दस वर्ष बाद भी रहस्य बनकर रह गया राजधानी का श्रीनाथजी ज्वेलर्स हत्याकांड

क्राइम ब्रांच फेल, नाकाम पुलिस ने लगाई फाइनल रिपोर्ट
फिल्मी स्टाइल में बदमाशों ने दो कर्मियों की कर दी थी हत्या

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। 13 अगस्त 2007 की शाम राजधानी के अति व्यस्त एरिया अलीगंज के डंडहिया में पुलिस से बेखौफ लुटेरे बड़े आराम से एक प्रसिद्ध ज्वेलर्स की दुकान में घुसे। जब तक दुकानदार कुछ समझ पाता बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर दुकान के दो कर्मचारियों को मौत की नींद सुला दिया। इसके बाद बदमाशों ने शोरूम में रखे कीमती गहनों को लूट कर भीड़ भरे क्षेत्र मैं फिल्मी स्टाइल में भाग गए। ये किसी फिल्म का सीन नहीं है। ऐसी घटना लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र में वर्ष 2007 में घट चुकी है। ताज्जुब वाली बात यह है कि इस घटना के खुलासे के लिए पुलिस के सारे तन्त्र फेल हो गए हैं। अधिकांश घटनाओं के खुलासे के बाद सर्विलांस और मुखबिर तन्त्र की बात करने वाली पुलिस के ये तन्त्र भी काम नहीं आये। घटना के खुलासे में नाकाम होने पर पुलिस ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए इस पर फाइनल रिपोर्ट लगा कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। पुरानी और दुस्साहसिक घटनाओं के खुलासे के लिए पुलिस कितनी गंभीर होती है इसे बताने की जरूरत नहीं है। इस घटना के खुलासे की बात जब एसओ अलीगंज से की गई तो उनका कहना था कि इस पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गयी है।
वर्ष 2007 मैं अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित डंडहिया बाजार में स्थित श्रीनाथजी ज्वेलर्स की दुकान से खाकी को खुली चुनौती देते हुए लुटेरों ने दुकान पर मौजूद दो कर्मचारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी और दुकान में रखे गहनों को लेकर फिल्मी स्टाइल में तमंचा लहराते हुए फरार हो गए थे। सरेशाम हुई इस घटना की सूचना से पुलिस विभाग में हडक़ंप मच गया था। तत्कालीन आईजी और डीआईजी समेत एसएसपी मौके पर पहुंचे और घटना का जल्द खुलासा करने का दावा भी किया था। तत्कालीन आईजी ने इस घटना के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच के साथ एसटीएफ को भी लगाया था। शुरुआती दिनों में पुलिस की सभी टीमों ने कई जनपदों में डेरा डालकर कई गैंग के सदस्यों को उठाया और उनसे कई बार पूछताछ की मगर अंतत: मामला नहीं खुला। पुलिस ने अपने अस्त्र सर्विलांस का भी सहारा लिया मगर नतीजा शून्य ही रहा। ताज्जुब वाली बात तो यह है कि पीडि़त ज्वेलर्स राजा भइया ने अपने साथ हुई घटना की पीड़ा तत्कालीन डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक से की तब पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए कई टीमों का गठन किया था। अब पुलिस ने यह पूरा मामला भगवान के भरोसे छोडक़र फाइनल रिपोर्ट लगा दी है

इन केसों का भी नहीं हुआ खुलासा
ऐसी ही एक वारदात 2015 में मडियांव थाना क्षेत्र मे हुई थी जहां के आईआईएम रोड पर दो महिलाओं के शव मिले थे और सीतापुर के मानपुर थाना क्षेत्र में दो सिर भी मिले थे। ये महिलाएं कौन थी? सीतापुर और लखनऊ में मिले इनके सिर और धड़ आज तक जांच का विषय बने हुए हैं। पुलिस ने इस मामले के खुलासे के लिए फोरेंसिक टीम की भी मदद ली मगर नतीजा सिफर ही रहा है। इस सम्बंध में प्रभारी निरीक्षक ने एसएसपी को पत्र लिखकर किसी अन्य एजेंसी से जांच कराने की बात कही है।

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