करोड़ों के घोटाले में नप गए छोटे अफसर और एक बार फिर बच गए घोटाले के सूत्रधार प्रमुख सचिव चंचल तिवारी

चौदहवें वित्त आयोग के हजारों करोड़ में हेराफेरी करने के लिए पहले भी चंचल तिवारी ने पांच करोड़ लेकर जारी कर दिया था गलत शासनादेश

4पीएम ने किया था गलत शासनादेश का पर्दाफाश, इस शासनादेश के कारण यूपी के सभी विकास खंडों में पड़ गए थे ताले
हंगामे के बाद रद्द हो गया था शासनादेश, मगर कुछ नहीं हुआ चंचल का
यूपीएसआईडीसी घोटाले में भी सीबीआई ने मांगी चंचल के खिलाफ जांच की अनुमति
योगी सरकार में भी चंचल ने कर ली जुगाड़, दे दिया फिर एक घोटाले को अंजाम

संजय शर्मा
लखनऊ। चौदहवें वेतन आयोग में 107 करोड़ के घोटाले में भले ही 12 लोगों को निलंबित कर दिया गया हो मगर इस घोटाले के सूत्रधार प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी इस बार भी अपने काले कारनामें छिपाने में कामयाब हो गए हैं और उनका बाल भी बांका न हो सका।
पिछली सरकार में इसी वित्त आयोग के पैसों में भारी गोलमाल करने के लिए चंचल तिवारी ने पांच करोड़ रुपए लेकर एक विवादित शासनादेश जारी कर दिया था जिसका सबसे पहले खुलासा 4पीएम ने किया था। इस खुलासे के बाद हडक़ंप मच गया था और चीफ सेक्रेटरी ने यह शासनादेश रद्द कर दिया था। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रमुख सचिव के नाक के नीचे यह घोटाला होता रहा और जब सीएम योगी तक यह शिकायत पहुंची तो अपनी गर्दन बचाने के लिए कुछ छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही कर दी गई मगर चंचल तिवारी को बचा लिया गया।
जब सीएम योगी तक यह शिकायत पहुंची कि अपात्र ग्राम पंचायतों से कमीशन लेकर करोड़ों की धनराशि दे दी गयी तो उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। इस जांच में घोटाले की परत दर परत खुलती चली गई। पंचायत विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले की रूपरेखा खुद प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने तैयार की थी। अपात्र ग्राम पंचायतों को धन देने के लिए उनसे दस प्रतिशत धनराशि ली गई थी।
इस योजना के मुताबिक जिला स्तर से जिला पंचायत राज अधिकारियों ने जो रिपोर्ट भेजी, मुख्यालय पर तैनात चंचल तिवारी के सबसे भरोसेमंद लिपिक ने उन रिपोर्ट के कुछ पेज चेंज कर दिए। नई डुप्लीकेट रिपोर्ट पर पैसा रिलीज हो गया। मजे की बात तो यह है कि इन पैसों में से 305 करोड़ जारी करने वाले पूर्व निदेशक पंचायती राज के खिलाफ तो जांच का आदेश हो गया, मगर उनके बाद आये निदेशक ने 394 करोड़ रुपए जारी कर दिए, तो उनके खिलाफ किसी जांच के आदेश नहीं हुए । मजे की बात यह रही कि फाइलों में हेराफेरी करने वाले लिपिक के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दरअसल चौदहवें वेतन वित्त आयोग का जब हजारों करोड़ रुपया यूपी में आया तभी से चंचल तिवारी ने इसमें हेराफेरी करने की योजना बनानी शुरु कर दी थी। चंचल तिवारी के गुर्गों ने पांच करोड़ रुपए जुटाकर उनको दिए और कहा कि वह एक शासनादेश जारी कर दें, जिसमें विकास खंड स्तर पर चेक काटने का अधिकार सिर्फ एडीओ पंचायत का हो। मतलब खंड विकास अधिकारी के इस चेक पर हस्ताक्षर न हो और एडीओ पंचायत का दफ्तर ब्लाक में अलग हो। यहीं नहीं जिला पंचायत अधिकारी की वार्षिक प्रविष्टिï लिखने का अधिकार भी सीडीओ और जिलाधिकारी को न हो। कोई आईएएस अफसर ऐसा करने की सपने में भी नहीं सोच सकता, मगर पांच करोड़ ने चंचल तिवारी की आंखों पर पट्टïी बांध दी थी, लिहाजा चंचल तिवारी ने यह शासनादेश जारी कर दिया। इन पांच करोड़ की वसूली पूरे प्रदेश भर से की गयी। इस शासनादेश के जारी होते ही सूबे भर में हडक़ंप मच गया। यूपी के इतिहास में पहली बार प्रदेश भर के विकास खंडों में ताले पड़ गए। इसके बाद जांच करके इस विवादित शासनादेश को रद्द कर दिया गया। तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने तो सबके सामने चंचल तिवारी को फटकराते हुए कहा था किसी आईएएस अफसर से इस तरह की उम्मीद नहीं की जाती, मगर तब भी चंचल तिवारी के खिलाफ कोई कार्यवाहीं नहीं हुई। इसी का नतीजा है कि उन्होंने एक बार फिर इस घोटाले को अंजाम दे दिया।

अभी प्राथमिक जांच हुई है। इसमें जितने लोग भी दोषी पाए गए हैं उन पर कार्यवाही की गई है। विस्तृत जांच जारी है, जो भी इस जांच के दायरे में आएगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कोई भी हो।
-भूपेंद्र सिंह चौधरी, पंचायती राज मंत्री

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