असुरक्षित पटाखा व्यवसाय और हादसे

दरअसल पटाखे रखने और बनाने के लाइसेंस तो सरकार जारी कर देती है किंतु यह जानने की जरूरत नहीं समझी जाती कि पटाखे बनाने का काम करने वाले कितने प्रशिक्षित हैं? गलतियां और लापरवाही भयंकर हादसे का सबब बनती हैं। इस तरह के हादसे में पटाखे बनाने का काम करने वाले ही शिकार होते हैं।

दीपावली पर पटाखों की बिक्री सामान्य बात है। गंभीर बात यह है कि पटाखा बनाते समय विस्फोट की घटनाएं भी आम होती जा रही है। असुरक्षित पटाखा व्यवसाय जानलेवा साबित हो रहा है। खासतौर से इन दिनों विस्फोट और उसमें लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं। अलीगढ़ जनपद में हाल के दिनों में यह दूसरा विस्फोट है। हरदुआगंज के जलाली कस्बे में गुरुवार देर रात पटाखा बनाते समय विस्फोट हुआ और कई लोग घायल हो गए। विस्फोट से घर की छत गिर गई और उसमें बच्चों समेत कई लोग दब गए। जिस मकान में विस्फोट हुआ वह मोहम्मद आतिशबाज का घर है। इसी पते पर पटाखे बनाने का लाइसेंस भी है। इससे पहले अलीगढ़ के ही सारसौल चौराहे के पास विस्फोट हुआ था जिसमें कुछ लोगों की जान भी चली गई। शाहजहांपुर जिले के कांट कस्बे में बीच बाजार एक दुकान में बीड़ी की चिंगारी से आग लग गई। जहां बारूद रखी थी। लगभग आधा घंटे तक एक के बाद एक विस्फोट हुए। आसपास की दुकानें विस्फोटों में धराशाई हो गईं। आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान गईं। मरने वालों में सभी मजदूर तबके के लोग थे।
दरअसल पटाखे रखने और बनाने के लाइसेंस तो सरकार जारी कर देती है किंतु यह जानने की जरूरत नहीं समझी जाती कि पटाखे बनाने का काम करने वाले कितने प्रशिक्षित हैं? गलतियां और लापरवाही भयंकर हादसे का सबब बनती हैं। इस तरह के हादसे में पटाखे बनाने का काम करने वाले ही शिकार होते हैं। हादसों के बाद जांच और कार्रवाई का दौर शुरू होता है। लेकिन कुछ दिनों में सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर आ जाता है। पटाखों को रखने के गोदाम के लिए जो सुरक्षा के मानक होने चाहिए प्राय: नहीं दिखाई देते। लाइसेंस देने वाली एजेंसियां घूसखोरी के चलते मानकों को नजरअंदाज कर देती हैं।
दीपावली पर तमाम प्रतिबंधों के बावजूद भीड़भाड़ वाले इलाकों में पटाखे बिकते हुए देखे जा सकते हैं। जबकि पटाखों को बेचने के लिए प्रशासन एक निश्चित स्थान तय करता है, कहीं न कहीं यह प्रशासन तंत्र की लापरवाही से ही होता है। संवेदनशील मामलों में प्रशासन की संवेदनहीनता लोगों की जान पर बन जाती है। दिन व दिन असुरक्षित होते पटाखों के व्यवसाय के प्रति नियमों और कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए और वर्षों पुराने नियमों में आज की परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की भी जरूरत है ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

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