गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेंगे उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव परिणाम

भाजपा के लिए बड़ी चुनौती, सीएम योगी सहित बड़े नेता मैदान में
दो चरणों के चुनाव हो चुके संपन्न, तीसरे के लिए झोंकी ताकत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। निकाय चुनाव में फतह हासिल करने के लिए भाजपा नेता दिन रात मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के तूफानी दौरे पर हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टाइल में धुआंधार प्रचार कर निकाय चुनाव में भाजपा को बड़ी विजय दिलाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इस चुनाव में उनकी प्रतिष्ठïा दांव पर लगी है। यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद निकाय चुनाव में योगी की लोकप्रियता की परीक्षा होनी है। वहीं यदि प्रदेश के निकाय चुनाव में भाजपा बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई तो योगी की छवि के साथ इसका सीधा असर गुजरात चुनाव में भी दिखाई पड़ेगा। इसको ध्यान में रखते हुए शुरुआती दौर से ही भाजपा के बड़े नेता निकाय चुनाव के मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं।
अब तक प्रदेश में दो चरणों का निकाय चुनाव संपन्न हो चुका है। भाजपा इस चुनाव को खुद को किसी भी सूरत में कमजोर नहीं साबित होने देना चाहती है। निकाय चुनाव में भारी जीत हासिल करने के लिए पहली बार बीजेपी ने निकाय चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी किया। इस चुनाव को योगी सरकार की पहली परीक्षा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पष्टï कर चुके हैं कि अगर चुनाव सरकार के लिए कसौटी है तो फिर हम इसे अपने लिए जनमत मान कर चल रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने अपने चुनाव का प्रचार अयोध्या से शुरू किया है ताकि अपने एजेंडे में कामयाबी हासिल की जा सके। उनकी पहली चुनावी सभा जीआईसी ग्राऊंड अयोध्या में हुई थी। अयोध्या को योगी सरकार ने नगर निगम बनाया है, अब यहां पहली बार मेयर का चुनाव हो रहा है। इतना ही नहीं दिवाली के मौके पर अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन कर योगी आदित्यनाथ ने अपनी हिन्दूवादी छवि को बरकार रखा है। यह पहला मौका है जब किसी सीएम ने निकाय चुनाव के लिए जी जान लगा दिया है। यूपी में हो रहे निकाय चुनाव में दो चरणों का मतदान हो चुका है जबकि 29 नवम्बर को तीसरे चरण का मतदान होना बाकी है इसके बाद वोटों की गिनती एक दिसंबर को होगी। वहीं गुजरात में पाटीदारों के आंदोलन के बाद पिछले साल स्थानीय निकाय के चुनाव में बीजेपी को शहरों में बढ़त मिली, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस के जिस तरह से नतीजे देखने को मिले उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की चिंताएं बढऩा लाजमी था। दिल्ली और बिहार विधानसभा में मिली हार से बीजेपी अभी तक पूरी तरह से उबर भी नहीं पाई है। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी की चिंता इस बात को लेकर है कि जिस तरह की राजनीतिक स्थिति इस वक्त गुजरात में बनी हुई है, इसका असर 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे में दिख सकता है। दरअसल, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आनंदी बेन पटेल ने गुजरात की सत्ता संभाली। उनके शासनकाल पर पहली बार सवाल तब उठे जब हार्दिक पटेल ने 25 अगस्त 2015 को गुजरात सरकार के खिलाफ रैली की। हार्दिक पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अहमदाबाद में 5 लाख पटेलों के साथ एकजुट हुए तो गुजरात सरकार के होश उड़ गए। आंदोलन हिंसक हुआ और फिर केंद्र के दखल के बाद मामला शांत भी हुआ, लेकिन इस आंदोलन ने राज्य में एक नई राजनीतिक रेखा खींच दी। इसके बाद से भाजपा को इस बात का एहसास हो गया कि यदि पाटीदार आन्दोलन इसी प्रकार चलता रहा तो आने वाले समय में उनके गढ़ में भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने यूपी में हो रहे निकाय चुनाव में भी पूरा दमखम लगा दिया है ताकि गुजरात में इसका कोई गलत असर न हो।

अपनी छवि को लेकर मोदी संवेदनशील
पीएम मोदी भी जानते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव में अगर अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आए तो उनकी लीडरशिप पर सवाल खड़े हो जाएंगे। लोकसभा चुनाव से पहले यह मोदी के लिए इतना बड़ा झटका होगा, जिससे उबर पाना उनके और पार्टी दोनों के लिए मुश्किल होगा। वैसे भी पीएम मोदी के लिए कहा जाता है कि वे अपनी इमेज को लेकर बहुत संवेदनशील रहते हैं।

शाह और मोदी की गुजरात के नेताओं संग बैठक

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात में अपने दौरों की संख्या बढ़ा दी और पार्टी नेताओं और मंत्रियों संग बैठक शुरू कर दी है। एक हफ्ते में गुजरात को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ओम प्रकाश माथुर की दो बार लंबी-लंबी मीटिंग हो चुकी है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने भी पीएम नरेंद्र मोदी और ओम माथुर से अलग-अलग बैठक की है।

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