केजीएमयू में नहीं हो पा रहा ऑर्गन ट्रांसप्लांट चार साल से अटका है ओटी का निर्माण कार्य

निर्माण निगम को दी गई है जिम्मेदारी, डॉक्टरों की कमी से भी जूझ रहा संस्थान
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कई मरीजों की चल रही वेटिंग, रिवाइज बजट का फंसा पेंच

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आर्गन ट्रांसप्लांट का काम अटका पड़ा हैं। पिछले चार वर्षों से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ओटी का निर्माण नहीं हो सका है। रिवाइज बजट के कारण निर्माण का पेंच फंसा है। वहीं दूसरी ओर संस्थान ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति तब है जब यहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दर्जनों मरीजों की वेटिंग चल रही है।
केजीएमयू में मरीजों के ऑर्गन ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण मरीजों को दूसरे संस्थानों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और ट्रांसप्लांट करने के लिए ओटी की सुविधा का नहीं होना है। यह स्थिति तब है जब ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग की ओर से लोगों को लगातार अंगदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वही दूसरी ओर गत चार वर्षों से उत्तर प्रदेश निर्माण निगम की ओर से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ओटी का निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। ओटी नहीं बनने के कारण गंभीर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। केजीएमयू में वर्ष 2013 में ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग की स्थापना की गई थी। विभाग की स्थापना के साथ से यहां पर ऑर्गन डोनेशन का काम शुरू किया गया। इसके लिए बाकायदा केजीएमयू प्रशासन ने लोगों को अंगदान के लिए जागरूक करने का अभियान भी चलाया। इसकी मुख्य वजह यह थी कि अधिक संख्या में लोग के अंगदान करने से गंभीर मरीजों को राहत मिल सकेगी। कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी। गौरतलब है कि यहां इलाज के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों और राज्य से बाहर के तमाम मरीज पहुंचते हैं।
संस्थान को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अनुमति काफी पहले मिल चुकी है। हालांकि संस्थान को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अभी अनुमति मिलनी बाकी है। वहीं दूसरी ओर ऑर्गन ट्रांसप्लांट का काम रूका पड़ा है। संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस एक ओटी का निर्माण होना है। इसके निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को सौंपा गया था। जिम्मेदारी लेने के चार वर्ष बाद भी ओटी का निर्माण कार्य निर्माण निगम पूरा नहीं कर सका है। निर्माण निगम और संस्थान के बीच बजट का पेंच फंस गया है। सूत्रों के मुताबिक रिवाइज रेट लागू नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। बताते चलें कि केजीएमयू में लगभग दो वर्ष पहले किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। तब से संस्थान में दोबारा किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सका है। संस्थान ने जो भी किडनी के ट्रांसप्लांट किए थे वह सब यूरोलॉजी विभाग में किए गए थे। इस दौरान उसी विभाग की ओटी का भी इस्तेमाल किया गया था।
इसके अलावा केजीएमयू के सामने विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम का अभाव भी बड़ी समस्या है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग के शताब्दी फेज वन में शिफ्ट होने के बाद से विभाग में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। यही नहीं विभाग के दो नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. रवि कुशवाहा और डॉ. संत कुमार पांडेय इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने अभी डॉ.पांडेय का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। विभाग द्वारा कई बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किए गए, लेकिन अभी तक किसी चिकित्सक या नेफ्रोलॉजिस्ट ने संबंधित विभाग में आवेदन तक नहीं किया है। यही वजह है कि केजीएमयू अन्य मेडिकल संस्थाओं को आर्गन सप्लाई करने का जरिया बनकर रह गया है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सा के लिए यहां पहुंच रहे मरीजों को निराशा हाथ लग रही है।
स्टाफ नर्स और प्रशिक्षित टेक्नीशियन की कमी
केजीएमयू को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर मिलना तो दूर नर्सिंग स्टाफ और प्रशिक्षित टेक्नीशियन भी नहीं मिल रहे हैं। लिहाजा यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट का काम रूका पड़ा है। फिलहाल केजीएमयू केवल ऑर्गन डोनेशन करवाकर दूसरे अस्पतालों और संस्थाओं को भेज रहा है जबकि केजीएमयू में 100 से ज्यादा मरीज किडनी ट्रांस प्लांट के लिए वेटिंग में हैं।

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