आतंक पर पाक का कबूलनामा और भारत

सवाल यह है कि पाकिस्तानी सेना ने अचानक सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार क्यों किया? क्या इसके पीछे पाक सरकार की कोई सोची समझी चाल है या वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे सच स्वीकार करने पर विवश हो गया है? क्या इस कबूलनामे का असर भारत की कूटनीति पर भी पड़ेगा? क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की छवि और खराब नहीं होगी?

आखिरकार पाकिस्तानी सेना ने स्वीकार कर ही लिया कि उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संबंध आतंकियों से हैं। हालांकि पाकिस्तान के इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल आसिफ गफूर ने सफाई देते हुए कहा है कि समर्थन करने और संबंध होने में फर्क है। सवाल यह है कि पाकिस्तानी सेना ने अचानक सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार क्यों किया? क्या इसके पीछे पाक सरकार की कोई सोची समझी चाल है या वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे सच स्वीकार करने पर विवश हो गया है? क्या इस कबूलनामे का असर भारत की कूटनीति पर भी पड़ेगा? क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की छवि और खराब नहीं होगी? क्या इसका असर कश्मीर में हो रही आतंकी घुसपैठ और हमलों पर पड़ेगा? दरअसल, पाकिस्तान की यह स्वीकारोक्ति अनायास सामने नहीं आई है। हाल में अमेरिका के रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ने कहा था कि यदि इस्लामाबाद आतंकियों को समर्थन देना बंद नहीं करता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़ा फैसला ले सकते हैं। आशय यह कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पाक को दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद कर सकते हैं या संयुक्त राष्ट्रीय में उसे आतंकवादी देश घोषित करने की कोशिश कर सकते हैं। दोनों स्थितियां पाक के लिए आत्मघाती सिद्ध होंगी। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति रसातल में पहुंच चुकी है। महंगाई चरम पर है। बिजली और ईंधन लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं उसके पाले आतंकी भी अब उसके लिए समस्या बन गए हैं। ऐसी स्थिति में यदि अमेरिका ने आर्थिक मदद रोक दी तो पाकिस्तान दिवालिया हो जाएगा। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है। भारत-पाक वार्ता बंद है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समाप्त नहीं करता, उससे वार्ता नहीं की जा सकती। आतंकवाद पर पाकिस्तान के प्रिय मित्र चीन ने भी झटका दे दिया है। इसके अलावा इस स्वीकारनामे के पीछे पाकिस्तान की चाल भी है। आतंकियों से खुफिया एजेंसी के संबंध बताकर पाकिस्तानी सेना खुद और सरकार दोनों को पाक साफ दिखाना चाहती है। इसके जरिए पाकिस्तान कश्मीर की आतंकी घटनाओं को वहां के लोगों का विरोध दिखाना चाहता है। हालांकि पूरा विश्व जानता है कि सेना, पाक सरकार और खुफिया एजेंसी आतंकियों को पाल पोस रहे हैं। अगर वाकई पाकिस्तान अपने को पाक साफ दिखाना चाहता है तो उसे आतंकियों का पूरी ईमानदारी से सफाया करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है तो आज नहीं तो कल अपने विनाश के अंजाम तक पहुंच जाएगा।

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