भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे लोकसभा के उप चुनाव

फूलपुर और गोरखपुर सीट पर होगा घमासान, जल्द बजेगा चुनावी बिगुल
सीटों को बचाने के लिए भाजपा पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव भाजपा के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर सीट पर घमासान तय है। विपक्ष भी इन सीटों पर मजबूत प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर काम कर रहा है। विपक्षी दल अभी से अपनी तैयारियां तेज कर चुके हैं। वहीं भाजपा भी इन दोनों सीटों को बचाने के लिए पूरा जोर लगाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है जल्द ही इन दोनों सीटों पर चुनाव के लिए बिगुल बजेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फूलपुर लोकसभा सीट की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। योगी के इस्तीफे के बाद गोरक्षपीठ का गोरखपुर संसदीय सीट से दशकों पुराना नाता टूट गया। साथ ही यहां सियासी दलों के लिए उप चुनाव की चुनौती खड़ी हो गई है। अब गोरखपुर के साथ ही फूलपुर और विधायक मथुरा पाल के निधन से रिक्त हुई कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट का चुनावी समर शुरू होगा। तीनों चुनाव क्षेत्रों के खाली होने से उप चुनाव का बिगुल बजेगा। भाजपा के लिए यह उप चुनाव कसौटी होगी क्योंकि विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से भाजपा ने सरकार बनायी है। 19 मार्च को शपथ ग्रहण के समय मुख्यमंत्री योगी और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य सांसद थे जबकि मंत्रिमंडल के तीन अन्य सदस्य किसी सदन के सदस्य नहीं थे। 19 सितंबर के पहले इन्हें विधान मंडल दल का सदस्य बनना जरूरी था। इसके लिए भाजपा ने दूसरे दलों के विधान परिषद सदस्यों को इस्तीफा दिलवाकर रिक्त सीटों पर योगी और केशव समेत पांच लोगों को स्थापित किया। चूंकि विधानसभा निर्वाचन कोटे से विधान परिषद की सीटों पर उपचुनाव था, इसलिए भाजपा के प्रचंड बहुमत के आगे विपक्ष की उम्मीदवार उतारने की भी हैसियत नहीं बन पाई। विधान परिषद का उपचुनाव तो भाजपा एकतरफा जीत गई लेकिन अब जनता के बीच जाने वाले इस चुनाव में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। गौरतलब है कि गोरखपुर सीट पर योगी आदित्यनाथ 1998 में सांसद चुने गए। तबसे लगातार उनका मत बढ़ा और वह 2014 के चुनाव तक अपराजेय रहे लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि यह सीट बाकी किसी के लिए भी उतनी मुफीद नहीं रही। योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ 1970, 1989, 1991 और 1996 में इस सीट से चुने गए, जबकि उनके गुरु महंत दिग्विजय नाथ 1969 में इस सीट से विजयी घोषित हुए थे। अवैद्यनाथ और दिग्विजय नाथ दोनों को इस सीट पर पराजित भी होना पड़ा। दिग्विजय नाथ तो लगातार 1952, 1957 और 1962 में चुनाव हारे थे। वहां भाजपा किसे  मैदान में उतारेगी, यह सवाल प्रासंगिक हो गया है।
फूलपुर ऐसी सीट है जहां से पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीनों चुनाव जीता। उनके बाद कई बड़े नेता यहां चुनाव जीते लेकिन कभी भाजपा का कमल नहीं खिला। 2014 की मोदी लहर में केशव प्रसाद मौर्य ने इस सीट पर कमल खिलाया और खास बात यह कि उनकी जीत का अंतर भी तीन लाख से अधिक था। नेहरू की वजह से वीआइपी बनी इस सीट पर डॉ. राम मनोहर लोहिया और नेहरू सरकार में मंत्री रहे केशव देव मालवीय से लेकर बसपा संस्थापक कांशीराम ने भी किस्मत आजमाई लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल सकी। यह अलग बात है कि वहां से अतीक अहमद और कपिल मुनि करवरिया जैसे बाहुबली भी सांसद चुने गए।

विपक्ष भी कस रहा है कमर

विपक्ष भी लोकसभा उप चुनाव की जंग में उतरने के लिए कमर कस रहा है। सपा और बसपा इन दोनों सीटों से मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों ही दल इस सीटों पर कब्जा कर अपनी ताकत और जनाधार का अहसास सत्ता पक्ष को कराना चाहते हैं। इसके लिए अभी से तैयारियां चल रही है। प्रत्याशी किसे बनाया जाए इसको लेकर विपक्षी दलों का शीर्ष नेतृत्व लगातार मंथन कर रहा है। विपक्ष इस दौरान योगी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश भी करेगा।

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