रोहिंग्या मुसलमान आतंक व हलफनामा

सवाल यह है कि आखिर रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर म्यांमार, बांग्लादेश और भारत सरकार किसी प्रकार की सहानुभूति क्यों नहीं दिखा रही है? क्या सरकार द्वारा कोर्ट में पेश किए गए हलफनामे की सच्चाई से इंकार किया जा सकता है? रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार और बांग्लादेश क्यों नहीं अपनाना चाहता है?

देश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को केंद्र की मोदी सरकार म्यांमार वापस भेजने की तैयारी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में सरकार ने रोहिंग्या के आतंकी संगठनों से संपर्क का हवाला देते हुए उन्हें देश के लिए खतरा बताया है। हालांकि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है और सरकार भी फैसले का इंतजार कर रही है। सवाल यह है कि आखिर रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर म्यांमार, बांग्लादेश और भारत सरकार किसी प्रकार की सहानुभूति क्यों नहीं दिखा रही है? क्या सरकार द्वारा कोर्ट में पेश किए गए हलफनामे की सच्चाई से इंकार किया जा सकता है? रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार और बांग्लादेश क्यों नहीं अपनाना चाहता है? क्या वाकई ये भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं? क्या रोहिंग्या को लेकर संयुक्त राष्टï्र की अपील का भारत व अन्य देशों पर कोई असर पड़ेगा? दरअसल, म्यांमार के राखिन क्षेत्र में रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं। इन्हें वहां बांग्लादेशी प्रवासी माना जाता है। म्यांमार में करीब आठ लाख से अधिक रोहिंग्या रहते हैं। हालांकि म्यांमार इनको अपना नागरिक नहीं मानता है। म्यांमार में इनके खिलाफ कई तरह से हमले किए गए। वहां रोहिंग्या मुसलमानों की बौद्ध धर्मावलंबियों से हिंसक झड़प होती रहती है। लिहाजा म्यांमार में इनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। यही हाल बांग्लादेश में है। बांग्लादेश भी रोहिंग्या मुसलमान दयनीय हालत में जीवनयापन कर रहे हैं। इसी कड़ी में रोहिंग्या भारत में घुसे। यहां इनकी संख्या 40 हजार के करीब है। भारत, बांग्लादेश और म्यांमार तीनों ही देश इनको खतरा बताकर इन्हें स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं। भारत में पहली बार रोहिंग्या मुसलमान बोधगया में हुए बम विस्फोटों के बाद सुर्खियों में आए थे। हालांकि कई सामाजिक संगठन और संयुक्त राष्टï्र रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति सहानुभूति की अपील कर चुके हैं। भारत में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। भारत सरकार इन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सरकार का सबसे बड़ा तर्क है कि इन शरणार्थियों के कई आतंकी संगठनों से संपर्क हैं। वे यहां रह रहे बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी खतरा बन सकते हैं। सवाल यह है कि क्या लाखों रोहिंग्या मुसलमान आतंकी संगठनों से जुड़े हैं? भारत को बांग्लादेश और म्यांमार पर रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति उचित नीति बनाने का दबाव डालना चाहिए। केवल कुछ लोगों के आतंकी संगठनों से जुड़े होने के तर्क पर पूरी बिरादरी को खारिज नहीं किया जा सकता।

Pin It