सुरक्षा मांग रही छात्राओं पर लाठीचार्ज, पुलिस व सरकार

सवाल यह है कि क्या परिसर में रहने वाली छात्राओं को छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामले पर विरोध प्रदर्शन करने और अपनी सुरक्षा की मांग करने का अधिकार नहीं है? क्या कुलपति को छात्राओं की समस्या नहीं सुननी चाहिए? क्या विश्वविद्यालय के अपने सुरक्षा बलों के बावजूद परिसर को पुलिस के हवाले किया जाना उचित है?

विश्व प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में शोहदों से सुरक्षा की मांग कर रही छात्राओं पर पुलिस ने जमकर बर्बरता दिखाई। कुलपति से मिलने जा रही छात्राओं को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। लाठीचार्ज में कई छात्राएं घायल हो गईं। इस पूरे घटनाक्रम की देशभर में निंदा की जा रही है। प्रदेश की योगी सरकार ने जांच के आदेश दिए है और एक-दो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी इसे साजिश करार दे रहे हैं और बवाल के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ बता रहे हैं। सवाल यह है कि क्या परिसर में रहने वाली छात्राओं को छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामले पर विरोध प्रदर्शन करने और अपनी सुरक्षा की मांग करने का अधिकार नहीं है? क्या कुलपति को छात्राओं की समस्या नहीं सुननी चाहिए? क्या विश्वविद्यालय के अपने सुरक्षा बलों के बावजूद परिसर को पुलिस के हवाले किया जाना उचित है? क्या कुलपति आवास की ओर बढ़ रही छात्राओं पर पुलिस के पास लाठीचार्ज के अलावा अन्य विकल्प नहीं थे? क्या कुलपति साजिश की बात कर इसका ठीकरा दूसरे पर फोडऩे की कोशिश कर रहे हैं?
दरअसल, पिछले दिनों विश्वविद्यालय परिसर में हुई छेड़छाड़ की घटना के खिलाफ छात्राएं सडक़ पर उतर आई थीं। वे कुलपति से सुरक्षा का आश्वासन मांग रही थीं। दो दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद जब समस्या का समाधान नहीं निकला तो वे कुलपति आवास की ओर बढ़ीं। इस दौरान उनके साथ विवि के छात्र भी मौजूद थे। स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मामले को शांति से निपटाने की जगह बल प्रयोग किया। शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रही छात्राओं को कुलपति आवास के पहले रोका गया और उन पर जमकर लाठियां बरसाईं गई। छात्राओं पर यह बर्बरता उस बनारस में हुई जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद पीएम दो दिन के दौरे पर वहां पहुंचे थे। पुलिस की इस कार्रवाई ने भाजपा सरकार पर सवाल खड़े कर दिए है जो अक्सर महिलाओं के हितों और उसकी सुरक्षा की बात कहती नहीं थकती है। सच तो यह है कि यदि कुलपति ने इन छात्रों से वार्ता कर ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया होता तो यह स्थितियां पैदा नहीं होती। आखिर छात्राएं अपनी समस्या का समाधान करने के लिए कहां जाएंगी? घटना के लिए दूसरों पर ठीकरा फोडऩे की बजाए कुलपति को खुद मामले का समाधान करना चाहिए था। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। वहीं कुलपति को भी छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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