अकूत संपत्ति के मालिक आधा दर्जन बाबुओं पर एलडीए कसेगा शिकंजा

शिकायत के बाद सक्रिय हुए अफसर जांच की तैयारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण में कर्मचारियों की पटल परिवर्तन किये जाने से भ्रष्ट कर्मचारियों में हडक़ंप मच गया है। पिछले दस साल से जुगाड़ के दम पर एक ही पटल पर डटे बाबुओं को हटा कर दूसरी जगह भेज दिया गया है। इनमें से कुछ बाबू अकूत संपत्ति के मालिक हैं। शिकायत के बाद विभाग के अफसर सक्रिय हो गए है। बताया जा रहा है कि इन बाबुओं में आधा दर्जन ऐसे बाबू भी शामिल हैं जिन्होंने पूर्व में तैनात अफसरों के साथ मिलकर करोड़ों का खेल किया है और खुद बेशकीमती संपत्तियों के मालिक बन गए।
प्राधिकरण में संपत्ति, नजूल, विधि और अर्जन विभाग में पिछले 10 साल से जमे 33 बाबुओं को हटाने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा बाबू संपत्ति विभाग के हैं। शासन प्रशासन में इन बाबुओं की पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली सरकार में तीन साल तक ऑडिट सेल को इन्होंने संपत्ति की फाइलें ही नहीं दीं। गोमतीनगर संपत्ति फेज दो कानपुर रोड संपत्ति और गोमती नगर संपत्ति के बाबुओं को हटाकर विधि और नजूल विभाग में कम महत्व के दायित्व दिए हैं। जिनका पटल परिवर्तन किया गया है उनमें गजेंद्र सिंह स्वर्णकार, सुनील कुमार निगम, श्रीराम सिंह, सीमा अग्रवाल, विद्या प्रसाद, अनिल कपूर, मुहम्मद आरिफ, सीताराम, गोकुल द्विवेदी, मान बाहदुर सिंह, अशोक सक्सेना, जफर अहमद, महेंद्र प्रताप सिंह, विमलेंद्र त्रिवेदी, नंद किशोर यादव, लालमति चौहान, राजेश कुमार, अभिनव कुमार सिंह, रमाशंकर शुक्ला, कृष्णकुमार रंजन, विनोद कुमार मिश्रा, विवेक कुमार सिंह, राम किशोर, गौरव तिवारी, हिमांशू राय, कल्पना तिवारी, परदेशी सिंह यादव, इश्तियाक अली, सुरेंद्र मोहन, दिनेश कुमार पांडेय, उमाशंकर चतुर्वेदी, भरत चौधरी, कुलदीप कुमार शामिल हैं।

हटाए गए बाबूओं में कई ऐसे बाबू भी शामिल हैं जिनके खिलाफ कई शिकायतें आ चुकीं है। प्रथम चरण में इनका पटल परिवर्तन किया जा चुका है। अब इन बाबूओं के खिलाफ आयी शिकायतों की जांच कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो एफआईआर भी दर्ज होगी।
जयशंकर दुबे, सचिव, एलडीए

आधा दर्जन घेरे में
जानकारी के अनुसार इन 33 बाबूओं की लिस्ट में शामिल एक बाबू ने व्यवसायिक सम्पत्ति और बल्क सेल योजना में रहकर अरबों की सम्पत्ति हासिल की है। गोमती नगर समेत अन्य क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक कमर्शियल व आवासीय प्लांट इस बाबू के परिजनों के नाम है। यही नहीं विकास खंड में इस बाबू ने एक गेस्ट हाउस बना लिया है। यह बाबू सीधे तौर पर एलडीए अफसरों की रडार पर है। इसके अलावा इस लिस्ट में शामिल पांच बाबूओं के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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