सरकारी हॉस्पिटल में वेंटिलेटर की कमी बनी निजी अस्पतालों व दलालों की कमाई का जरिया

वेटिंग के कारण मरीज कर रहे निजी अस्पतालों का रुख, सिविल व बलरामपुर में नहीं है सुविधा
केजीएमयू में रहती है वेटिंग, रोजाना सैकड़ों गंभीर मरीज आते हैं इलाज के लिए
निजी अस्पताल में एक दिन के वेंटिलेटर का चार्ज है हजारों में, मरीजों को झांसा देकर फांसते हैं दलाल

दरख्शां कदीर सिद्दीकी
लखनऊ। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी प्राइवेट अस्पतालों और दलालों की कमाई का जरिया बन गए हैं। सरकारी अस्पतालों के बाहर सक्रिय दलाल वेटिंलेटर के नाम पर गंभीर मरीजों के तीमारदारों को झांसा देकर अपने सेटिंग के अस्पतालों में भर्ती करा रहे हैं। इसके एवज में वे अस्पातलों से मोटा कमीशन लेते हैं। वहीं दूसरी ओर निजी अस्पताल वेंटिलेटर के नाम पर मरीजों से एक दिन के हजारों रुपये ले रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है क्योंकि वे निजी अस्पतालों में इतना महंगा इलाज नहीं करा सकते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग का इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
सरकारी अस्पतालों में हर रोज हजारों की संख्या में मरीज आते हंै, जिसमें सैकड़ों मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। अस्पतालों में वेंटिलेटर की संख्या कम या नहीं होने के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। वहीं सरकारी अस्पताल के बाहर सक्रिय निजी अस्पतालों के दलाल मरीज की मजबूरी का फायदा उठाकर मोटी रकम ऐंठ रहा है। केजीएमयू के ट्रामा सेंंटर में 30 वेंटीलेटर बढ़ाए गए हैं, बावजूद इसके हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। यहां रोजाना 25 से अधिक मरीजों की वेटिंग रहती है। लिहाजा गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा हैं। हाल ही में वेंटिलेटर की कमी के चलते यहां एक मरीज की मौत हो गयी थी। मरीज की मौत से गुस्साएं परिवार वालों ने पीआरओ से मारपीट तक कर दी थी। वहीं वेंटिलेटर की कमी के चलते ट्रामा सेंटर से कई बार मरीजों को वापस कर दिया जाता है। ऐसे मरीज प्राइवेट अस्पताल का रुख कर रहे हैं। केजीएमयू के डिप्टी एमएस वेद प्रकाश का कहना है कि वेंटिलेटर बढ़ाए गए हैं। बावजूद हालात नहीं सुधर रहे हैं। रोजाना 25 से 30 मरीजों की वेटिंग रहती है। बलरामपुर अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर नहीं है। लिहाजा गंभीर मरीजों को केजीएमयू रेफर कर दिया जाता है। प्राइवेट अस्पताल के दलाल यहां वेंटिलेटर न होने का फायदा उठाते है और वेंटिलेटर की सुविधा दिलाने के बहाने मरीज को अपने सेटिंग के अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। यही हाल सिविल अस्पताल का है। सरकार ने 2015 में वेंटीलेटर के लिए यहां दस करोड़ का बजट पास किया था। बावजूद आर्डर दो साल से अटका है, जबकि इस अस्पताल में रोजाना बड़ी तादाद में राजधानी और आसपास के जिलों से गंभीर मरीज इलाज को पहुंच रहे हैं। वेंटिलेटर नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने 10 वेंटिलेटर का आर्डर पास कर दिया। लोहिया अस्पताल में भी पांच वेंटिलेटर हैं। सभी खराब हैं किसी तरह एक वेंटिलेटर लाकर काम चलाया जा रहा है।

एक दिन का चार्ज 6 हजार
केजीएमयू में मरीज से एक दिन का वेंटिलेटर चार्ज 15 सौ रुपये है। शेष सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए वेंटिलेटर कोई चार्ज नहीं लिया जाता। बीपीएल कार्ड वालों के लिए केजीएमयू में भी वेंटिलेंटर का कोई पैसा नहीं वसूला जाता है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में वेंटिलेटर के प्रतिदिन का चार्ज पांच से छह हजार है।

शासन को भेजी गई है रिपोर्ट
लोहिया अस्पताल के उप सेंटर मेडिकल स्टोर डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष और वर्तमान लोहिया अस्पताल के निदेशक डीएस सिंह नेगी का कहना है कि लोहिया अस्पताल में खराब वेंटिलेटर की रिपोर्ट शासन को भेज दी गयी है लेकिन अभी तक वह ठीक नहीं हो पाए हैं। वहीं सिविल अस्पताल सीएमएसडी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काम अंडर प्रॉसेस है जल्द ही वेंटिलेटर परचेज किए जाएंगे।

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