इंजीनियर साहब का जलवा

एलडीए के एक अभियंता का जलवा उठान पर है। इंजीनियर साहब ने पांचों अंगुलियां घी में होने वाली कहावत को भी पीछे छोड़ दिया है। वो घी में अंगुली नहीं डालते, बल्कि घी में कूद कर स्वीमिंग करने पर भरोसा रखते हैं। इंजीनियर साहब के चेले बताते हैं कि साहब इन दिनों डबल रोल में जी रहे हैं। साहब दफ्तर में ईमानदार छवि वाले नायक की तरह नजर आते हैं, लेकिन घर पहुंचते ही ईमादारी का चोला छोड़ देते हैं। इसलिए आज-कल रोजाना साहब के आवास पर भक्त बिल्डर्स की लाइन लगती है। भक्त साहब को तमाम तरह का चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। इसलिए बिल्डर्स को मनमाफिक फल मिल रहा है। मतलब वैध-अवैध का सारा खेल घर में बैठकर धड़ल्ले से खेला जा रहा है।

अखबारों में कम जगह मिलने के कारण कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर मीडिया से काफी नाराज हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी एक प्रेसवार्ता के दौरान जाहिर की। अध्यक्ष ने कहा कि मैं चाहे जितना बोलूं आप लोग तो मुझे छापेंगे ही नहीं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया मालिकान को जमकर कोसा और कहा कि मीडिया संस्थानों के मालिक सरकार के हाथों की कठपुतली हैं। इसी वजह से हकीकत लिखने की कोशिश करने वालों की खबरें अखबारों में नहीं छपती हैं। ऐसे में यदि ज्वलंत मुद्दे उठाने वालों को अखबारों में जगह मिल जाये तो बड़ी बात होगी।

राजनीति में कब किसका समय खराब आ जाए नहीं कहा जा सकता। आजकल चचा बड़े असमंजस में हैं। जिन्हें राम जैसा भाई समझते थे वे अब पुत्र मोह में फंस चुके हैं और छोटे भाई का साथ लगभग छोड़ चुके हैं। ऐसे में चचा के सामने अब दो ही रास्ते हैं कि वे या तो भाई की राय मानकर भतीजे की शरण में चले जाएं या फिर अपना अलग रास्ता अखित्यार करें। दोनों रास्तों के बीच फंसे चचा की स्थिति इन दिनों पेंडुलम जैसी हो चुकी है। आत्मसमर्पण या बागी, इन दोनों में से एक रास्ता पकडऩा होगा। वेैसे चचा के ताल्लुकात कमल दल वालों से भी बने हुए हैं। चचा कब साइकिल छोडक़र तीर कमान के जरिये कमल को थाम लें, कुछ नहीं कहा जा सकता।

नींद से अनोखा प्रेम
सपा कार्यालय में एक चर्चित नेता जी ऐसे भी हैं जिन्हें नींद से अनोखा प्रेम है। काम चाहे कितना भी जरूरी क्यों न हो नेता जी बिना सोये रह नहीं पाते हैं। ये अलग बात है कि कार्यालय में सोने की जगह नहीं होती फिर भी नेता जी सोने का कोई न कोई जुगाड़ कर ही लेते हैं। आलम ये है कि जब नींद अधिक हावी होती है तो नेताजी मीडिया कार्यालय में बैठे लोगों को बाहर निकाल कर खुद आराम करने लगते हैं। इतना ही नहीं कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि नेताजी को सोते समय कोई भी डिस्टर्ब नहीं करेगा। कार्यालय में कोई नारेबाजी और हंगामा नहीं होगा। मतलब नेताजी को नींद में खलल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

बुरे फंसे हैं जनाब
तमाम मामलों में फंसे साइकिल वाले दल के एक नेता पिछले दिनों साइकिल वाला दल छोडक़र कमल वाले दल के साथ चले गए। गए तो यह सोचकर थे कि अब दूसरे मामलों में तो राहत मिलेगी ही साथ ही मकान ढहाने वाला महकमा भी उनके भवन को नहीं ढहायेगा। लेकिन महकमें के अफसर हैं कि मामले को दबा ही नहीं रहे। कमल वाले दल में घुसने के बावजूद अफसरों ने भवन ढहाने का नोटिस पकड़ा दिया है। अब जनाब कमल का झंडा उठाकर अफसरों पर रौब झाड़ रहे हैं। कह रहे हैं कि जिन्दगी की सारी कमाई दांव पर लगा दी फिर भी भवन ढहाने का कागज पकड़ा दिया। यह तो सरासर नाइंसाफी है भाई। जैसे-तैसे साइकिल वालों ने बड़ी पंचायत की सीट दी थी वह सीट भी कमल वालों के खाते में चली गई और कमल दल वाले हैं कि फिर भी उनकी मदद नहीं कर रहे हैं। जनाब इन दिनों खासे परेशान हैं और अफसरों के साथ अपने दल के नेताओं से भी जुगलबंदी कर रहे हैं कि कम से कम भवन ढहने की नौबत तो अब न आए।

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