उड़ाई जा रही स्ट्रीट वेंडर्स कानून की धज्जियां, पटरी दुकानदारों को लाइसेंस देने में जारी है हीलाहवाली

निजी संस्था की घोर लापरवाही से फिर रोकी गई लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया
एक साल से अधिक समय से नगर निगम के चक्कर काटने को मजबूर पटरी दुकानदार

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पटरी दुकानदारों और फेरीवाले समाज में हमेशा से ही हाशिए पर रहें हैं। शासन और प्रशासन द्वारा हमेशा से उन्हें शहर की समस्यााओं में इजाफा करने वाले और ला एंड आर्डर के लिए खतरा माना जाता है। हकीकत यह है कि शहर की 80 प्रतिशत अबादी अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए पटरी दुकानदारों पर निर्भर है। पटरी दुकानदारों की रोजी-रोटी के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाए लेकिन उत्तर प्रदेश के पटरी दुकानदारों की समस्याओं का समाधान आज तक नहीं किया गया। हर बार कोई न कोई पेंच फंस जाने के कारण पटरी दुकानदारों को लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले पटरी दुकानदारों में हमेशा नगर निगम और प्रशासन का डर बना रहता है। यही नहीं पुलिस द्वारा वसूली के लिए प्रताडि़त किए जाने के मामले भी तमाम बार सामने आ चुकें हैं। नगर निगम हमेशा इन छोटी पूंजी वाले दुकानदारों को निशाना बनाता आया है। भारत सरकार ने पटरी दुकानदारों की रोज-रोटी को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट वेडर्स कानून 2014 लागू कर दिया। लेकिन अभी तक पटरी दुकानदारों को उनका हक नहीं मिल सका है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पटरी दुकानदारों का भी उत्पीडऩ जारी है। यहां भी मामला सुलझ नहीं पा रहा है। बीते दिनों पटरी दुकानदारों और वेंडिंग जोन के सर्वे की जिम्मेदारी डूडा की ओर से एक निजी संस्था को दी गई, लेकिन संस्था की सर्वे रिपोर्ट ने एक बार फिर पटरी दुकानदारों को उनके हक से दूर कर दिया है। शहर में वेडिंग जोन का सर्वे करने वाली निजी संस्था की रिपोर्ट ने निगम के अफसरों के सामने बड़ी समस्या पैदा कर दी है। सर्वे में निजी संस्था ने शहर के पटरी दुकानदारों की संख्या को 26 हजार पहुंचा दी है जबकि नगर निगम के द्वारा पूर्व में किए गए सर्वे में पटरी दुकानदारों की संख्या मात्र 12 हजार थी। अब मामले की जांच कराने के बाद ही पटरी दुकानदारों को लासेंस निर्गत किया जाएगा। बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब पटरी दुकानदारों के लाइसेंस निर्गत किए जाने में बाधा उत्पन्न हुई हो। पटरी दुकानदारों को लेकर सरकार की संवेदनशीलता की बात करें तो प्रदेश में स्ट्रीट वेंर्डस कानून 2014 के लागू न हो पाने के पीछे शासन की सुस्त कार्य प्रणाली रही है। पिछली सरकार में पटरी दुकानदारों को लाइसेंस जारी किए जाने की तैयारी हो गई थी। लेकिन बाद में मामला इस लिए लटक गया क्योंकि शासन में इससे संबंधित नियमावली बनायी जानी थी। अब एक बार फिर राजधानी में हजारों की संख्या में पटरी वेंडिंग जोन के लिए लाइसेंस की आस में बैठे हैं। गौरतलब है कि राजधानी में पटरी दुकानदारों का लगातार शोषण हो रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल भर पहले लाइसेंस के लिए इन गरीब दुकानदारों ने नगर निगम में 200 रुपये शुल्क जमा कराकर रजिट्रेशन कराया था। एक साल से अधिक समय बीत गया लेकिन आज तक इनको वेडिंग जोन में दुकान लगाने के लिए लाइसेंस जारी नहीं किए गए जबकि जनवरी 2016 में शहर के स्ट्रीट वेंडर्स और नगर निगम अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। जिसमें सडक़ किनारे पीली पट्टी खींच कर दुकानदारों की हद तय करने के साथ ही उनको लाइसेंस दिए जाने की बात कही गई थी। लाइसेंस जारी करने के लिए नगर निगम ने तैयारियां भी पूरी कर ली। इसी क्रम में पिछले साल 25 मई को पटरी दुकानदारों में लाइसेंस जारी किए जाने की आशा जगी लेकिन राणाप्रताप मार्ग के चौड़ीकरण के मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अफसरों ने लाइसेंस जारी करने का कार्य शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया था। तब से लेकर आज तक लाइसेंस वितरण का यह कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा है।
बता दें कि इन कानून का पालन करने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर पीली पट्टी खींचकर वेंडिंग और नान वेंडिंग जोन के बोर्ड लगाए गए थे। यही नहीं उक्त लाइसेंस का लाभ साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने वालों को भी दिया जाना है। नगर निगम लखनऊ में लगभग 12 हजार से अधिक पटरी दुकानदारों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। जिससे लाखों रुपए राजस्व के रूप में मिला। लेकिन पटरी दुकानदारों के लाइसेंस का अभी तक हल नहीं हुआ। अफसरों के अनुसार स्ट्रीट वेंडर्स को लाइसेंस जारी किये जाने के लिए शासन से नियमावाली बन कर निगम में पहुंच चुकी है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट के कारण मामला लम्बित है।

पटरी दुकानदारों को जल्द से जल्द सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। सभी पटरी दुकानदारों का वेंडिंग जोन भी तय कर दिया जाएगा।
-उदयराज सिंह नगर आयुक्त

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