युवाओं में तेजी से फैल रही रुमेटोअर्थराइटिस और स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी, रहे सतर्क

बदलती जीवन शैली के कारण कम हो रही बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। बदलती जीवनशैली के कारण युवा तेजी से अर्थराइटिस के शिकार बन रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार 70 प्रतिशत लोग अर्थराइटिस के शिकार हो रहे हैं। वही 25 प्रतिशत लोगों को सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। पहले यह बीमारी उम्रदराज लोगों में पाई जाती थी लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण इस बीमारी ने युवाओं को तेजी से अपनी जकड़ में ले लिया है। इसलिए चिकित्सकों ने लोगों को अपनी जीवन शैली में बदलाव लाने की सलाह दी है।

केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनीत शर्मा ने बताया कि बच्चों में फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पौष्टिक तत्वों की कमी से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट जाती है। फास्टफूड, शरीर में होने वाली विटामिन व प्रोटीन की कमी से बच्चों में सेप्टिक अर्थराइटिस होने की संभावना को बढ़ा रहा है। यह समस्या 15 साल से कम उम्र के बच्चों में सबसे अधिक हो रही है। शरीर का रेजिस्टेंस पॉवर कम होने से उनके शरीर में इंफेक्शन होने लगता है। यह इंफेक्शन जब जोड़ों में पहुंचता है तो इनमें पस पड़ जाता है। पस पडऩे के बाद पहले तो जोड़ों का मूवमेंट कम होने लगता है। उसके बाद ज्वाइंट्स फ्यूज हो जाते हैं। शुरूआती दौर में यह आसानी से पता नहीं चल पाता। और जब पता चलता है तो देर हो चुकी होती है

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चिकित्सकों के मुताबिक अनियमित जीवन शैली के कारण बच्चों को जोड़ों में दर्द, उठने-बैठने में दिक्कत होने लगती है। मां-बाप इसे कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं या प्रोटीनयुक्त चीजें देने लगते हैं, लेकिन उस समय तक बच्चे में सेप्टिक अर्थराइटिस की समस्या व्यापक रूप ले चुकी होती है। अगर इसे काफी समय तक नजरअंदाज किया गया तो आगे आपका बच्चा उम्र भर के लिए अपंग भी हो सकता है। एक वक्त था जब अस्पताल की ओपीडी में 60 साल की उम्र के बाद के मरीज ऑस्टियो अर्थराइटिस की समस्या से पीडि़त होकर आते थे, लेकिन आजकल 40 से 45 की उम्र के मरीजों में रुमेटोअर्थराइटिस और स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या आ रही है।

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