पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, आईजी कानून-व्यवस्था को थाने में तीन दिन कैंप करने का निर्देश

लापता बच्चों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त
कोर्ट ने एसएसपी इलाहाबाद को अपहृत लडक़ी को 14 दिसंबर तक बरामद कर पेश करने को कहा
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डीजीपी के बयान का भी दिया हवाला जिसमें कहा है कि 11 हजार अपराधों की विवेचना लंबित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा व न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने आज एक सुनवाई के दौरान पीडि़ता वसीम फातिमा को एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाने तथा पागल बनाकर भगा देने के उसके बयान को गंभीरता से लिया है। मालूम हो कि इलाहाबाद की धूमनगंज व खुल्दाबाद थाने की पुलिस अपहृत लडक़ी को बरामद करने में सफल नहीं हो सकी है। कोर्ट ने अपहृत बच्चों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए आईजी कानून व्यवस्था उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह तीन दिन इन दोनों थानों में कैंप करें और दोनों जगह आम आदमी की शिकायतों को स्वीकार कर जनवरी 2015 से लेकर अब तक लापता बच्चों जिनकी शिकायत दर्ज नहीं हुई है और जिनकी शिकायत दर्ज हुई, की विवेचना प्रगति की रिपोर्ट तैयार करके कोर्ट में 14 दिसंबर को पेश करें।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि नाबालिग बच्चों का अपहरण कर जरायम पेशे में धकेल दिया जाता है। पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करती और दबाव में प्राथमिकी दर्ज भी करती है तो ठीक से उसकी विवेचना नहीं करती। कोर्ट ने एसएसपी इलाहाबाद को भी आईजी के साथ थाने में मौजूद रहकर मदद करने को कहा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डीजीपी के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा है कि 11 हजार अपराधों की विवेचना लंबित है। हाईकोर्ट ने डीजीपी को भी इस कार्रवाई की निगरानी के लिए आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आईजी सात दिसंबर को धूमनगंज व आठ दिसंबर को खुल्दाबाद थाने में कैंप करें। लोगों को इसकी सूचना मीडिया व अन्य समाचार माध्यमों से दी जाए, ताकि लोग सीधे आईजी से अपनी शिकायत कर सकें। याचिका में कोर्ट ने आईजी को दोनों थानों की पुलिस के खिलाफ शिकायतों पर भी रिपोर्ट देने को कहा है।
कोर्ट ने पीडि़ता से कहा है कि वे तीसरे दिन आईजी को अपनी शिकायतें दें और किसी को भी शिकायत करने से रोका नहीं जाएगा। कोर्ट ने एसएसपी इलाहाबाद को अपहृत लडक़ी को खोजने का हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया है और 14 दिसंबर को लडक़ी बरामद कर पेश करने को कहा है। साथ ही इस मामले के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने के लिए भी कहा। कोर्ट ने 14 दिसंबर को एसएसपी इलाहाबाद, एसपी सिटी, धूमनगंज व खुल्दाबाद के थाना इंचार्जों को कोर्ट में हाजिर रहने का निर्देश दिया है।

राम की नगरी अयोध्या से कल निकलेगा देश और दुनिया के लिए खास संदेश

अयोध्या चुनाव में दांव पर लगी है योगी की प्रतिष्ठा

पिछले कई दशक से देश की राष्ट्रीय राजनीति की धुरी बनी रही धर्म नगरी अयोध्या
अयोध्या नगर निगम के 1.91 लाख मतदाताओं का नजरिया देश को देगा खास संदेश
लोगों में गुस्सा, राजनीति में छाये रहने के बावजूद नहीं हुआ अयोध्या का विकास

