स्कूली वाहन, असुरक्षित बच्चे और प्रबंधतंत्र

सवाल यह है कि क्या वैन या अन्य वाहनों से रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चों का जीवन सुरक्षित है? क्या निजी स्कूलों का प्रबंधतंत्र बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है? क्या इन स्कूली वाहनों में तैनात ड्राइवर प्रशिक्षित हैं? क्या बच्चों को वाहनों में ठूंस-ठूंस कर भरने पर प्रबंधतंत्र संबंधित चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है?

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बच्चों से भरी एक तेज रफ्तार वैन अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में डेढ़ दर्जन बच्चे घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है। सवाल यह है कि क्या वैन या अन्य वाहनों से रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चों का जीवन सुरक्षित है? क्या निजी स्कूलों का प्रबंधतंत्र बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है? क्या इन स्कूली वाहनों में तैनात ड्राइवर प्रशिक्षित हैं? क्या बच्चों को वाहनों में ठूंस-ठूंस कर भरने पर प्रबंधतंत्र संबंधित चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है? क्या स्कूल तक जाने के लिए वाहन की सुविधा देने और इसके एवज में मोटी फीस वसूलने वाले इन निजी स्कूल संचालकों पर लगाम कसने की जरूरत नहीं है? दरअसल, राजधानी में हुआ यह हादसा एक बानगी भर है। हकीकत यह है कि प्रदेश के हजारों स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की जान जोखिम में हैं। निजी स्कूलों के संचालक, अभिभावकों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। स्कूल तक बच्चों को पहुंचाने के लिए वैन या अन्य वाहनों का संचालन भी प्रबंधतंत्र करता है। अधिकांश चालकों को बिना वेरीफिकेशन रखा जाता है। यही नहीं इन ड्राइवरों का न तो ड्राइविंग लाइसेंस चेक किया जाता है न ही उसके वाहन चालन की कुशलता को परखा जाता है। ये चालक सीटों की सीमा से बाहर बच्चों को वाहन में भरते हैं। ये चालक बेतरतीब वाहन चलाने से भी परहेज नहीं करते हैं। ये न केवल तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं बल्कि खतरनाक तरीके से दूसरे वाहनों को ओवरटेक भी करते हैं। इसके कारण स्कूली वाहन अक्सर हादसों के शिकार हो जाते हैं। यह स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। दूसरी ओर प्रबंधतंत्र चालकों की इस लापरवाही को जानते हुए भी कार्रवाई करने से कतराते हैं। इसका परिणाम खतरनाक साबित हो रहा है। ताजा हादसा भी चालक द्वारा ओवरटेक करने का परिणाम माना जा रहा है। यही नहीं प्रतिबंध के बावजूद चालक मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाते हैं। इस तरह से वाहन चलाना दुर्घटना को दावत देना है। सरकार को चाहिए कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले ऐसे चालकों के साथ संबंधित स्कूल संचालकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करे। ऐसा नहीं करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस निरस्त करे। इसके अलावा संबंधित स्कूल की मान्यता भी खत्म करनी चाहिए।

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