रेल हादसे, सरकार और यात्रियों की सुरक्षा

सवाल यह है कि देश में बुलेट ट्रेन चलाने की बात करने वाली सरकार सामान्य ट्रेनों का संचालन करने में नाकाम क्यों हो रही है? क्या केवल जांच और मुआवजे का ऐलान कर सरकार अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ सकती है? पिछले डेढ़ वर्षों में अधिकांश बड़े ट्रेन हादसे उत्तर प्रदेश में ही क्यों हो रहे हैं? क्या आधुनिक तकनीक और जर्जर हो चुकी ट्रेन की पटरियां इन हादसों के लिए जिम्मेदार हैं?

एक ही दिन दो सवारी ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त हुईं। इन दुर्घटनाओं ने सरकार के सुरक्षित रेल यात्रा के दावों की पोल खोल दी है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के पास पटना जा रही वास्को-डि-गामा एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में तीन यात्रियों की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर सहारनपुर में अर्चना एक्सप्रेस का इंजन ट्रेन से अलग हो गया। एक बार फिर सरकार ने पीडि़तों को मुआवजा देने का ऐलान किया है। साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं। सवाल यह है कि देश में बुलेट ट्रेन चलाने की बात करने वाली सरकार सामान्य ट्रेनों का संचालन करने में नाकाम क्यों हो रही है? क्या केवल जांच और मुआवजे का ऐलान कर सरकार अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ सकती है? पिछले डेढ़ वर्षों में अधिकांश बड़े ट्रेन हादसे उत्तर प्रदेश में ही क्यों हो रहे हैं? क्या आधुनिक तकनीक और जर्जर हो चुकी ट्रेन की पटरियां इन हादसों के लिए जिम्मेदार हैं? आखिर रेल यात्रा के संचालन में सरकार प्रोफेशनल रुख क्यों नहीं अपना रही है? तमाम जांच रिपोर्ट के बावजूद रेल संचालन को दुरुस्त क्यों नहीं किया जा रहा है? भारतीय रेल विश्व की बड़ी रेल सेवाओं में शुमार है। प्रतिदिन करीब पांच करोड़ लोग ट्रेन से एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं। ट्रेन से होने वाली आमदनी देश की जीडीपी में अपनी अहम भागीदारी निभाती है। बावजूद इसके सरकार आज तक रेलयात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। इन हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तो हादसों को रेल की नियति माना जाने लगा है। हकीकत यह है कि अधिकांश रेल पटरियां जर्जर हो चुकी हैं। कई पुल खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। रेलवे के नवीनीकरण के लिए पेश की गई तमाम रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। रेल मंत्रालय यात्रियों से किराया वसूलने का तंत्र बनकर रह गया है। उत्तर प्रदेश में रेल हादसों की संख्या बढऩे की बड़ी वजह जर्जर पटरियों को ही माना जा रहा है। इसके अलावा मानवविहिन रेल फाटक भी हादसों का सबब बन रहे हैं। सिग्नल सिस्टम बाबा आदम के जमाने का है। जाहिर है सरकार जब तक रेलवे का पूरी तरह से नवीनीकरण नहीं करती इन हादसों को रोका नहीं जा सकेगा। इसके अलावा रेलवे की संचालन व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीकी से लैस भी करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में लोग रेलयात्रा से दूरी बना लेंगे और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।

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