मेक इन इंडिया, सेना और रक्षा सौदे

सवाल यह है कि इस सैन्य सौदे के रद्द होने से दोनों देशों के संबंधों पर कितना और कहां तक असर पड़ेगा? क्या डीआरडीओ भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है? क्या इसका असर भारतीय सेना पर पड़ेगा? क्या सैन्य क्षेत्र में इस तरह के कदम का वैश्विक कूटनीति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा?

रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार ने एक और कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने इजरायल के साथ स्पाइक एंटी टैंक मिसाइलों के लिए हुए 500 मिलियन डॉलर के सौदे को रद्द कर दिया है। सरकार ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ)से सेना के लिए स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल बनाने को कहा है। सवाल यह है कि इस सैन्य सौदे के रद्द होने से दोनों देशों के संबंधों पर कितना और कहां तक असर पड़ेगा? क्या डीआरडीओ भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है? क्या इसका असर भारतीय सेना पर पड़ेगा? क्या सैन्य क्षेत्र में इस तरह के कदम का वैश्विक कूटनीति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा? क्या स्वदेशी तकनीकी पर जोर देने से निकट भविष्य में बेहतर परिणाम दिख सकेंगे? क्या भारत इसके जरिए मिसाइल तकनीकी में अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करना चाहता है? क्या स्वदेशी तकनीकी देश के आर्थिक संपन्नता में अहम भूमिका निभा सकेगी? मोदी सरकार विदेशनीति में लुक ईस्ट की पॉलिसी और सैन्य क्षेत्र में स्वदेशी पर जोर दे रही है। यही वजह है कि भारत अपने संबंधों को एशियाई देशों से मजबूत कर रहा है। वह सैन्य उपकरणों मसलन लड़ाकू विमान और स्वदेशी मिसाइल टेक्नालॉजी को उन्नत कर इन देशों को बेचना चाहता है। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यदि देश के भीतर इनका निर्माण होने लगेगा तो यह विदेशी रक्षा सौदों से काफी किफायती रहेगा। इससे भारतीय वैज्ञानिकों की साख और बढ़ेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। अब तो विदेशी सैटेलाइट भी भारतीय अंतरिक्ष केंद्र से छोड़े जा रहे हैं। इसके एवज में भारत को काफी विदेशी मुद्रा मिल रही है। मोदी सरकार यही उपलब्धि सैन्य उपकरणों और हथियारों के क्षेत्र में हासिल करना चाहती है। लिहाजा वह रक्षा सौदों को रद्द कर रही हैं। डीआरडीओ मिसाइल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रहा है। पिछले दिनों उसने आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। ब्रह्मïोस मिसाइल का भी पांचवी बार सफल परीक्षण हो चुका है। नाग और अनामिका जैसी एंटी टैंक मिसाइलों का निर्माण करने में डीआरडीओ सफल रहा है। डीआरडीओ को भरोसा है कि वह जल्द ही थर्ड जनरेशन मिसाइल टेक्नोलॉजी की मिसाइलों को निर्माण कर सकेगा। जहां तक इजरायल से संबंधों का सवाल है तो उस पर इन सौदों के रद्द होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दोनों देशों के व्यापक हित एक-दूसरे से जुड़े हैं।

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