अपराधों का बढ़ता ग्राफ और पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि तमाम दावों के बावजूद पुलिस अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है? क्या पुलिस विभाग में जड़ जमा चुका  भ्रष्टाचार  इसकी असली वजह है? राज्य का खुफिया तंत्र आखिर क्या कर रहा है? क्या पुलिस खुद को केवल वाहन चोरों और उठाईगीरों को पकडऩे तक सीमित कर चुकी है?

उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रेटर नोएडा में बदमाशों ने तीन लोगों की हत्या कर दी जबकि इलाहाबाद में आबकारी विभाग के एक इंस्पेक्टर और सिपाही पर जानलेवा हमला किया गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है। सवाल यह है कि तमाम दावों के बावजूद पुलिस अपराधों पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है? क्या पुलिस विभाग में जड़ जमा चुका भ्रष्टाचार इसकी असली वजह है? राज्य का खुफिया तंत्र आखिर क्या कर रहा है? क्या पुलिस खुद को केवल वाहन चोरों और उठाईगीरों को पकडऩे तक सीमित कर चुकी है? पुलिस को अपराधियों का सुराग तक क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस पूरी तरह फेल हो चुकी है? उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। सीएम योगी के तमाम आदेशों के बावजूद हालात में सुधार होता नहीं दिख रहा है। रोजाना हत्या, बलात्कार और लूट की घटनाएं घट रही हैं। महिला अपराधों में इजाफा हो रहा है। हाल यह है कि महिलाएं देर शाम घर से बाहर और अकेले बाजार जाने से डर रही हैं। राजधानी की हाईटेक पुलिस की भी हालत अपराधियों के आगे पस्त दिख रही है। तमाम वारदातें खुलासे का इंतजार कर रही हैं और पुलिस जांच का झुनझुना बजा रही है। कई बार अपराधी पुलिस की मिलीभगत से अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस महकमे में गले तक भ्रष्टाचार है। इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। पुलिस की लचर कार्यप्रणाली अपराधियों के हौसले बुलंद किए हुए है। खुफिया तंत्र पूरी तरह पंगु हो चुका है। यही वजह है कि अपराधियों का सुराग तक पुलिस नहीं लगा पा रही है। यही नहीं अपने क्षेत्र में अपराधों को कम दिखाने के लिए थानों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही है। पुलिस तभी सक्रिय होती है जब कोई हाई प्रोफाइल केस होता है। इसके बाद वह हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाती है। बलात्कार के कई मामलों में थानेदार पीडि़त को थाने से भगा देते हैं। यही नहीं कई बार वे पीडि़त पर आरोपी से समझौता तक करने का दबाव बनाते हैं। यदि सरकार अपराधों पर कंट्रोल करना चाहती है तो उसे पुलिस की कार्यप्रणाली को बदलना होगा। यहां फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना पड़ेगा। इसके अलावा केस का खुलासा नहीं करने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी करना होगा अन्यथा अपराध को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

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