट ऐसे हैं जो कभी खोले ही नहीं गए। यमुना अपार्टमेंंट में एक दर्जन से ज्यादा फ्लैटों का ताला कभी नहीं खुला। यही हाल गंगा, शारदा, अलकनंदा समेत एक दर्जन सोसायटी का है। जहां दर्जनों फ्लैट सालों से कभी नहीं खुले। इनमें से अधिकांश फ्लैट किसी अंजान व्यक्ति के नाम या अपने रिश्तेदारों के नाम से खरीदे गए हैं, जिससे उन तक कभी भी पहुंचा न जा सके। इस संबंध में सोसायटी के पदाधिकारियों ने एलडीए को भी कई खत लिखे, मगर एलडीए ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इन बंद पड़े फ्लैटों से एलडीए का कोई लेना-देना नहीं है।
इन बंद पड़े फ्लैटों के कारण सोसायटी चलाने में भी परेशानियां खड़ी हो रही हैं क्योंकि इनसे मासिक शुल्क प्राप्त नहीं हो पा रहा और उसके कारण सोसायटी को भुगतान भी नहीं मिल पाता। सोसायटी के भुगतान के लिए कई बार इन फ्लैट स्वामियों को लीगल नोटिस भी दिए गए, मगर गलत पता होने के कारण ये नोटिस वापस आ गए। जाहिर है कि इन बंद पड़े फ्लैटों के मालिकों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए गलत पते दिए थे।
इस समय एक फ्लैट की कीमत 70 से 75 लाख रुपए है, जाहिर है इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ होगी, अगर इस मामले की बड़े पैमाने पर पड़ताल हो गई तो कई ऐसी मछलियां फंसेंगी जो बड़े पैमाने पर काला कारोबार करती हैं।

हमारी सोसायटी मे 42 फ्लैट ऐसे हंै जो आज तक खुले ही नहीं। मुझे लगता है कि यह फ्लैट काली कमाई के हैं। यह राजनेताओं और अफसरों के हो सकते हैं। इसकी जांच करायी जाए। बंद फ्लैटों से सोसायटी चलाने में भी बहुत परेशानी
हो रही है।
-जीपी शुक्ला अध्यक्ष, सरस्वती रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी

इन फ्लैटों के बंद होने से हम सब परेशान हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह काफी खतरनाक है। इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि आखिर ऐसे कौन लोग हंै जो सालों से अपना फ्लैट बंद करके भूल गये हैं। यह जरूरी है कि तत्काल इन सभी फ्लैटो की पूरी तरह से पड़ताल की जाए।
अनूप शुक्ला, निवासी, सरस्वती अपार्टमेंट

बताया जाता है कि गोमतीनगर विस्तार में कई नौकरशाहों, राजनेताओं और बिजनेसमैन के चार-चार फ्लैट हैं। इन लोगों ने इनवेस्टमेंट की दृष्टिï से इन्हें खरीदकर छोड़ दिया है। इसका खामियाजा सोसायटी के लोग भुगत रहे हैं। इन लोगों से मेन्टीनेंस चार्ज नहीं मिलपा रहा जिससे सोसाइटी की साफ-सफाई पर असर पड़ रहा है।
अमित सिंह, सचिव, यमुना अपार्टमेंट

एलडीए की अपार्टमेंट के रखरखाव की जिम्मेदारी तीन साल तक होती है। उसके बाद अपार्टमेंट की समिति को जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। सोसायटी को कोई समस्या है तो एलडीए को अवगत कराएं। समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा। बेनामी संपत्ति से एलडीए का कोई मतलब नहीं होता है।
-एमपी सिंह, सचिव, एलडीए

यह है आय से अधिक संपत्ति मामले में सालों तक जेल में रहे पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा का फ्लैट
सरस्वती अपार्टमेंट का 103 नंबर फ्लैट इस बात की गवाही दे रहा है कि किस तरह राजनेताओं ने अपनी काली कमाई छिपाने के लिए गोमती नगर विस्तार में भी संपत्ति खरीद डाली मगर उसके बाद कभी मुडक़र उस संपत्ति की तरफ नहीं देखा। यह फ्लैट पूर्वमंत्री रंगनाथ मिश्रा का है। इस फ्लैट में सोसायटी की तरफ से मेंटीनेंस का नोटिस तक लगाया गया, मगर आज तक न तो नोटिस का जवाब मिला और न ही यह फ्लैट कभी खुला।

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