वेंटिलेटर पर केजीएमयू की एंबुलेंस सेवा, निजी संचालक मरीजों से वसूल रहे मनमानी किराया

ट्रामा और ओपीडी में लगाई गई सभी एंबुलेंस खस्ताहाल, तीमारदार हलकान
वीगो और पट्टी बांध कर एंबुलेस को किया जा रहा है संचालित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की एंबुलेंस सेवा वेंटिलेटर पर है। इनकी हालत इतनी खस्ता है कि इन एंबुलेंसों के टूटे बम्पर वीगो और पट्टी से बांधे जाते हैं जबकि ड्रेसिंग में प्रयोग होने वाले टेप से इनकी फटी सीटों की मरम्मत की जाती है। एम्बुलेंस की हालत इतनी खस्ता है कि वार्ड तक पहुंचने में मरीज किसी तरह भले बच जाए लेकिन तीमारदार अक्सर चोटिल हो जाते हैं। एंबुलेंस की इस खस्ताहाल का लाभ निजी एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं। वे मरीजों से मनमानी किराया वसूलते हैं। वहीं केजीएमूय प्रशासन एंबुलेंस को ठीक कराने की जहमत तक नहीं उठा रहा है।
ट्रामा में सात और ओपीडी में दो एंबुलेंस मरीजों के लिए तैनात की गई हैं। इनका काम मरीजों को वार्डो में शिफ्ट करना व विभागों में जांच आदि के लिए ले जाना है। इनमें से दो एंबुलेंस में सिर्फ सिटिंग सीट हैं यानी मरीज इसमें लेट कर नहीं जा सकता है। सात एंबुलेंस पर ही मरीजों को ढोने का दारोमदार है, जो कि नाकाफी नहीं है। वहीं दो एंबुलेंस ट्रामा सेंटर और पांच पीआरओ ऑफिस के पास खराब खड़ी पड़ी हैं। इसके अलावा भी अन्य कई एंबुलेंस कंडम हालत में हैं। काफी दिनों से खराब खड़ी इन एंबुलेंस की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। जानकारी के बावजूद केजीएमयू प्रशासन इस मामले पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। कई बार कहे जाने के बाद भी इस मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसका खामियाजा मरीजों को उठना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। मरीजों को लाने के लिए एंबुलेस की व्यवस्था की गई है। कंडम एंबुलेंस के कारण तीमारदार मरीज को वार्ड आदि में शिफ्ट करने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेने के लिए मजबूर हैं। वहीं ट्रामा सेंटर के बाहर निजी एंबुलेंस संचालकों का जमावड़ा रहता ही है। यहां इनका धंधा खूब फलफूल रहा है। वे मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमानी किराया वसूल रहे हैं। शिकायत के बावजूद इन पर लगाम नहीं लग रही है। हरदोई निवासी राजेश अपने भाई का इलाज ट्रामा में करा रहे हैं। राजेश ने बताया कि उनके भाई को सांस लेने में दिक्कत है, इसके कारण उसे ऑक्सीजन भी लगा रहता है, लेकिन जब एमआरआई कराने गये तो ट्रामा से खुद ही स्ट्रेचर व ऑक्सीजन सिलेंडर खींच कर ले जाना पड़ा। इतना ही नहीं लखनऊ निवासी सुनील अपने 14 वर्षीय बेटे को बुखार होने पर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया था,लेकिन आराम न मिलने पर डॉक्टर ने एमआरआई कराने को कहा, लेकिन ट्रामा से एमआरआई सेंटर लाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली लिहाजा बच्चे को गोद में ही लाना पड़ा। वहीं जब सुनील को एमआरआई सेंटर पर जांच कराने के लिए नम्बर लगाने के बाद अपने बच्चे को बाहर जमीन पर लिटाना पड़ा। केजीएमयू में इस तरह की घटना आम हैं। वहीं यहां पर निजी एंबुलेंस संचालक इसका खूब फायदा उठा रहे हैं। वे मरीजों को ले जाने के लिए मनमानी रकम वसूलते हैं। इससे गरीबों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं केजीएमयू प्रशासन मरीजों की परेशानी जानने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

यदि कोई निजी एंबुलेंस बुक कर रहा है तो उसे हम रोक तो सकते नहीं, लेकिन पांच मिनट के अंदर नब्बे फीसदी मरीजों को एंबुलेंस मुहैया करा दी जाती है, जो दिक्कतें आ रही हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. विजय कुमार
चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू
चौबीस घंटे में ट्रामा सेंटर में करीब डेढ़ सौ मरीज भर्ती होते हैं। सुबह पांच बजे से ही मरीजों की वार्ड में शिफ्टिंग शुरू कर दी जाती है। एंबुलेंस कम हैं जिसकी वजह से कुछ समस्याएं आ रही हैं। दो एंबुलेंस को मरम्मत के लिए वर्कशाप भेजा गया है। संस्थान प्रशासन से एंबुलेंस बढ़ाने की मांग की गई है।
डॉ. संतोष कुमार, ट्रासपोर्ट इंचार्ज, केजीएमयू

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