बसपा को फिर याद आए पुराने साथी पार्टी से जोडऩे की कवायद तेज

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनाधार मजबूत करने की कोशिश
पार्टी छोड़ चुके कई साथियों से लगातार संपर्क साध रहे पदाधिकारी
गठबंधन को लेकर अभी भी सस्पेंस कायम, अपने बल पर चुनाव लडऩे की तैयारी में जुटी बसपा

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4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद इस बात के कयास लगाये जा रहे थे कि बसपा सुप्रीमो मायावती को अन्य दलों का सहारा लेना पड़ेगा लेकिन उन्होंने गठबंधन से इंकार कर राजनीतिक जानकारों को अचम्भे में डाल दिया। विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बसपा में भूचाल आ गया था। कई बड़े नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी या बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद खुद मायावती ने राज्यसभा से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह कहते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दिया था कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया गया। अब जब 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं तो मायावती एक बार फिर पार्टी का जनाधार मजबूत करने में जुट गई हैं। बसपा ने पार्टी को झटकों से उबारने के लिए अपने पुराने साथियों को फिर से याद करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिन नेताओं को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था,वे बसपा का दामन छोडक़र चले गए थे। पार्टी के ऐसे नेताओं को पार्टी पुन: बुलाने में जुटी हुई है। इसके अलावा अपने क्षेत्र में पकड़ रखने वाले पूर्व पार्टी नेताओं से भी लगातार संपर्क साधा जा रहा है।
विधानसभा चुनाव के बाद आए नतीजों ने इस बात की संभावना को प्रबल बना दिया था कि सपा और बसपा एक मंच पर आयेंगे। इस बीच सभी लोकसभा सीटों पर अपने प्रभारी नियुक्त कर बसपा प्रमुख ने गठबंधन की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने पिछले दिनों राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पटना रैली में जाने से इंकार कर दिया था। तब मायावती ने कहा था कि जब तक टिकट के बंटवारे का फैसला और उनकी पार्टी के अधिकार का मामला साफ नहीं हो जाता तब तक वह गठबंधन के बारे में विचार नहीं करेंगी। बसपा के बड़े नेता भी गठबंधन के सवाल पर गोलमोल जवाब दे रहे हैं। राज्यसभा सांसद मुनकाद अली भी कह चुके हैं कि गठबंधन के लिए अभी समय है और बसपा अपनी तैयारी सभी सीटों पर मजबूती से कर रही है। हालांकि उन्होंने भीम आर्मी और बसपा के संपर्को के सवाल पर सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि बसपा विचारधारा की लड़ाई लड़ती है, बसपा के लोग आर्मी या सेना का कोई संगठन नहीं बनाते हैं। बसपा सर्व समाज की बात करती है। भीम आर्मी से बसपा से कोई लेना देना नहीं है। यहीं नहीं बसपा नेता ने पार्टी छोडऩे वाले नेताओं के बारे में बात करते हुए कहा कि जब तक बसपा से स्वार्थ सिद्ध होता रहा तब तक लोग बसपा में रहे और जब जनता के प्रति जवाबदेही की बात आई तो अनर्गल आरोप लगा कर पार्टी से निकल गये। फिलहाल बसपा पुरानी बातों को भूल कर नयी रणनीति बनाने में जुट गई है। पुराने नेताओं की सूची बनाई जा रही है। पार्टी के पदाधिकारी इनसे संपर्क कर रहे हैं। वहीं बसपा सुप्रीमो ने पार्टी का जनाधार मजबूत करने के लिए हर बूथ से पांच लोगों को बिना जाति और धर्म के जोडऩे की मुहिम चलाने का निर्देश जारी किया है।
बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का प्रयास

जनाधार मजबूत करने के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने अपने संगठन के पदाधिकारियों के साथ कई बार बैठक की। इसके अलावा उन्होंने अपने पदाधिकारियों को इस बात के भी निर्देश दिये हैं कि बूथ स्तर पर हर हाल में संगठन को मजबूत किया जाये। इसके लिए जमीनी स्तर पर काम भी शुरू किया जा चुका है। मायावती ने अपने नेताओं से इस बात की भी अपेक्षा की है कि जब बसपा पूर्ण बहुमत से यूपी में सरकार बना सकती है तो आने वाले समय में यह इतिहास दोहराना कोई कठिन काम नहीं होगा। उन्होंने इस बात के भी निर्देश दिए हैं कि इस बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उन्हीं लोगों को टिकट दिए जायेंगे जो लोग जमीन से जुडक़र संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे।

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