राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर रही हैं महिलाएं: सीएम योगी आदित्यनाथ

समाज में विशिष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को किया गया सम्मानित
सूबे की 11 महिलाओं को दिया गया ‘देवी अवॉर्ड’

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में महिलाएं राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर रही हैं। ये महिलाएं अपने विशिष्ट कार्यों से समाज को राह दिखाने का काम कर रही हैं। इनकी सफलता की कहानी समाज के सामने आनी चाहिए, जिससे समाज भी इनकी सफलता से सकारात्मक और रचनात्मक प्रेरणा प्राप्त कर सके। इसके लिए ऐसी महिलाओं को उचित मंच दिए जाने की आवश्यकता है। यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमतीनगर स्थित सीएमएस स्कूल में आयोजित ‘देवी अवॉर्ड’ सम्मान समारोह के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पुरस्कार एवं सम्मान ऐसे लोगों को दिया जाना चाहिए, जो वास्तविक योगदान करते हैं। उपयुक्त व्यक्ति को सम्मानित करने पर सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
सीएम ने इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाली 11 महिलाओं को ‘देवी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाने के लिए सकारात्मक सोच की आवश्यक है। इसके लिए हमें समाज और राष्ट्र के प्रति अच्छी सोच विकसित करनी होगी। महिलाओं के योगदान पर सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की परीक्षा में मेरिट में आने वाले 147 विद्यार्थियों में से 99 लड़कियां थीं। लखनऊ में मेट्रो रेल का संचालन प्रारम्भ हुआ है। इसकी पायलेट भी महिलाएं हैं। देश की रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री भी महिला हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई जनपदों में लिंगानुपात की कमी एक बड़ी समस्या है। बड़े पैमाने पर हो रही कन्या भू्रण हत्या सभी के लिए चिन्ता का विषय है। राज्य सरकार बालिका भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात को ठीक करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आज से 15 दिन बाद शारदीय नवरात्रि मनाया जाएगा। देश-प्रदेश में देवी पूजा के इस पर्व को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। सभी देवी मूर्तियों की पूजा करते हैं। यह बड़ी विडम्बना है कि एक तरफ देवी की पूजा होती है और दूसरी तरफ बालिका की भू्रण हत्या। समाज को इस बारे में विचार करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलम्बन और सम्मान के लिए पूरी संजीदगी से कार्य कर रही है। 64 रेस्क्यू वैन शुरू किए जाने के साथ ही, हेल्पलाइन ‘181’ भी प्रारम्भ की गई है। महिलाओं के स्वावलम्बन में स्वयं सहायता समूहों का बड़ा योगदान हो सकता है।

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