जागरूकता अभियान कम करेगा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

केजीएमयू की टीम महिलाओं और छात्राओं को कर रही जागरूक
ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी इलाके की महिलाएं अधिक पीडि़त
हर दो में से एक महिला की हो रही है बे्रस्ट कैंसर से मौत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। पूरे देश में बे्रस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। महिलाओं में जागरूकता की कमी के कारण रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक बेस्ट कैंसर से पीडि़त दो में से एक महिला की मौत हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी इलाके की महिलाएं इस रोग की चपेट में ज्यादा आ रही है। चिकित्सकों के मुताबिक जागरूकता की कमी के कारण समय पर रोग की पहचान नहीं हो पाती है। इससे रोग खतरनाक हो जाता है। वहीं प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू ने ब्रेस्ट कैंसर पर लगाम लगाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान शुरू किया है।
केजीएमयू के पैरामेडिकल विभाग ने राजधानी में ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत कॉलेज की छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है। अभियान में छात्राओं को स्वयं ब्रेस्ट परीक्षण के बारे में प्रशिक्षित भी किया जा रहा है, ताकि समय रहते खतरे का अनुमान लगाया जा सके। इस अभियान का नेतृत्व डीन पैरामेडिकल प्रो.विनोद जैन कर रहे हैं। प्रोफेसर जैन ने बताया कि अक्टूबर माह ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के नाम से भी जाना जाता है। अभियान का मुख्य उद्देश्य इस गंभीर बीमारी से महिलाओं को जागरूक करना है। ग्रामीण महिलाओं के मुकाबले शहरी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा बढ़ रहे है। चिकित्सकों के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह शहरों की जीवनशैली में आया बदलाव भी है। हालांकि जागरूकता के अभाव के कारण समय से पहले रोग की पहचान नहीं हो पाती है, लिहाजा स्थितियां विकट हो जाती है। रोग के जटिल हो जाने पर इलाज करना काफी कठिन हो जाता है। रोग के अंतिम स्टेज पर पहुंच जाने पर मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। मुख्य रूप से कैंसर की 4 स्टेज होती है। पहली और दूसरी स्टेज में रोग की पहचान और उपचार की शुरूआत हो जाने पर रोगी को कैंसर मुक्त करना संभव होता है। वहीं तीसरे या लास्ट स्टेज में उपचार की शुरूआत से रोगी की मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। जागरूकता की कमी के कारण देश में अधिकांश रोगियों में रोग की पहचान तीसरी या अंतिम अवस्था में होती है। जागरूकता से काफी हद तक लोगों को शुरूआती दौर में इलाज मिल सकता है। इससे रोगी को काफी लंबे समय तक बचाया जा सकता है। आंकड़ों पर गौर करे तो ब्रेस्ट कैंसर काफी तेजी से अपने पांव पसार रहा है। डॉ.गीतिका के मुताबिक भारत में हर 22 में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही है। वहीं हर दो में एक महिला की जान ब्रेस्ट कैंसर से हो रही है। वहीं विदेशों में चार या आठ महिला में एक मौत ब्रेस्ट कैंसर से हो रही है। उनका कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण है कि महिलाएं ब्रेस्ट परीक्षण नहीं करती हैं और नॉन साइंटिफिक तरीके से इलाज करवाती हैं।

पैरामेडिकल स्टाफ भी होंगे प्रशिक्षित
प्रो.जैन ने बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ को ब्रेस्ट परीक्षण में प्रशिक्षित किया जाएगा।
ये प्रशिक्षित स्टाफ भी कॉलेजों में जाकर छात्राओं को बेस्ट कैंसर से जागरूक करेंगे।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
बढ़ती उम्र, मोटापा, रजोस्त्राव का उम्र के साथ जल्दी आना और देर तक रहना, पहला बच्चा 30 की उम्र के बाद होना, स्तनपान कम या नहीं करवाना और अनुवांशिकता ब्रेस्ट कैंसर की आशंका को बढ़ाता है। इसके साथ ही पिल्स या हार्मोंस रिप्लेसमेंट थेरपी का लंबे समय तक प्रयोग भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं। सही उम्र में वैवाहिक जीवन की शुरुआत करें। शराब से दूरी बनाकर रखें।

हर माह करते रहें स्वयं परीक्षण

डॉ. गीतिका ने बताया कि 40 वर्ष के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी अवश्य करवानी चाहिए। इसके अलावा चिकित्सक से क्लीनिकल ब्रेस्ट एक्जामिनेशन भी करवाना चाहिए। 20 वर्ष की आयु के बाद माह में एक बार ब्रेस्ट का स्वयं परीक्षण करते रहना चाहिए। अगर किसी भी तरह की गांठ, दर्द या स्राव हो तो तुरंत स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

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