गोमतीनगर में बना दिए हजारों फ्लैट पर कूड़ा कहां फेका जाएगा इसका होश नहीं एलडीए को

सडक़ और खाली प्लाटों में डाला जा रहा है हजारों फ्लैटों से निकलने वाला कूड़ा
गंदगी के ढेर से परेशान है लोग, शिकायत के बाद भी नहीं हो रही है कार्रवाई

विनय शंकर अवस्थी
लखनऊ। गोमतीनगर विस्तार में हजारों की संख्या में फ्लैट है लेकिन वहां कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था न होने की वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के घरों से निकलने वाला कूड़ा सडक़ पर और खाली पड़े प्लाटों में डंप किया जा रहा है, इसका नतीजा है कि मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और लोग तमाम तरह की बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। इससे संबंधित तमाम शिकायतों केे बावजूद लखनऊ विकास प्राधिकरण समस्या का समाधान नहीं कर रहा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास अपनी कालोनियों की साफ-सफाई और कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। हालत यह है कि कालोनियों में कूड़ेदान की भी व्यवस्था नहीं है। एलडीए द्वारा विकसित गोमती नगर विस्तार की साफ-सफाई की बात करें तो यह सफाई व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। विभाग की ओर से यहां सफाई के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया है। इस क्षेत्र में कूड़ेदान की भी व्यवस्था नहीं है। लोग खाली प्लाटों को कूड़ा फेकते हैं, जिसके चलते गोमतीनगर विस्तार में गंदगी का साम्राज्य है। क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। गंदगी के चलते लोगों का सडक़ पर निकलना मुश्किल हो गया है। विभाग के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सफाई व्यवस्था तभी होती है जब किसी वीआईपी का दौरा होता है। वहीं मामले पर गोमती नगर विस्तार के लोगों का कहना है कि प्राधिकरण अपने द्वारा विकसित की जा रही कालोनियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। न तो यहां स्थायी कूड़ेदान रखे गए हैं और न ही कूड़ा निस्तारण की अब तक कोई ठोस योजना बनी है, जबकि नगर निगम की कालोनियों में यह सुविधा उपलब्ध है। विभाग के अफसर खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि जितने कम बजट में ठेके पर सफाई करायी जाती है उसमें केवल वीआईपी दौरा होने पर ही सफाई हो पाती है, जबकि गोमती नगर विस्तार में सफाई के लिए एलडीए की ओर से कोई बजट स्वीकृत नहीं किया गया है।

कागजों तक सिमटी है कूड़ादान रखने की योजना
पिछले साल शहर में डेंगू फैलने पर एलडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष अनूप यादव ने कालोनियों की सफ ाई व्यवस्था के लिए योजना तैयार की थी। इंजीनियरों को कूड़ा प्रबंधन के लिए योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। इस योजना के तहत सभी कालोनियों में 300 कूड़ादान रखे जाने थे। उस समय अफसरों ने निर्देश दिए थे कि इन कूड़ेदानों को रोजाना गाडिय़ों से हटवाया जाएगा। इनकी जगह दूसरे खाली कूड़ेदान रखवाए जाएंगे। यह कूड़ा शहर के बाहर डम्पिंग ग्राउण्ड में डाला जाएगा, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण यह योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई।

अपार्टमेंट के लोग बोले
सरस्वती अपार्टमेंट में रहने वाले नितिन, ममता सिंह, मंजू सिंह, जीपी शुक्ला, अजय गुप्ता, रमेश पाल, केके और अनूप शुक्ला ने कहा कि एलडीए द्वारा विकसित गोमती नगर विस्तार पॉश इलाकों में शुमार हैं, लेकिन एलडीए की ओर से यहां सफाई व्यवस्था का कोई इंतजाम नहीं है, जबकि एलडीए सबसे अमीर और आधुनिक प्राधिकरणों में से एक है।

गंदगी से प्रभावित हो रहे इन अपार्टमेंट के लोग
सरस्वती, यमुना, अलकनंदा, रोहणी, गंगा, राप्ती, कावेरी, ग्रीनवुड, सुलभ, वनस्थली, शिप्रा, सतलज, अवंतिका।

सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय अभियंताओं को दी गई है। अगर क्षेत्र में गंदगी है और सफाई नहीं हो रही है तो संबंधित अभियंताओं पर कार्रवाई की जाएगी।
– जयशंकर दुबे, सचिव, एलडीए

गोधराकांड में गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला 11 दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

गोधरा कांड में अब किसी को नहीं मिलेगी फांसी की सजा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा कांड में बड़ा फैसला दिया है। एसआईटी कोर्ट द्वारा कुछ लोगों को दोषी ठहराने तथा कुछ को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली अपीलों पर गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले के 11 दोषियों की मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी है। अब इस मामले में किसी भी दोषी को फांसी की सजा नहीं मिली है। विशेष एसआईटी कोर्ट ने 1 मार्च, 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था और 63 को बरी कर दिया था। दोषियों में 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
मालूम हो कि 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगा दी गई थी। घटना में 59 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकांश कार सेवक थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। इस घटना के बाद राज्यभर में बड़े पैमाने पर हिंसा और दंगे हुए थे। इस मामले में एसआईटी की विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को 31 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 63 को बरी कर दिया था। 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई जबकि 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। बाद में उच्च न्यायालय में कई अपीलें दायर कर दोषसिद्धी को चुनौती दी गई, जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी है। विशेष अदालत ने अभियोजन की इन दलीलों को मानते हुए 31 लोगों को दोषी करार दिया कि घटना के पीछे साजिश थी। दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत कसूरवार ठहराया गया। जिन लोगों को इन मामलों में कोर्ट ने रिहा कर दिया, उनमें मुख्य आरोपी मौलाना उमरजी, गोधरा म्युनिसिपैलिटी के तत्कालीन प्रेसिडेंट मोहम्मद हुसैन कलोता, मोहम्मद अंसारी और उत्तर प्रदेश के गंगापुर के रहने वाले नानूमियां चौधरी थे। इस हत्याकांड की जांच के लिए गुजरात सरकार की ओर गठित नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में लगी आग कोई हादसा नहीं थी, बल्कि इसे आग के हवाले किया गया था।

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