मूडीज की रेङ्क्षटग व भारतीय अर्थव्यवस्था की राह

अहम सवाल यह है कि क्या वाकई मूडीज की इस रेटिंग का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा? क्या देश में विदेशी निवेश में भारी इजाफा होगा? क्या लघु उद्योगधंधों और छोटे कारोबारियों के अच्छे दिन आएंगे? क्या आम जनता को महंगाई और युवकों को बेरोजगारी की मार से छुटकारा मिल सकेगा?

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ा दी है। भारत की रेटिंग बीएए2 हो गई है। एजेंसी ने इसकी वजह आर्थिक सुधारों को बताया है। एजेंसी की ताजा रेटिंग ने एक तरह से नोटबंदी और जीएसटी के फैसले पर मुहर लगा दी है। मोदी सरकार गदगद है और ताजा रेटिंग के जरिए नोटबंदी और जीएसटी का विरोध करने वालों को करारा जवाब देने की तैयारी कर रही है। एजेंसी ने जीडीपी में इजाफा होने की भी बात कही है। अहम सवाल यह है कि क्या वाकई मूडीज की इस रेटिंग का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा? क्या देश में विदेशी निवेश में भारी इजाफा होगा? क्या लघु उद्योगधंधों और छोटे कारोबारियों के अच्छे दिन आएंगे? क्या आम जनता को महंगाई और युवकों को बेरोजगारी की मार से छुटकारा मिल सकेगा? निकट भविष्य में क्या भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत होगी? दरअसल, विदेशी निवेशक निवेश से पहले संबंधित देश की सॉवरेन रेटिंग देखते हैं, इस लिहाज से मूडीज की रेटिंग फायदेमंद साबित होगी। इससे भारत में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ेगी और वे यहां भारी निवेश कर सकती हैं। इसके अलावा जीएसटी ने देश को एक बाजार में तब्दील कर दिया है। इसका फायदा विदेशी निवेशको को मिलेगा क्योंकि अब उन्हें हर राज्य में अलग-अलग टैक्स नहीं देना होगा। विदेशी निवेश से यहां रोजगार के साधन बढ़ेंगे। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे नोटबंदी से बाजार में आई मंदी कम होगी। हालांकि इसका असर महंगाई पर कितना पड़ेगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। बावजूद इसके सरकार के सामने कम चुनौतियां नहीं है। जीएसटी के कारण सरकार के टैक्स में आने वाली कमी राजकोष के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। राजकोषीय घाटे को कम करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य नहीं पूरा हुआ तो यह अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक साबित होगा। इसके अलावा लघु उद्योग और छोटे कारोबारियों पर नकारात्मक असर पडऩे की आशंका है। बड़ी विदेशी कंपनियों के कारण लघु उद्यमियों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो सकता है। इससे जीडीपी ग्रोथ कम हो सकती है। अगर सरकार ने इसका कोई समाधान नहीं किया तो विदेशी कंपनियों के निवेश से होने वाला लाभ और लघु उद्योगों से होने वाली हानि में संतुलन साधना मुश्किल हो जाएगा। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। बावजूद बकौल मूडीज आने वाले दिनों में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी। उम्मीद है सरकार इस पर खरी उतरेगी।

Pin It