कर्मियों को नहीं मिल रहा पीएफ का पैसा करोड़ों रुपए दबाए बैठीं कार्यदायी संस्थाएं

नगर आयुक्त तक पहुंचा मामला, 3600 कर्मचारी हो रहे प्रभावित
कर्मचारी संघ ने ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम में कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से तैनात कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था इस कदर चौपट है कि कार्यदायी संस्थाओं में कार्यरत 3600 से अधिक कर्मियों के पीएफ का पैसा अभी तक नहीं मिल सका है। पीएफ का पैसा दबाने की शिकायत अब नगर निगम के अफसरों तक पहुंचने लगी है, लेकिन अफसर मामले को दबाते नजर आ रहे हैं।
इस मामले में नगर आयुक्त उदयराज सिंह को विभाग में सूचीबद्ध कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ शिकायत मिली है। आरोप है कि अफसरों की साठ-गांठ से निगम में काम करने वाली 50 से अधिक कार्यदायी संस्थाओं ने दो वर्षों में कर्मियों के 19 करोड़ रुपये दबा कर बैठीं हैं। वहीं नगर निगम कर्मचारी संघ ने सभी कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा पीएफ की रकम के साथ सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। नगर निगम के विभिन्न जोनों में कार्यदायी संस्थाओं के जरिए स्वास्थ्य विभाग, कचरा निस्तारण विभाग, बिजली विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में बाबू और परिचर के तौर पर 3600 कर्मचारी काम कर रहे हैं। नगर निगम में यह व्यवस्था पिछले 10 सालों से चल रही है, जिसके तहत जरूरत के हिसाब से निगम प्रशासन इन संस्थाओं से मानव संसाधन लेता है। कर्मचारियों को 7500 रुपये प्रतिमाह की मजदूरी भी दी जाती है। इसी में से पीएफ और ईएसआई के मदों में 2250 रुपये की कटौती की जाती है। नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा के मुताबिक कार्यदायी संस्थाओं के तहत काम कर रहे कर्मचारी का वेतन नगर निगम सीधे उसके खाते में नहीं दे रहा है। यहीं से गड़बड़ी का खेल चल रहा है जबकि पिछले वर्ष शासन ने आदेश जारी कर यह स्पष्ट किया था कि सभी कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके खाते में ही जाएगा। पिछले पांच वर्षों में किसी भी कार्यदायी संस्था ने एक भी कर्मचारी के पीएफ का पैसा तक जमा नहीं कराया। नगर निगम प्रशासन ने इसकी जानकारी मांगी लेकिन किसी भी संस्था ने ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है। इस मुद्दे पर निगम के अफसरों का कहना है कि एजेंसी को सभी मदों में धन भेज दिया गया है। यह एजेंसी का दायित्व है कि वह इस मसले में कार्रवाई करे। यदि कर्मचारियों को इन सुविधाओं का पैसा नहीं मिला है तो वह श्रम विभाग में कार्रवाई के लिए शिकायत करें।

 

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