खुशियों के त्यौहार दीपावली में पटाखों की आवाज और धुआं पड़ सकता है महंगा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। देश भर में धूमधाम से दीपावली मनाई जा रही है। इस त्यौहार में लोग पटाखों को छोडक़र अपनी खुशियों का इजहार करते हैं लेकिन चिकित्सकों का मानना है कि पटाखों का शोर और इसकी तेज रोशनी अपंग भी बना सकती है। इसके साथ ही पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं श्वास और दिल के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। पटाखों के धुएं से सबसे अधिक प्रभावित फेफड़े और हृदय होते हैं। इसके अलावा पटाखों से होने वाला प्रदूषण भी हवा को जहरीली बना देता है। इसका असर बच्चों व बुजुर्गों की सेहत पर अधिक पड़ता है। लिहाजा सावधानी बरतें।

इन बातों का रखें खयाल
पटाखे दूर से जलाएं ।
खुले में पटाखे जलाएं।
कॉटन के ढीले कपड़े पहनें।
पानी और बालू की बाल्टी रखें।
बच्चों को आग व पटाखों से दूर रखें।
हल्के व रोशनी वाले पटाखे ही जलाएं।
घर के बाहर पटाखे जलाएं।
लंबे डंडे में मोमबत्ती बांधकर पटाखे जलाएं।
इससे बचें तेज आवाज के पटाखों के प्रयोग से बचना चाहिए।
पटाखे जलाते समय पूरी सतर्कता बरतें।
सिल्क और सिंथेटिक कपड़े पहन कर पटाखे न जलाएं।
दीया ऐसे स्थान पर न रखें जहां आग लगने का अंदेशा हो।]

उपाय
कंबल से आग बुझाने की कोशिश न करें ठ्ठ छालों को न फोड़े ठ्ठ घाव को ठंडे पानी से धोएं ठ्ठ घाव पर बर्फ लगाएं ठ्ठ घाव गहरें हों तो अस्पताल जाएं ठ्ठ आंख में चोट लगने पर साफ पानी से आंख धोएं ठ्ठ जले हिस्से पर तेल, नमक, मंजन, राख और मिट्टी लगाना नुकसादेह है।

अलर्ट पर राजधानी के अस्पताल
दीपावली को लेकर अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। इमरजेंसी में दवाओं की उपलब्धता व बेडों को आरक्षित करने का निर्देश दिया गया है। हर वर्ष दीपावली में सैकड़ों लोग बर्न व घायल होकर अस्पतालों में पहुंचते हैं। गत वर्ष के मामलों को देखते हुए इलाज के पुख्ता बंदोबस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल के निदेशक व अधीक्षकों ने इमरजेंसी में दवाएं व बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। ट्रॉमा सेंटर में सभी सर्जन व चिकित्सक मौजूद रहेंगे। वहीं बलरामपुर अस्पताल व सिविल में प्लास्टिक सर्जरी व आर्थोसर्जरी में अतिरिक्त डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। लोहिया में प्लास्टिक सर्जन न होने से जनरल सर्जन व आर्थोसर्जन व फिजीशियन की ड्यूटी लगाई गई है।

तेज आवाज से हृदय रोगी का हो सकता है हार्ट फेल
लोहिया इंस्टीट्यूट के डॉक्टर भुवन तिवारी ने बताया कि ज्यादा शोर वाले पटाखे दिल के मरीज के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इससे मरीज को घबराहट की शिकायत हो सकती है। इसके साथ सांस फूलने पर दिल के मरीज का हार्ट फेल हो सकता है या दिमाग की नस फट सकती है। दिल के पचास फीसदी मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे में सांस फूलने में मरीज का दिल काम करना बन्द कर सकता है।

पटाखे हमेशा के लिए बना सकते हैं बहरा
केजीएमयू के डॉक्टर एसपी अग्रवाल ने बताया कि हर साल तेज आवाज के पटाखे छुड़ाने के बाद कान दर्द, बहरापन और कान से खून निकलने के बीस से 25 मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। ये ब्लास्ट इंजरी के शिकार होते है। तेज आवाज से कान का पर्दा फट जाता है। ऐसे मरीजो में हमेशा के लिए बहरापन हो जाता है।

काला चश्मा लगाकर छुड़ाए पटाखे
केजीएमयू ओपथोमोलॉजी विभाग के डॉक्टर अरून कुमार का कहना है कि हर साल बीस पच्चीस मरीज पटाखों की चिंगारी से आंखों के घायल होने के कारण यहां इलाज को पहुंचते हैं। आखों में चिंगारी चली जाने से आंखों की रोशनी जा सकती है। पटाखे छुड़ाते वक्त चश्मा लगाएं। आंखों में चिंगारी जाने पर तुरंत ठंडे पानी से धोए और डॉक्टर को दिखाएं।

फेफड़ों को नुकसान
केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर सूर्यकान्त का कहना है कि प्रदेश में पचास लाख लोग अस्थमा के मरीज हैं। अतिशबाजी का धुएं में महीन कण होते हैं, जो आसानी से फेफड़ो में पहुच जाते हैं। ये कण श्वास नली को प्रभावित करते हैं। इससे दमा का दौरा पड़ जाता है।

हाथ से पटाखे छुड़ाना खतरनाक
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर विजय कुमार का कहना है कि दीपावली के मौके पर हर साल दो सौ मरीज अतिशबाजी और पटाखों से घायल होकर यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। ज्यादातर ऐसे मरीज आते है जिनका हाथ पूरी तरह जल चुका होता है और उंगलियां उड़ चुकी होती है। ऐसे में लोगों को पटाखों को सीधे हाथ के जरिए नहीं छुड़ाना चाहिए। इससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। वैसे लोगों को दीपावली पर पटाखे नहीं छुड़ाने चाहिए। इससे खतरनाक प्रदूषण पैदा होता है। दीपावली दीपों का त्यौहार है पटाखो का नहीं।

 

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