यह हैं यूपी के मंत्री..न हेलमेट न गाड़ी पर नंबर…कानून ठेंगे पर

उत्तर प्रदेश के ग्राम विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेन्द्र सिंह की एक फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। मंत्री जी ने यह फोटो खुद ही ट्वीट की है, जिसमें उन्होंने लखनऊ में मतदान के दौरान बुलेट की सवारी का जिक्र किया है। वह बुलेट पर बैठे हैं, लेकिन उन्होंने हेलमेट नहीं पहना है। इतना ही नहीं मंत्री जी जिस गाड़ी पर बैठे हैं, उसका नंबर भी नहीं है। जब सरकार में शामिल मंत्री ही कानून व्यवस्था को ठेंगे पर रखेंगे तो जनता से क्या उम्मीद करें। फिलहाल मंत्री जी ये फोटो लगाकर क्या संदेश देना चाहते हैं यह तो वहीं जाने लेकिन मंत्री जी की फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

लखनऊ में वोटर लिस्ट की खामियों पर चुनाव आयोग ने उठाए सवाल

राज्य निर्वाचन आयोग ने नाराजगी जताते हुए डीएम लखनऊ से किया जवाब-तलब
डीएम कौशल राज ने तीन बीएलओ को किया सस्पेंड

४पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निकाय चुनाव में राजधानी लखनऊ वोटिंग को लेकर फिसड्डी साबित हुई। इस बार लखनऊ में सबसे कम मतदान हुआ। इसका सबसे बड़ा कारण था वोटर लिस्ट से मतदाताओं का नाम गायब होना। कल मतदान के दौरान वोटर लिस्ट में नाम न होने की दर्जनों शिकायतें आर्ईं। इस पर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाते हुए डीएम लखनऊ कौशल राज से जवाब-तलब कर लिया है। फिलहाल लखनऊ में वोटर लिस्ट की शिकायतों को लेकर डीएम ने ३ बीएलओ को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि बीएलओ की लापरवाही से चुनावी परीक्षा में लखनऊ फेल हो गया।
डीएम कौशल राज शर्मा ने वोटर लिस्ट में नाम गायब होने, वोटरों के घर पर्ची नहीं पहुंचाने के लिए बीएलओ को जिम्मेदार माना है और उन्होंने तीन बीएलओ निलंबित कर दिया है। बता दें कि नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में राजधानी लखनऊ में ३७.५७ प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस दौरान कई इलाकों में ईवीएम की खराबी और वोटरलिस्ट में नाम नहीं होने की दर्जनों शिकायतें आईं। इनमें प्रदेश के डीजीपी तक वोट नहीं डाल सके। यही नहीं दिल्ली से सिर्फ वोट डालने आए बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को भी मायूस होना पड़ा। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा था। मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि नगरपालिका ऐक्ट के अनुसार ही वोटर लिस्ट बनती है। वोटर लिस्ट में २०१२ में कोई शिकायत नहीं हुई। इतने बड़े काम में गलतियां होती हैं। इस बार वोटर लिस्ट को और दुरुस्त किया गया, ऐसे तमाम लोगों के नाम काटे गए, जिनका नाम शहर और गांव दोनों जगह था। उन्होंने बताया कि इस बार करीब ९४ लाख मतदाता बढ़ाए गए। लगभग ८० लाख वोटर के नाम हटाए गए। पर्ची बांटने के काम में लखनऊ में ढिलाई हुई। लखनऊ डीएम को भी इसके लिए कहा गया था।

गाजीपुर में डीएम की तैनाती के दौरान हुआ इश्क और कर ली फरियादी से सादगी से शादी

गाजीपुर डीएम रहने के दौरान फरियाद लेकर आई थी लडक़ी
अपने कार्यों और प्रयोगों के लिए चर्चा में रहते हैं संजय खत्री

४पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। रायबरेली के डीएम संजय खत्री एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह किसी प्रशासनिक कामकाज की वजह से नहीं बल्कि अपनी शादी की वजह से चर्चा में है। उन्होंने बहुत ही सामान्य परिवार की लडक़ी को अपनी जीवन संगिनी बनाकर एक मिसाल पेश की है। दरअसल उनकी जीवन संगिनी उनके गाजीपुर डीएम रहने के दौरान अपनी फरियाद लेकर आयी थी। एक छोटी सी मुलाकात प्यार में बदल गई और बीते दिनों इन लोगों ने बहुत सादगी से शादी कर ली।
संजय खत्री वर्तमान में रायबरेली के डीएम हैं। मार्च २०१६ में उन्होंने गाजीपुर के डीएम का पदभार ग्रहण किया था। गाजीपुर पोस्टिंग के दौरान ही एक दिन एक लडक़ी अपनी फरियाद लेकर उनसे मिलने आयी। अपनी समस्या को लेकर लडक़ी की कई बार डीएम से मुलाकात हुई। बातों का सिलसिला शुरु हुआ। बात बढ़ी तो दोनों के बीच प्यार हो गया। प्यार परवान चढ़ा तो दोनों ने एक दूसरे के साथ जीवन भर रहने का वादा किया और पिछले १९ नवंबर को हमेशा के लिए एक दूसरे के साथ सात फेरों में बंध गए। शादी बहुत ही सादगी से हुई। शादी के डीएम खत्री के कुछ खास मित्र ही शामिल हुए। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी सामान्य परिवार से हैं।

संजय को लेकर मंत्री ओम प्रकाश ने किया था बवाल

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पांच महीने पहले डीएम संजय खत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राजभर ने ऐलान किया था कि डीएम को हटाया नहीं गया तो सरकार के खिलाफ इस्तीफा देकर धरने पर बैठ जाएंगे। राजभर ने सीएम योगी से भी मुलाकात की थी। राजभर ने बताया था कि १९ विकास कार्यों की मांग थी, जिसमें १७ को उन्होंने तत्काल मानते हुए आदेश जारी किया और दो के लिए कमेटी बना दी। इन्हीं मांगो को डीएम ने खारिज कर दिया था। दरअसल मामला यह था कि प्रापर्टी को लेकर बड़ेसर गांव में विवाद हुआ था। जमीन पैमाइश के दौरान कानूनगो, लेखपाल और मंत्री ओम प्रकाश राजभर के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें डीएम ने कार्रवाई करते हुए मंत्री पक्ष के समर्थकों समेत जिलाध्यक्ष रामजी राजभर पर मुकदमा दर्ज करवा दिया था। इसी मुकदमे को वापस लेने को लेकर बवाल शुरु हुआ था।

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