एसोचैम की रिपोर्ट आशंका और उम्मीद

सवाल यह है कि एसोचैम की इस रिपोर्ट पर क्या सरकार ध्यान देगी? क्या प्रदेश की आर्थिक स्थितियों को ठीक करने में सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति आड़े आ रही है? क्या बेरोजगारों की फौज परियोजनाओं के पूरा नहीं होने के कारण बढ़ रही है? विभिन्न क्षेत्रों में धीमी रफ्तार से काम करने की वजह क्या है?

प्रमुख आर्थिक संस्था एसोचैम ने यूपी के आर्थिक विकास और निवेश पर अपनी रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में प्रदेश के आर्थिक प्रगति की असलियत के साथ आशंका और उम्मीदों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई गई है। साथ ही उम्मीद भी की गई है कि यदि प्रदेश सरकार परियोजनाओं को लागू करवा दे तो तमाम लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकता है। सवाल यह है कि एसोचैम की इस रिपोर्ट पर क्या सरकार ध्यान देगी? क्या प्रदेश की आर्थिक स्थितियों को ठीक करने में सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति आड़े आ रही है? क्या बेरोजगारों की फौज परियोजनाओं के पूरा नहीं होने के कारण बढ़ रही है? विभिन्न क्षेत्रों में धीमी रफ्तार से काम करने की वजह क्या है? क्या आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार के सामने लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती साबित होने वाला है? रिपोर्ट ने सरकार को आईना दिखाने का काम किया है। इसके मुताबिक यूपी में 1050 परियोजनाएं चल रही हैं। लेकिन इनकी रफ्तार बेहद सुस्त है। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि यदि सरकार इनमें आधी योजनाओं को भी लागू करा दे तो करीब ढाई लाख लोगों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रोजगार मिल सकता है। सिंचाई क्षेत्र में 98 फीसदी, खनन क्षेत्र में 91.5, रियल इस्टेट में 89.8, बिजली 68.2 , सेवा क्षेत्र में 63 और विनिर्माण क्षेत्र में 43.6 फीसदी परियोजनाओं पर धीमी गति से काम हो रहा है। लिहाजा देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 2011-12 में जहां 8.3 फीसदी था, वह 2016-17 में घटकर 7.9 फीसदी हो गया है। ऐसा क्यों है? अफसरशाही और विभागों में व्याप्त भ्रष्टïाचार इसकी बड़ी वजह हैं। रही सही कसर नोटबंदी ने निकाल दी है। नोटबंदी का सबसे अधिक असर रियल इस्टेट पर पड़ा है। इसने बाजार की क्रय शक्ति को क्षीण कर दिया है लिहाजा लोग मकान और फ्लैट पर खर्च करने से बच रहे हैं। इसके अलावा अन्य परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ा है। किसान कर्जमाफी ने भी परियोजनाओं की रफ्तार पर कहीं न कहीं असर डाला है। हाल यह है कि नए रोजगार नहीं मिल रहे हैं। छोटी कंपनियों में छंटनी की जा रही है। इससे तमाम लोग बेरोजगार हो गए हैं। जाहिर है प्रदेश के आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार को तमाम कवायदें करनी होगी। पुरानी परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करना होगा। इसके अलावा नई परियोजनाओं को भी शुरू कराना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यूपी में बेरोजगारों की फौज और बढ़ती जाएगी।

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