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भगवान राम की नगरी अयोध्या में कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परीक्षा होने वाली है। पहले चरण के चुनाव में अयोध्या-फैजाबाद नगर निगम में भी वोट डाले जाएंगे। कई दशकों से राष्ट्रीय राजनीति की धुरी बनी अयोध्या के मतदाता नगर निकाय चुनाव के बहाने एक और संदेश देश और दुनिया को देने जा रहे हैं। पिछले सात महीने के कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से अयोध्या को फोकस किया है उससे नगर निगम के रूप में पहली बार हो रहे अयोध्या के इस चुनाव में योगी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
नगर निकायों के पहले चरण के मतदान के लिए सोमवार को चुनाव प्रचार थम गया। पहले चरण का मतदान 22 नवंबर को होना है। पहले चरण में जिन पांच नगर निगमों में चुनाव होना है उनमें धर्म नगरी अयोध्या भी शामिल है। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने मई 2017 में अयोध्या को नगर निगम का दर्जा दिया था। लिहाजा अयोध्या नगर निगम में पहली बार चुनाव हो रहा है। यहां भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा रखी है। सीएम योगी ने अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत 14 नवंबर को अयोध्या से की थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी पांच बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। अयोध्या नगर निगम भाजपा के लिए बेहद खास है क्योंकि यहां भाजपा के खिलाफ परिणाम आया तो इसका संदेश दूर तलक जाएगा। इसलिए अयोध्या को किसी भी कीमत पर भाजपा हाथ से नहीं जाने देना चाहती है।
अयोध्या-फैजाबाद के बेहद दिलचस्प चुनाव में सभी दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। भाजपा समेत कांग्रेस और बसपा जहां इस इलाके का विकास न होने का मुद्दा उठा रहे हैं वहीं सपा का कहना है कि नगर पालिका के रूप में यहां के चेयरमैन भाजपा के थे और उन्होंने कोई विकास नहीं किया। बसपा के नेता भाजपा पर अयोध्या के नाम पर धार्मिक भावनाएं भडक़ाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप लगाते हैं। भाजपा के नेता खासतौर पर मुख्यमंत्री योगी कहते हैं कि अयोध्या के साथ पिछली सरकारों ने सौतेला व्यवहार किया है, इसलिए यह इलाका विकास में पिछड़ गया। उनका कहना है कि अयोध्या के गौरव को छिपाने की कोशिश की जाती रही। भाजपा सरकार अयोध्या का गौरव वापस दिलाने का हर संभव प्रयास करेगी। योगी यह भी कहते हैं कि सपा और बसपा को हमारा यहां आना अच्छा नहीं लगता है। योगी सरकार ने अयोध्या के विकास का रोडमैप तैयार किया है और 137 करोड़ की धनराशि से विकास कार्य शुरू भी कराए हैं। मुख्यमंत्री अपने अयोध्या दौरे और अयोध्या में दीवाली मनाने को लेकर सफाई देते हुए कहते हैं कि दीपावली का पर्व अयोध्या से जुड़ा है और यह नई पीढ़ी को बताना होगा लेकिन विपक्षी दल सीएम के इन तर्कों को खारिज करते हुए इसे योगी आदित्यनाथ का हिंदुत्व का एजेंडा करार देते हैं। बहरहाल 1.91 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर लड़ाई दिलचस्प है। सबसे खास यह है कि विपक्ष के पास यहां खोने को कुछ नहीं है लेकिन अयोध्या का परिणाम यदि भाजपा के खिलाफ गया तो कई तरह से राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे और उसे लेकर राज्यों के चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा के हिंदुत्व कार्ड के खिलाफ विपक्ष बड़ा मुद्दा बनाएगा।

पुरानी सीटों पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए चुनौती
पहले चरण में 22 नवंबर को 24 जिलों की जिन पांच नगर निगम, 71 नगर पालिकाओं और 154 नगर पंचायतों में चुनाव होने जा रहा है, उनमें नगर निगमों में अयोध्या के अलावा गोरखपुर, कानपुर, आगरा, मेरठ शामिल हैं। इन सभी पर पिछले चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। लिहाजा भाजपा के सामने इन सभी पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। हालांकि भाजपा ने जीत के लिए अपनी ताकत झोंक रखी है। सभी नगर निगम में वरिष्ठ मंत्री या फिर पार्टी पदाधिकारी को प्रभारी बनाया है। मुख्यमंत्री समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने सभाएं की हैं।

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