विदेशी निवेशक प्रदेश और सरकार

सवाल यह है कि क्या वाकई प्रदेश में विदेशी निवेशकों की राह आसान है? क्या उद्योग धंधों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं यहां मौजूद हैं? क्या नई औद्योगिक नीति निवेश को प्रोत्साहित करने में सफल साबित होगी? क्या प्रदेश में बढ़ते अपराध निवेशकों को रोकने का काम नहीं करेंगे? क्या उद्योग धंधों के लिए विद्युत और कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी?

उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को टटोलने के लिए जापान और फिनलैंड के प्रतिनिधिमंडल हाल में राजधानी पहुंचे। मुलाकात के दौरान सीएम ने प्रतिनिधिमंडल को बुनियादी ढांचा, ग्राम्य विकास, स्वास्थ्य, स्मार्ट सिटी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, डेयरी, कृषि उपकरण में निवेश का न्योता दिया। साथ ही आश्वस्त भी किया कि सरकार निवेशकों के हितों की रक्षा करेगी। सवाल यह है कि क्या वाकई प्रदेश में विदेशी निवेशकों की राह आसान है? क्या उद्योग धंधों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं यहां मौजूद हैं? क्या नई औद्योगिक नीति निवेश को प्रोत्साहित करने में सफल साबित होगी? क्या प्रदेश में बढ़ते अपराध निवेशकों को रोकने का काम नहीं करेंगे? क्या उद्योग धंधों के लिए विद्युत और कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी? क्या विदेशी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगा? दरअसल, निवेशक का पहला फोकस बुनियादी ढांचे पर होता है। इसमें बिजली की 24 घंटे आपूर्ति, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार और सस्ता मानव संसाधन प्रमुख हैं। बिजली आपूर्ति के मामले में प्रदेश की हालत बेहतर नहीं है। तमाम कवायदों के बावजूद 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। महंगाई और रोजगार की कमी ने लोगों की क्रय शक्ति क्षीण कर दी है। लिहाजा बाजार में मंदी है। ऐसे में कोई भी उद्योगपति निवेश क्यों करेगा? इसके अलावा उद्योगधंधों को स्थापित करने में लालफीताशाही बड़ी बाधक है। भले ही सरकार ने नई औद्योगिक नीति के तहत नियमों को सरल बना दिया है लेकिन लालफीताशाही पर अभी भी नकेल कसी जानी बाकी है। इसके बिना निवेशक तमाम कानूनी लफड़ों में फंस जाता है और निवेश करने से कतराने लगता है। इसके अलावा किसी भी प्रदेश का आर्थिक विकास वहां की कानून व्यवस्था की स्थितियों से भी प्रभावित होता है। यदि उद्योगपतियों या निवेशकों को असुरक्षा बोध होगा तो वह कतई पैसा नहीं लगाएंगे। फिलहाल प्रदेश में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और पुलिस इन पर लगाम लगाने में नाकाब साबित हो रही है। इसमें दो राय नहीं कि प्रदेश में निवेश की अपार संभावनाएं है, लेकिन यह अपने आप नहीं होगा। इसके लिए स्थितियों को अनुकूल बनाना होता है। निवेशकों को न्योता देने की सरकार की पहल प्रशंसनीय है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। जापान और फिनलैंड के निवेशक यदि प्रदेश में निवेश को राजी हो जाए तो निश्चित रूप से प्रदेश की आर्थिक प्रगति को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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