यूपी के स्थानीय निकाय और गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले गरमाया तीन तलाक का मुद्दा

पीएम नरेन्द्र मोदी के तरकश से फिर निकला तीन तलाक का तीर
गुजरात चुनाव को प्रभावित करने के लिए सरकार ने यह खबर फैलाई : जफरयाब जीलानी
यह सरकार वो हर काम कर रही है जिससे मुसलमानों को नुकसान पहुंचे : मौलाना शहाबुद्दीन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी के स्थानीय निकाय चुनाव और गुजरात में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीन तलाक का मुद्दा फिर गरमा गया है। तीन तलाक पर केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने जा रही है। इसके लिए मंंत्रीस्तरीय कमेटी बनाई गई है। उधर, तमाम मौलवी इसके विरोध में आ गए हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक स्टंट भी मान रहे हैं। संसद में कानून लाने की खबर फैलते ही इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है। मुस्लिम धर्म गुरुओं का मानना है कि इसके लिए पहले से कानून है और शरीयत में दखलंदाजी कर कोई कानून जबरन नहीं थोपना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने गत 22 अगस्त को तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। लेकिन इसके बाद भी हकीकत में यह प्रथा जारी है। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन और दूसरे मुस्लिम महिला संगठन तीन तलाक पर कानून बनाने की मांग करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की बात को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने इस मामले में विधेयक लाने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्र सरकार की ओर से यह कवायद ऐसे समय की गई है जब यूपी में स्थानीय निकायों के चुनाव चल रहे हैं और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। यह खबर फैलते ही देश भर में इसको लेकर प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। गुजरात चुनाव को प्रभावित करने के लिए यह खबर फैलाने की साजिश भी बताई जा रही है। दूसरी ओर मुस्लिम संगठनों से जुड़े मौलानाओं ने तीन तलाक पर कानून लाने पर कड़ा विरोध जताया है।
इमाम ए जुमा मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा है कि जबरदस्ती कोई कानून बनाना ठीक नहीं। एक साथ तीन तलाक की शिया मसलक में कोई अहमियत नहीं है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने कहा है कि गुजरात चुनाव को प्रभावित करने के लिए यह खबर फैलाई गई है। सुन्नी धर्मगुरु मौलाना जहांगीर आलम कासमी का कहना है कि सभी निकाह और तलाक पूरी तरह से शरीयत के कानून पर आधारित हैं। इसलिए शरीयत में दखलंदाजी कर कोई कानून न थोपा जाए।
फतबा ऑन लाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि शरीयत में पहले से तीन तलाक को लेकर कानून है ऐसे में कोई नया कानून लाने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि यह शरीयत कानून से न टकराए। तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन का कहना है कि यह सरकार केवल मुसलमानों को नुकसान पहुंंचाने और उन्हें डराने का काम कर रही है। ये सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के लिए किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर तमाम मुस्लिम शख्सियत तीन तलाक पर कानून के पक्ष में हैं। सायरा बानो का कहना है कि कानून बनाने से मुस्लिम महिलाओं का आत्मसम्मान और स्वाभिमान बढ़ेगा। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सह संयोजक इस्लाम अब्बास का कहना है कि सरकार के निर्णय का स्वागत है। कुछ लोग तीन तलाक के नाम पर हमारी बहन-बेटियों पर अत्याचार करते हैं।

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