योगी सरकार नदियों की सफाई को लेकर सख्त पूजन सामग्री विसर्जित करने पर लगायेगी रोक

प्रदेश के कुछ नगर निगमों में नदियों को गंदगी से मुक्त रखने की तैयारियां शुरू
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनिंदा जगहों पर गेरुआ रंग वाले पात्र रखने की भी योजना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नदियों में पूजन सामग्री फेंकने और मूर्ति विसर्जन को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने पूजन सामग्री विसर्जन योजना बनायी है। इस योजना के लागू होते ही प्रदेश में सबसे पहले गंगा और गोमती में पूजन सामग्री डालने और मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगा दी जायेगी। इस मामले में सरकार ने कवायद तेज कर दी है। वहीं प्रदेश के कुछ नगर निगमों में नदियों में डाली जाने वाली गंदगी पर रोक लगाने की तैयारियां तेजी से शुरू कर दी हैं। शहरी क्षेत्र में जगह-जगह डस्टबिन रखवाने और इनमें पूजन सामग्री एवं विसर्जन वाली मूर्ति रखवाने का प्रबंध किया जा रहा है। इसी तर्ज पर पंचायतों में भी पूजन सामग्री और विसर्जन की मूर्ति को नदी में डालने से रोकने की व्यवस्था की जायेगी।
प्रदेश सरकार की पूजन सामग्री विसर्जन योजना के तहत मंदिर के आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने घर से निकलने वाली पूजन सामग्री को एकत्रित करना होगा और उसे डस्टबिन में डालना होगा। मंदिर में इन पात्रों को लेकर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इन पात्रों को स्वच्छ एवं साफ सुथरे स्थान पर लगाया जायेगा और पात्रों को बाकायदा गेरुआ रंग में रंगा जायेगा, ताकि पात्र भी धार्मिक भावनाओं के अनुकूल लगे। इन पात्रों में इकट्ठा सामग्री ले जाने के लिए अलग से गाड़ी की व्यवस्था की जाएगी। इन वाहनों से सिर्फ पूजन सामग्री ही ले जायी जाएगी। इन गाडिय़ों का रंग भी गेरुआ रखा जायेगा। यही नहीं गाडिय़ों के चालक भी आस्था के अनुरूप गेरुआ रंग का ही ड्रेस पहनेंगे। योजना के तहत पूजन सामग्रियों का विसर्जन रीति-रिवाज के अनुसार सांकेतिक रूप से धर्माचार्यों के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था रहेगी।

नदी तट पर अलग से बनेगा विसर्जन स्थल
शहर से एकत्रित की गई पूजन सामग्रियों के भंडारण के लिए अलग स्थान चिन्हित किया जाएगा। यह स्थान कूड़ा निस्तारण स्थल से अलग और काफी दूर होगा। निस्तारण स्थल नदी का किनारा या किसी बड़े परिसर वाले मंदिर का निर्जन स्थान भी हो सकता है।

पूजन सामग्री के निस्तारण की पहल से जागी उम्मीद
हर घर में पूजा होने के चलते विसर्जन योग्य पूजन सामग्री निकलती है। इस पूजन सामग्री का निस्तारण कैसे किया जाए, इस पर पहले कभी विचार नहीं किया गया था। अलमित्रा पटेल बनाम भारत सरकार वाद में उच्चतम न्यायालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति की लगभग 1100 पन्नों की रिपोर्ट में भी पूजन सामग्री के निस्तारण का कोई विचार नहीं किया गया। यही नहीं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2000 में भी इस समस्या के निस्तारण का कोई प्रावधान नहीं है। एक तरफ पूजन सामग्री के निस्तारण पर कोई विचार नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर पारम्परिक रूप से विसर्जन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में बिना कोई व्यवस्था किए नदियों में पूजन सामग्री के विसर्जन पर रोक लगाने के आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इस योजना पर शासन की ओर से लखनऊ व वाराणसी के नगर आयुक्तों से उनका सुझाव मांगा गया है। वहीं पूजन सामग्री विसर्जन योजना को नदियों में गंदगी रोकने की दिशा में काफी सहायक कदम माना जा रहा है। यह नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में नई उम्मीद नजर आ रही है।

रिसाइकिलिंग के लिए अलग छांटी जाएंगी वस्तुएं

पूजन सामग्री विसर्जन योजना के तहत इकट्ठा वस्तुओं को छांट-छांट कर अलग किया जायेगा। इसमें मिट्टी, कांच एवं धातु की मूर्तिंयां, चुनरी, पोशाक, फूल-माला, बेल पत्र, बत्ती एवं अगरबत्ती, नारियल आदि को अलग-अलग किया जाएगा। फूल पत्तियों तथा अन्य बायोडिगे्रडेबल वस्तुओं को एक बड़े गड्ढे में डालकर कम्पोस्ट तैयार किया जाएगा। कागज, कांच, धातु, चुनरी एवं वस्त्र आदि चीजों का रिसाइकिलिंग में उपयोग किया जायेगा। विसर्जन स्थल पर एक कुंड का निर्माण कराया जायेगा। उस कुंड में पवित्र नदी का जल सांकेतिक रूप में डालकर जलीय प्रवाह विसर्जन का रूप दिए जाने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि लोगों की भावनाएं भी आहत न हों और नदी का जल स्वच्छ बना रहे।

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