राजधानी पुलिस के सिर चढक़र बोल रहा खाकी का रौब, प्रताडऩा को बनाया हथियार

खाकी के खौफ से एक युवक ने की आत्महत्या तो दूसरे की पिटाई से गई जान
फर्जी मुकदमे में फंसाने और लॉकअप में थर्ड डिग्री देने से नहीं आ रहे बाज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । माल थाना क्षेत्र में पुलिस की पिटाई से बुरी तरह जख्मी लतीफपुर गांव निवासी बलराम की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस पर जुआ खेलने का आरोप था। वहीं ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के गऊघाट निवासी डाला चालक अजय पर पुलिस का खौफ कुछ तरह हुआ कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसी तरह दो वर्ष पहले पुलिस ने चोरी के आरोप में एक युवक को इतना पीटा की लॉकअप के अन्दर ही उसकी मौत हो गयी। ये चंद उदाहरण राजधानी पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खोलने के लिए काफी है। तमाम नसीहतों के बावजूद पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई सुधार होता नहीं दिखाई पड़ रहा है।
राजधानी में खाकी का रौब पुलिसकर्मियों के सिर चढक़र बोल रहा है। अपराधियों के आगे पस्त दिख रही पुलिस आरोपियों को थर्ड डिग्री देने में माहिर है। झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देना और प्रताडि़त करना उसकी कार्यशैली में शामिल हो गया है। ऐसा नहीं है कि सभी वर्दी वाले ऐसे है लेकिन ऐसे कुछ पुलिसकर्मियों के कारण विभाग पर बदनामी का दाग लग रहा है। पिछले दिनों ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में इसका प्रमाण देखने को मिला। यहां कैसे वर्दी के रौब में पुलिसकर्मियों ने एक डाला चालक को आत्महत्या जैसा कदम को उठाने पर मजबूर कर दिया। ऐसा ही एक मामला माल थाना क्षेत्र में भी प्रकाश में आया। यहां जुआ खेलने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को पकड़ा और उसे इतना पीटा कि वह बुरी तरह घायल हो गया। फजीहत होते देख वर्दी वालों ने उसे छोड़ दिया। परिवारवालों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि इस घटना पर आलाधिकारी लीपापोती कर रहे हैं। वे युवक को नशे का आदी बता रहे है। ऐसा नहीं है कि राजधानी में पुलिस प्रताडऩा का यह पहला मामला है। इससे पहले भी यहां पर कुछ पुलिसकर्मियों पर प्रताडऩा का आरोप लग चुका है। दो वर्ष पहले हसनगंज थाना क्षेत्र में भी ऐसा ही हुआ था। जहां पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को पूछताछ के लिये थाने पर बुलाया और उसे इतना पीटा कि लॉकअप के अन्दर ही उसकी मौत हो गयी थी। लॉकअप में आरोपी की मौत की खबर से आक्रोशित मृतक के परिजनों ने थाने पर जमकर बवाल किया था बाद में परिजनों ने तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज कराया था। इस घटना की जांच के आदेश हुये थे और जांच भी हुयी मगर मामला शांत हो गया।
राजधानी का चर्चित श्रवण साहू हत्याकांड भी पुलिसकर्मियों के प्रताडऩा का परिणाम था। बुजुर्ग श्रवण साहू का दोष मात्र इतना था कि वह अपने बेटे आयुष की हत्या करने वाले बदमाशों को सजा दिलवाना चाहते थे। इससे हत्या में शामिल मास्टरमाइंड ने अपने परिचित एक दरोगा और सिपाही को श्रवण साहू को प्रताडि़त करने का काम सौंपा। दोनों वर्दी वालों ने हत्यारोपी से पूरी दोस्ती निभाई और एक साजिश के तहत श्रवण को 20 लाख रुपये की हत्या की सुपारी देने का आरोप लगाकर गिरफ्तार करने की साजिश रची थी। पुलिस प्रताडऩा से त्रस्त श्रवण साहू ने पूरा मामला तत्कालीन एसएसपी को बताया लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने आरोपी दो पुलिसकर्मियों दरोगा धीरेन्द्र शुक्ला और सिपाही अनिल सिंह को बर्खास्त कर दिया था। बाद मेंं इस घटना की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गयी।

ठाकुरगंज में पुलिस प्रताडऩा का जो आरोप लगाया गया है उस मामले की जांच एसपी पश्चिम को दी गयी है और जांच के बाद जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी जबकि माल प्रकरण में युवक शराब पीने का आदी था और ज्यादा शराब पीने से उसकी हालत खराब हो गयी थी और अस्पताल में उसकी मौत हो गयी।
-दीपक कुमार
एसएसपी

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये पुलिस को संवेदनशील होना चाहिये। यदि ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिये।
श्रीराम अरुन
पूर्व डीजीपी, यूपी

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