कुपोषण की समस्या, योजनाएं और सरकार की चिंता

सवाल यह है कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए चल रही तमाम योजनाओं के बाद भी यूपी की स्थिति में सुधार क्यों नहीं आया? कुपोषण के कारण प्रतिवर्ष बच्चों की मौतों की संख्या में कमी क्यों नहीं आ रही है? क्या भ्रष्टïाचार का शिकार हो चुकी योजनाएं इसकी बड़ी वजह है?

प्रदेश सरकार शून्य से तीन वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए एक और पहल करने जा रही है। शबरी संकल्प योजना के तहत चिहिंत 39 जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। साथ ही इस तरह के मामलों की सुनवाई ई-शबरी पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। सवाल यह है कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए चल रही तमाम योजनाओं के बाद भी यूपी की स्थिति में सुधार क्यों नहीं आया? कुपोषण के कारण प्रतिवर्ष बच्चों की मौतों की संख्या में कमी क्यों नहीं आ रही है? क्या भ्रष्टïाचार का शिकार हो चुकी योजनाएं इसकी बड़ी वजह है? क्या लचर स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता के बिना स्थितियों को सुधारा जा सकता है? क्या लगातार बढ़ रही महंगाई अधिकांश बच्चों की थाली से पोषक तत्वों को दूर नहीं कर रही है? दरअसल, उत्तर प्रदेश में कुपोषण की समस्या भयावह रूप लेती जा रही है। यहां शून्य से पांच वर्ष तक के तीन लाख अस्सी हजार बच्चे प्रतिवर्ष कुपोषण के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण के मुताबिक कुपोषण के कारण प्रदेश के 46 फीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार हो रहे हैं। इनका कद उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रहा है। कुपोषण के चलते बच्चे कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने के कारण बीमारियों की चपेट में आकर कई बच्चों की मौत हो जाती है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के ताजा शोध के मुताबिक हर पांचवीं मौत में एक मौत के लिए खानपान की गुणवत्ता और उसमें पोषक तत्वों की कमी के कारण होती है। हकीकत यह है कि कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए चल रही तमाम योजनाएं भ्रष्टïाचार का शिकार हो चुकी हैं। जरूरतमंदों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजा कुपोषित बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रही सही कसर बढ़ती महंगाई और जागरूकता का अभाव पूरी कर दे रहा है। महंगाई के कारण गरीब अभिभावक अपने बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर आहार उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इसके अलावा जागरूकता का अभाव भी समस्या को बढ़ा रही है। जाहिर है केवल योजनाओं की घोषणा कर देने मात्र से कुपोषण को खत्म नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सरकार को योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर जोर देना होगा। साथ ही इस योजनाओं पर सतत निगरानी रखनी होगी। सरकार को व्यापक पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना होगा।

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