अब आगरा एक्सप्रेस वे बनेगा योगी और अखिलेश के बीच जंग का मैदान, दोबारा उद्घाटन की तैयारी

एक्सप्रेस वे के कामों के बहाने अखिलेश को घेरने की तैयारी
सपा ने भी की जवाब देने की तैयारी
योगी सरकार की है एक्सप्रेस वे का भव्य उद्घाटन कराने की योजना

संजय शर्मा
लखनऊ। मेट्रो के बाद अब योगी सरकार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का भी दोबारा उद्ïघाटन करवाने जा रही है। सरकार का मानना है कि पिछली सरकार ने आधे-अधूरे तरीके से जल्दबाजी में उद्ïघाटन करवा दिया। यह तरीका गलत है। इसलिए अब एक्सप्रेस वे का विधिवत उद्ïघाटन कराया जाएगा। सरकार के इस फैसले की भनक मिलते ही समाजवादी पार्टी ने इसके विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। जाहिर है मेट्रो के बाद अब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे सरकार और सपा के बीच जंग का नया अखाड़ा बनने जा रहा है।
दरअसल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे समाजवादी पार्टी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना थी। यह एक्सप्रेस वे देश के सबसे लंबे और सबसे पहले बनने वाले एक्सप्रेस वे में शुमार है। देश भर में जहां किसानों की जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे उस समय यह पहला एक्सप्रेस वे था, जहां एक भी किसान ने आंदोलन नहीं किया था। सपा सरकार ने इस बात को अपने पक्ष में बहुत भुनाया भी था। तत्कालीन सरकार ने इस एक्सप्रेस वे पर सेना के सुखोई और मिराज विमानों की लैंडिंग करवाकर खूब वाह-वाही लूटी थी। यूपी चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी ऐड कैंपेंनिंग में भी इस एक्सप्रेस वे को मुद्ïदा बनाया था। यूपी विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले इस एक्सप्रेस वे का उद्ïघाटन भी करवा दिया था। हालांकि चुनाव के बीच में ही भाजपा ने कहा था कि चुनाव के कारण इस आधे-अधूरे एक्सप्रेस वे का उद्ïघाटन किया जा रहा है।
सरकार में परिवर्तन होने के बाद अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट योगी सरकार के निशाने पर आ गये। सबसे पहले निशाने पर गोमती रिवर फ्रंट आया और सरकार ने रिवर फ्रंट घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिये। इसके बाद सरकार ने मेट्रो का दोबारा उद्घाटन यह कहकर कर दिया कि पहले जो उद्घाटन हुआ था वह ट्रायल जैसा था।
मेट्रो के उद्घाटन को लेकर भी सरकार और सपा नेताओं में जबरदस्त नोक-झोंक हुई थी। इस हंगामे के कारण लखनऊ मेट्रो पूरे देश में चर्चा में आ गई। सरकार को नुकसान यह हुआ कि इस मेट्रो का श्रेय अधिकांश लोगों ने अखिलेश सरकार को ही दिया। अब सरकार ने अखिलेश सरकार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजना के दोबारा उद्घाटन के साथ इस बात की भी तैयारी शुरु की है कि वह किसी भी तरह से साबित करेगी कि वह परियोजना आधी-अधूरी रह गयी और इसमें काम मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। इसके लिए दस्तावेज इक_ïा किये जा रहे हैं। जाहिर है आने वाले समय में आगरा एक्सप्रेस वे भी योगी सरकार और समाजवादी पार्टी के बीच जंग का मैदान बनने जा रहा है।
आगरा एक्सप्रेस वे का काम पूरा हुआ ही नहीं है। न ट्वायलेट बना है। न लाइटिंग हुई है। न ही पेट्रोल पंप खुले हैं। मार्किंग तक नहीं हुई है। ये सारा काम सरकार करवा रही है। इसलिए उद्घाटन तो होना ही चाहिए। पिछली सरकार ने तो काम पूरा कराए बिना ही प्लेन उतार दिया था। प्लेन उतारने से काम थोड़े ही होता है।

-सिद्धार्थनाथ सिंह प्रवक्ता, राज्य सरकार
एक्सप्रेस वे किसने बनवाया है यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह से जानती है। योगी जी को जनता ने पूर्ण बहुमत देकर सरकार में बिठाया है वह भी कुछ काम करेंगे कि सिर्फ पुरानी सडक़ों और अखिलेश द्वारा किए गए कामों का उद्घाटन ही करते रहेंगे। उनको इस बारे में जानकारी होनी चाहिए कि सिर्फ प्रवचन से काम चलने वाला नहीं है। प्रदेश की जनता के लिए कोई नई योजना लेकर आएं।
-उदयवीर सिंह, एमएलसी, सपा

योगी सरकार ने कोई भी नया काम तो किया ही नहीं है। पुरानी सरकारों ने जो भी काम किये हैं उन्हीं का उद्घाटन किया जा रहा है। यही काम पीएम मोदी ने भी किया था। अब यूपी में उसी को सीएम योगी कर रहे हैं। इस सरकार की अपनी कोई नीति ही नहीं है।
-विवेक सिंह पूर्व एमएलए, कांग्रेस

चाहे केंद्र हो या राज्य, भाजपा सरकारें सिर्फ उद्घाटन सरकारें हैं । विपक्ष में रहते हुए जिस काम का विरोध किया, सत्ता में आ कर हर उस काम का श्रेय लेने की कोशिश की। तीन साल में न तो केंद्र की कोई उपलब्धि रही और न ही पांच महीने में राज्य सरकार एक भी ढंग का काम कर पाई। भाजपा सरकार सिर्फ ‘उद्घाटन करो और के्रडिट लूटो’ सरकार है ।
-वैभव माहेश्वरी प्रवक्ता आप

21 नवंबर को अखिलेश ने किया था उद्घाटन

मालूम हो कि 21 नवंबर 2016 को पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उन्नाव के बांगरमऊ में आर.एस चौराहे के निकट खंबौली में एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था। यह उद्घाटन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन से एक दिन पहले हुआ था। उद्घाटन के तुरंत बाद इस पर लड़ाकू विमानों सुखोई और मिराज की लैंडिंग भी हुई थी। ये एक्सप्रेस वे आगरा से शुरू होकर जनपद फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, हरदोई, कानपुर नगर और उन्नाव होते हुए लखनऊ तक पहुंचेगा। एक्सप्रेस-वे परियोजना की खास बात ये है कि 10 जिलों के 232 गांवों में लगभग 3500 हेक्टेयर भूमि 30 हजार 456 किसानों से आपसी सहमति से बिना किसी विवाद के खरीदी गई है।

 

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