डेंगू की जांच के नाम पर निजी पैथालॉजी संचालक कर रहे खेल, मरीजों से वसूल रहे मोटी रकम

किट टेस्ट से मरीजों को कर रहे गुमराह, कमाई के लिए फैला रहे डेंगू का डर
स्वास्थ्य विभाग की नोटिस भी बेअसर, एलाइजा टेस्ट करने से कतरा रहे निजी सेंटर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी में डेंगू ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। लिहाजा डेंगू का डर दिखाकर निजी पैथालॉजी सेंटर मरीजों से मोटी कमाई करने में जुट गए हैं। ये पैथालॉजी सेंटर डेंगू की जांच के लिए जिस किट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे स्वास्थ्य विभाग मान्यता नहीं देता है। यही नहीं विभाग ने सभी पैथालॉजी सेंटरों को चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक एलाइजा टेस्ट के जरिए ही मरीज में डेंगू की पुष्टिï हो सकती है। अन्य किट से जांच को मान्य नहीं माना जा सकता है। बावजूद इसके निजी पैथालॉजी सेंटर सामान्य किट से जांच कर मरीज को डेंगू पीडि़त घोषित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सामान्य किट से जांच में डेंगू पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि मरीज को वाकई डेंगू हो गया है। कई बार डेंगू न होने पर भी इस किट से रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। एनएस1 एंटीजन टेस्ट (रैपिड डायग्नोस्टिक किट टेस्ट) की सेंसिटिविटी काफी कम है, जिसके कारण कई बार बीमारी न होने पर भी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार किट टेस्ट को सिर्फ संभावित मरीज कहा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 2015 में दिल्ली सरकार ने इस किट के माध्यम से की जाने वाली जांच पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि इससे बेवजह दहशत का माहौल पैदा होता है। यही नहीं इस किट टेस्ट से मलेरिया, मीजल्स, इंफ्लूएंजा, जापानी इंसेफ्लाइटिस और यलो फीवर में भी डेंगू पॉजिटिव बताता है। चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू की पुष्टि का एक मात्र आधार केवल एलाइजा टेस्ट है। एलाइजा टेस्ट से डेंगू 5 से 6 दिन में ही पॉजिटिव आता है। एलाइजा टेस्ट में कम से कम 6 घंटे लगते हैं और सभी सैंपल की रिपोर्ट सात घंटे में भेजी जा रही है। दूसरी ओर बाजार में दो प्रकार की डेंगू किट (एंटी बॉडी व एंटी जैन) उपलब्ध हैं। मेडिकल स्टोर्स पर एंटी बॉडी किट 150 और एंटी जैन किट 250 रुपए में मिल रही है। प्राइवेट पैथालॉजी इन दोनों ही टेस्ट के 300 से 1000 रुपए चार्ज करती हैं। इस रैपिड टेस्ट के नाम पर मरीजों से पैथालॉजी संचालक मोटी रकम वसूलते हैं।

यहां कराएं जांच
डेंगू की जांच एलाइजा विधि द्वारा ही प्रमाणिक मानी जाती है। जो जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बिल्कुल मुफ्त की जाती है। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर मरीज बिना घबराहट के दोनों सरकारी लैब में आकर अपना एलाइजा टेस्ट करा सकता है। अपर चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार रावत का कहना है कि डेंगू के लक्षण पाए जाने पर घबराएं नहीं। इसके लिए तुरंत मेडिकल या जिला अस्पताल में आकर निशुल्क जांच कराएं। एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू होने या न होने की पुष्टि हो सकती है।
अब तक 13 आ चुके हैं चपेट में
लखनऊ में अब तक स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के 13 मामलों की पुष्टि की है। हालांकि डेंगू से मरीज की मौत का अभी तक एक भी केस सामने नहीं आया है। इसके अलावा चिकनगुनिया के दो मरीजों की पुष्टि विभाग कर चुका है।
सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को चेतावनी दी है कि अगर डेंगू का संदिग्ध मरीज आता है तो उसकी एलाइजा किट से ही जांच करें और पुष्टिï होने पर इसकी सूचना विभाग को दें। इसके अलावा नोटिस देने के बाद यदि दोबारा मच्छरजनित हालात पाये जाएंगे तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डा. जीएस बाजपेयी, सीएमओ

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