चक गंजरिया का कैंसर इंस्टीट्यूट बना शो पीस, मरीजों को नहीं मिल पा रहा इलाज

जांच के लिए नहीं है जरूरी उपकरण ओपीडी भी ठप
रेडियोलॉजी के लिए अभी तक नहीं मिली एनओसी
कई विभागों का अभी तक नहीं पूरा हुआ निर्माण कार्य

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी के चक गंजरिया में 938 करोड़ रुपये की लागत से बना कैंसर इंस्टीट्यूट शो पीस साबित हो रहा है। हालांकि यहां नौ माह पूर्व औपचारिक रूप से ओपीडी की शुरुआत की गई थी। फिलहाल इंस्टीट्यूट की ओपीडी पूरी तरह ठप हो चुकी है। यहां मरीजों की जांच के लिए जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। लिहाजा मरीज यहां से निराश हो कर लौट रहे हैं। अभी भी प्रतिदिन यहां औसतन 6 से 7 मरीज आते हैं।
ओपीडी सेवा को शुरू होने में कम से कम एक साल का वक्त लगेगा। संस्थान में अभी तक इनडोर फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। कई विभाग ऐसे हैं जिनके निर्माण का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कैंसर अस्पताल में बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले रेडियोलॉजी विभाग के लिए अभी तक अनुमति नहीं मिली है। बताते चलें कि अटॉमिक एनर्जी सेंटर मुंबई से अनुमति मिलने के बाद ही रेडियोलॉजी विभाग के भवन का निर्माण कार्य यहां शुरू हो सकेगा। दरअसल रेडिएशन से जुड़े किसी काम के लिए अटॉमिक एनर्जी सेंटर से अनुमति लेनी पड़ती है। हालांकि अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि अनुमति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जैसे ही अनुमति की प्रक्रिया पूरी होगी निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। वहीं ओपीडी को ठीक तरीके से शुरू करने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है राजधानी के कैंसर इंस्टीट्यूट में चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने अगस्त तक मिनी ओटी के साथ ओपीडी और प्राइमरी सेवाएं शुरू करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग और केजीएमयू प्रशासन पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। इलाज और सुविधाएं न मिलने से मरीज कैंसर इंस्टीट्यूट से मुंह मोड़ रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 9 महीने के दौरान इंस्टीट्यूट में महज 550 मरीज ही आए हैं।

संस्थान का दावा, मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
कैंसर इंस्टीट्यूट के सीएमएस डॉक्टर देश पाल का कहना है कि अभी यहां की ओपीडी सेवा पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी है क्योंकि इनडोर की सुविधा नहीं है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परीक्षण के बाद किसी अन्य सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीज को अन्य संस्थानों में भर्ती कराने के लिए भी संस्थान पूरा प्रयास करता है। अभी लगभग एक साल और निर्माण कार्य में लग सकता है जिसके बाद संस्थान की ओपीडी सेवा सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।

मंत्री के आदेशों के बावजूद नहीं सुधरे हालात
चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने गत 17 अप्रैल को कैंसर इंस्टीट्यूट का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा शिक्षा विभाग और केजीएमयू प्रशासन को निर्देशित किया था कि कैंसर इंस्टीट्यूट में ओपीडी के साथ-साथ मिनी ओटी, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर तत्काल शुरू किए जाएं। मंत्री के आदेश के बावजूद अब तक केवल ओपीडी शुरू की गई थी। वह भी फिलहाल पूरी तरह ठप है। संस्थान में 20 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें चार प्रोफेसर, 6 एसोसिएट प्रोफेसर और 10 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जबकि 69 जूनियर रेजिडेंट और 60 सीनियर रेजिडेंट सहित अन्य एडिशनल स्टाफ अब भी नहीं हैं।

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