रेल हादसे, सरकार की नाकामी और यात्रियों की सुरक्षा

सवाल यह है कि लगातार हो रहे इन रेल हादसों की असली वजहें क्या हैं? क्या रेल हादसों को रोकने में सरकार की मशीनरी फेल हो चुकी है? क्या तकनीकी खामियां और जर्जर हो चुकी रेल पटरियां हादसों की संख्या बढ़ा रही हंै? क्या पटरियों के निरीक्षण और रेलों के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है? क्या सरकार को रेल यात्रियों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है?

देश में रेल हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। चौबीस घंटे के भीतर यूपी और दिल्ली में दो ट्रेनें पटरी से उतर गईं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में शक्तिपुंज एक्सप्रेस की सात बोगियां पटरी से उतर गईं जबकि दिल्ली के मिंटो ब्रिज के पास रांची-राजधानी एक्सप्रेस बेपटरी हो गई। हालांकि दोनों हादसों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेलवे मामले की जांच कर रहा है। सवाल यह है कि लगातार हो रहे इन रेल हादसों की असली वजहें क्या हैं? क्या रेल हादसों को रोकने में सरकार की मशीनरी फेल हो चुकी है? क्या तकनीकी खामियां और जर्जर हो चुकी रेल पटरियां हादसों की संख्या बढ़ा रही हंै? क्या पटरियों के निरीक्षण और रेलों के संचालन में लापरवाही बरती जा रही है? क्या सरकार को रेल यात्रियों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है?
भारत की रेल दुनिया की बड़ी रेल सेवाओं में एक है। पूरे देश में रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग रेल के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं। वहीं रेल से होने वाली आय देश के जीडीपी में अपनी अहम भूमिका निभाती है। बावजूद इसके रेलवे के संचालन में लगातार कोताही बरती जा रही है। यही वजह है कि पिछले एक साल में कई बड़े रेल हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं जबकि कई हजार घायल हुए। यह स्थिति तब है जब रेल के सुरक्षित संचालन के लिए भारी भरकम अमला है। फिर हादसे क्यों हो रहे हैं? दरअसल, अधिकांश रेल पटरियां जर्जर हो चुकी हैं। इनके नवीनीकरण का काम आज तक नहीं किया गया है। इसके अलावा रेलवे को नई तकनीकी और स्मार्ट सिग्नल सिस्टम से भी लैस नहीं किया गया है। यही वजह है कि समय रहते न तो कंट्रोल रूम और न ही ड्राइवर को पटरियों के टूटे होने की जानकारी मिल पाती है। ये टूटी पटरियां हादसे का सबब बन जाती हैं। सरकार इस मामले में कोई खास कदम उठाती नहीं नजर आ रही है। तमाम जांच रिपोर्ट और रेलवे को सुधारने की सिफरिशें धूल फांक रही हैं। इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा लापरवाह कर्मचारी भी हादसों का कारण बनते जा रहे हैं। वे पटरी पर आधा-अधूरा काम करके चले जाते हैं। सरकार को चाहिए कि वह न केवल रेलवे का कायाकल्प करे बल्कि उसे नवीन तकनीकी और खतरे का संकेत देने वाले स्मार्ट सिग्नल सिस्टम से लैस करे। इसके लिए भारत सरकार चीन, जापान, रूस और फ्रांस जैसे देशों से तकनीकी सहायता ले सकती है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में लोग रेल यात्रा से कतराने लगेंगे। इसका सीधा असर भारत के विकास पर पड़ेगा।

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