सडक़ दुर्घटनाएं और वाहन चालकों पर सख्ती की सार्थकता

सवाल यह है कि क्या सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट पर्याप्त हैं? क्या प्रदेश की खस्ता हाल सडक़ें और यातायात के नियमों का उल्लंघन दुर्घटनाओं का कारण नहीं हैं? क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों पर शिकंजा कसा जा सका है? क्या बिना परीक्षण के फर्जी तरीके से जारी किए जा रहे ड्राइविंग लाइसेंस दुर्घटनाओं का कारण नहीं हैं?

सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बिना हेलमेट और सीट बेल्ट वाले वाहन चालकों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इसके अलावा अब दो पहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले को भी हेलमेट लगाना होगा। यातायात पुलिस ने अभियान चला कर ऐसे वाहन चालकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सवाल यह है कि क्या सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट पर्याप्त हैं? क्या प्रदेश की खस्ता हाल सडक़ें और यातायात के नियमों का उल्लंघन दुर्घटनाओं का कारण नहीं हैं? क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों पर शिकंजा कसा जा सका है? क्या बिना परीक्षण के फर्जी तरीके से जारी किए जा रहे ड्राइविंग लाइसेंस दुर्घटनाओं का कारण नहीं हैं? क्या इन कारणों को दूर करने के लिए सरकार कोई सघन अभियान चलाएगी? क्या इन कारणों को समाप्त किए बिना सरकार के ताजा अभियान की कोई सार्थकता सिद्ध होगी? पूरे देश में सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो के मुताबिक सडक़ हादसों में प्रति घंटे 16 लोगों की मौत हो रही है जबकि कई स्थायी रूप से अपंग हो रहे हैं। सडक़ दुर्घटनाओं के मामले में उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहद खराब है। हकीकत यह है कि प्रदेश की तमाम सडक़ें खस्ताहाल है। मानकों को दरकिनार कर सडक़ों के बीच बनाए गए स्पीड ब्रेकर और गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। हाईवे पर ट्रैफिक निगरानी तंत्र की कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है। लिहाजा इस पर चालक मानक स्पीड से कहीं अधिक रफ्तार से वाहन दौड़ाते हैं। निगरानी तंत्र के सक्रिय नहीं होने के कारण ऐसे चालकों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होती है। जाहिर है तेज रफ्तार वाहन हाईवे पर हादसों का सबब बनते जा रहे हैं। इसके अलावा अधिकांश सडक़ों के निर्माण में वैज्ञानिक तकनीकी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। केंद्रीय सडक़ एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्वीकार किया है कि अवैज्ञानिक तरीके से बनी सडक़ें हादसों का बड़ा कारण हैं। यही नहीं बिना प्रशिक्षण के सडक़ पर वाहन दौड़ा रहे चालक हादसों का सबब बन रहे हैं। जाहिर है यदि दुर्घटनाओं को रोकना है तो सरकार को इन सभी कारणों को समाप्त करना होगा। इसके अलावा जनता के बीच यातायात नियमों के लिए सतत जागरूकता अभियान चलाना होगा। इतना कर लेने के बाद ही हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता की सार्थकता सिद्ध होगी।

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