अगर एक दिन पहले एक्सटेंशन मिलता डीजीपी को तो सरकार के बचते लाखों रुपए, कौन जिम्मेदार है इस लापरवाही का

  • डीजीपी के एक्सटेंशन को लेकर थे राज्य और केंद्र में मतभेद
  • विपक्ष ने साधा निशाना कहा पुलिस का मनोबल तोड़ रही सरकार
  • आम जनता के ख़ून पसीने के लाखों रुपए बर्बाद करने का जिम्मेदार कौन

 संजय शर्मा
लखनऊ। जनता के एक-एक पैसे को ईमानदारी से खर्च करने का दावा करने वाली मोदी सरकार अगर यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह के सेवा विस्तार को एक दिन पहले मंजूरी दे देती तो सरकार के लााखों रुपए बच जाते। एक्सटेंशन खत न आ पाने के कारण यूपी पुलिस ने परंपरागत रूप से डीजीपी का विदाई समारोह का आयोजन किया, जिसमें लाखों रुपया खर्च हो गया। अब पुलिस के वरिष्ठ अफसरों से लेकर विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य और केन्द्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद इस तरह की लापरवाही बरती गई और बेवजह आम आदमी के खून-पसीने की कमाई खर्च की गई।

डीजीपी का रिटायरमेंंट एक दिन में तय हो गया हो ऐसा भी नहीं है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सभी को पता था कि डीजीपी सुलखान सिंह तीस सिंतबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में कम से कम यूपी सरकार को पन्द्रह दिन पहले तय करना चाहिए था कि उन्हें एक्सटेंशन देना है या नहीं। तय करने के बाद तुरंत केंद्र को भेजना चाहिए था और केंद्र को भी इस पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए था, मगर इस मामले को राज्य और केन्द्र ने अंतिम समय तक लटकाये रखा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीजीपी को एक्सटेंशन देने के मामले में लखनऊ और दिल्ली दरबार एक मत नहीं थे। यह बात सभी जान चुके हैं कि सीएम योगी के कामकाज में दिल्ली दरबार बहुत दखल दे रहा है। यही कारण रहा कि डीजीपी को एक्सटेंशन दिया जाए या नहीं इस पर लखनऊ और दिल्ली के मतभेद अंतिम समय तक बने रहे। जब एक दिन पहले तक एक्सटेंशन का लैटर नहीं आया तो पुलिस महकमे ने डीजीपी को परंपरागत रूप से दी जाने वाली विदाई की तैयारियां शुरु कर दी। अपने डीजीपी को शानदार विदाई देने के लिए पुलिस महकमा बहुत तैयारी करता है। रैतिक परेड के लिए सूबे भर के कई अफसरों को बुलाया जाता है। इसका कई दिनों तक रिहर्सल किया जाता है। इस व्यापक तैयारी पर महकमे का लाखों रुपया खर्च होता है। इसके बाद डीजीपी अपने निवास पर एक पार्टी देते हैं।
चूंकि डीजीपी का एक्सटेंशन लैटर सरकार को नहीं मिला इसलिए यह दोनों कार्यक्रम आयोजित हो गए। इसके बाद देर शाम को केन्द्र से सुलखान सिंह को एक्सटेंशन दिए जाने का खत यूपी सरकार को मिला। यह कितनी हड़बड़ी में तैयार किया गया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतने महत्वपूर्ण खत में तारीख तक गलत डाल दी गई। यह खत आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग कहने लगे कि ऐसे चल रही है देश की सरकार। आनन-फानन में गलती सुधारते हुए दूसरा खत जारी किया गया, मगर इस सारी रस्साकशी से यह साफ हो गया कि लखनऊ दरबार और दिल्ली दरबार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। अगर ठीक चल रहा होता तो सरकार के लाखों रुपए जो इस कार्यक्रम में खर्च हुए उन्हें बचाया जा सकता था। विपक्ष ने भी इसे आड़े हाथों लेकर आलोचना की है।

प्रदेश में नए पुलिस मुखिया की नियुक्ति या वर्तमान पुलिस प्रमुख के सेवाकाल में वृद्धि के बारे में अंतिम समय तक कोई फैसला नहीं लेने से पुलिस का मनोबल गिर रहा है। इसका सही अंदाजा न तो प्रदेश सरकार को है और न ही केन्द्र सरकार को।
-मायावती, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बसपा

यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दो महीने से एक्सटेंशन की बात चल रही थी। अगर जिम्मेदार लोग इतनी छोटी बात पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं तो कानून व्यवस्था से जुड़े गूढ़ विषयों पर कैसे निर्णय ले रहे होंगे इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। न सिर्फ लाखों रुपए बल्कि पुलिस कर्मियों का परेड में घंटों बरबाद होना दुखद है।
-विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी

एक्सटेंशन की एक प्रक्रिया होती है, उसे पूरा करने में समय लगता है। कई स्तर पर अनुमति लेनी होती है। बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किये एक्सटेंशन नही दिया जा सकता।
-मनीष शुक्ला, प्रवक्ता, भाजपा

अगर यूपी सरकार को डीजीपी सुलखान सिंह को एक्सटेंशन देना था तो बेवजह का विदाई समारोह कर पैसे बर्बाद करने का कोई औचित्य नहीं था। एक बात तो साफ है कि यूपी सरकार और दिल्ली सरकार में तालमेल नहीं है। ये लोग एक दूसरे पर भरोसा नहीं करते इसीलिए इसकी जानकारी यूपी सरकार को समय से नहीं मिली।
-सुनील सिंह साजन, एमएलसी, सपा

यूपी की भाजपा सरकार निहायत कंफ्यूज और मिसमैनेज्ड है। जब डीजीपी को एक्सटेंशन देना था तो परेड आदि आयोजित करने तक क्यों अनिर्णय की स्थिति में थे ? जब ये ऐसे साधारण फैसले नही ले पाते, तो जनहित के फैसले क्या लेंगे। ऐसी हरकतों से जनता और अधिकारियों के बीच सरकार की छवि हास्यास्पद बन गयी है ।
-वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता, आप

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