चिकित्सक धड़ल्ले से कर रहे प्राइवेट प्रैक्टिस, शिकंजा कसने में नाकाम स्वास्थ्य विभाग

आला अफसरों की सरपरस्ती में चल रहा है खेल
संबंधित चिकित्सकों पर कार्रवाई से कतरा रहे संस्थान

दरख्शां कदीर सिद्दीकी
लखनऊ। प्रदेश सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद सरकारी चिकित्सक सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कई चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। यह सारा खेल अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। लिहाजा प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए पकड़े जाने के बाद भी ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग कड़ी कार्रवाई करने से कतरा रहा है। निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने के कारण सरकारी अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
राजधानी के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों का निजी अस्पतालों में ऑन-कॉल प्राइवेट प्रैक्टिस का धंधा फल-फूल रहा है। डॉक्टर खुलेआम प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का इलाज व ऑपरेशन कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार ने नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) की व्यवस्था कर रखी है। लेकिन कई चिकित्सक एनपीए लेने के बावजूद निजी प्रैक्टिस में लिप्त हैं। पिछले दिनों सीतापुर निवासी रामचन्द्र की न्यू यूनाइटेड हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। जब मामले की जांच करने टीम यहां पहुंची तो सरकारी चिकित्सक द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस का खुलासा हुआ। इस मरीज का ऑपरेशन लोहिया अस्पताल के निलंबित डॉ. एके श्रीवास्तव ने किया था। टीम को इससे जुड़े सुबूत भी मिले हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. एके श्रीवास्तव से जवाब-तलब तक करने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि स्वास्थ्य महानिदेशक ने संबंधित मसले पर रिपोर्ट तलब की है। वहीं डॉ. श्रीवास्तव हर माह शपथ पत्र देने के साथ-साथ सरकार से गुजारा भत्ता के तौर पर आधा वेतन भी ले रहे थे। सीएमओ दफ्तर के अधिकारियों का कहना है कि न्यू यूनाइटेड हास्पिटल के मालिक डॉ. एसएम अशरफ ने बलरामपुर अस्पताल से इंटरनशिप की थी। कई डॉक्टर व कर्मचारियों से उसके संबंध हैं। वह कर्मचारी-डॉक्टर से साठगांठ करके सरकारी अस्पताल से मरीज बुलाकर भर्ती कराता था। ऐसे मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर मोटी रकम वसूली जाती थी। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को ट्रांसफर किए जाने मामले की जांच सीएमओ की टीम कर रही है। यह मामला एक बानगी भर है।
प्राइवेट प्रैक्टिस में राजधानी के केजीएमयू, लोहिया, बलरामपुर और सिविल अस्पताल के चिकित्सक भी संलिप्त हैं। वर्षों से एक ही अस्पताल और शहर में तैनात ईएनटी, ऑर्थोपेडिक, आई, यूरो, गैस्ट्रो, नेफ्रो व जनरल सर्जन निजी अस्पतालों में धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके अलावा कई फिजीशियन खुलेआम अपने घर में क्लीनिक चला रहे हैं। दूसरी ओर अस्पताल एवं चिकित्सा संस्थान प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना है। यही नहीं कई चिकित्सक अपने रसूख के बल पर यहां के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में वर्षों से जमे हुए हैं। वहीं, सीएमओ आफिस में आधे दर्जन से ज्यादा प्राइवेट प्रैक्टिस के मामले लंबित पड़े हैं। इन पर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

कोर्ट कर चुका है तलब
केजीएमयू के डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसके अलावा कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में दस वर्ष से अधिक तैनात डॉक्टरों की सूची भी प्रदेश सरकार से तलब कर चुकी है।

सीएमओ ने नहीं उठाया फोन
निजी प्रैक्टिस में लिप्त आधा दर्जन चिकित्सकों के खिलाफ लंबित मामले पर जब सीएमओ जीएस बाजपेई से बात करने की
कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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