बेकाबू महंगाई और आम आदमी का बजट

सवाल यह है कि महंगाई ने अचानक इतनी ऊंची छलांग क्यों लगा दी? क्या इसकी पृष्ठïभूमि पहले से तैयार हो चुकी थी? क्या सरकार का महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है? क्या कीमतों में इजाफे के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं? क्या इससे आम आदमी का बजट नहीं बिगड़ जाएगा? क्या आने वाले दिनों में आम आदमी की थाली से सब्जी और दालें गायब हो जाएंगी?

त्योहारी सीजन के पहले ही महंगाई आसमान छूने लगी है। थोक महंगाई दर चार महीने की उच्चतम दर पर पहुंच चुकी है। इसके कारण अनाज, सब्जियां और ईंधन की कीमतों में भारी इजाफा हो गया है। निकट भविष्य में भी महंगाई पर नियंत्रण के आसार नहीं है। सवाल यह है कि महंगाई ने अचानक इतनी ऊंची छलांग क्यों लगा दी? क्या इसकी पृष्ठभूमि पहले से तैयार हो चुकी थी? क्या सरकार का महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है? क्या कीमतों में इजाफे के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं? क्या इससे आम आदमी का बजट नहीं बिगड़ जाएगा? क्या आने वाले दिनों में आम आदमी की थाली से सब्जी और दालें गायब हो जाएंगी? फिलहाल स्थितियां कुछ ऐसी ही दिख रही हैं। दरअसल, जैसे ही कोई वस्तु बाजार के हवाले होती है, उसकी कीमतें बाजार की चाल के मुताबिक घटती या बढ़ती हैं। मांग व आपूर्ति में भारी असंतुलन कीमतों को बढ़ा देता है। जाहिर है महंगाई दर में इजाफा सरकार की नाकामी है। इसके पीछे सरकार की नीतियां बहुत हद तक जिम्मेदार है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल को बाजार के हवाले कर दिया है। पेट्रो पदार्थों की कीमतें अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों के मुताबिक निर्धारित होती हैं। लिहाजा इनके दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे माल ढुलाई महंगी हो गई है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ रहा है। बाढ़ से सब्जियां और कई फसलें नष्ट हो चुकी है। लिहाजा बाजार में मांग और आपूर्ति में असंतुलन पैदा हो गया है। बाजार में सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में सब्जियों की महंगाई दर जहां 21.95 फीसदी थी वह अगस्त में बढक़र 44.91 फीसदी तक पहुंच गई है। इसमें अकेले प्याज की कीमतों में 88.46 फीसदी की वृद्धि हुई है। फल, मीट और मछलियों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। रही सही कसर कर्जमाफी व सातवें वेतन आयोग का भुगतान निकाल देगी। सरकार के ये निर्णय राजकोष और प्रकारांतर से अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहे हैं क्योंकि इसकी पूर्ति जनता पर कर लगाकर ही होनी है। इसका असर आम आदमी की क्रय शक्ति पर पड़ेगा। जाहिर है आने वाले त्योहार जनता के लिए फीके साबित होने वाले हैं। सरकार को चाहिए कि वह बाजार को नियंत्रित करने के लिए ठोस योजना बना कर अमल में लाए वरना महंगाई से आम आदमी को शायद ही निजात मिल सके।

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