प्रदेश अध्यक्ष के सामने संगठनात्मक ढांचा दुरुस्त करना पहली चुनौती

पार्टी के तमाम पदाधिकारी बन चुके हैं केंद्र व राज्य सरकार का हिस्सा
इन पदों पर नियुक्ति कर तैयार करनी होगी पदाधिकारियों की नई टीम

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भाजपा के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पांडेय के सामने संगठन को चुस्त दुरुस्त करना पहली चुनौती है। संगठन के मौजूदा कई पदाधिकारी सरकार का हिस्सा बन चुके हैं और अब उनका ध्यान संगठन की ओर नहीं है। नगर निकाय चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव सामने है, ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को पदाधिकारियों की नई टीम जल्द बनानी होगी। यह काम इतना आसान भी नहीं है क्योंकि पार्टी इस समय केंद्र व राज्य की सत्ता में है और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं भी आसमान छू रही हैं।
संगठन में उपाध्यक्ष पद की बात करें तो धर्मपाल सिंह, आशुतोष टंडन और सुरेश राणा योगी सरकार में मंत्री बनाए जा चुके हैं। एक उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह को काफी पहले ही हटाया जा चुका है। शेष उपाध्यक्षों में शिवप्रताप शुक्ल और डॉ. सत्यपाल को मोदी ने मंत्री बनाकर अपनी कैबिनेट में शामिल कर लिया। महामंत्रियों में भी अनुपमा जायसवाल और स्वतंत्र देव सिंह भी यूपी सरकार में मंत्री बन चुके हैं। प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल भी अब वित्त मंत्री हैं। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष स्वाति सिंह भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इस तरह पार्टी में उपाध्यक्ष के छह, प्रदेश महामंत्री के दो तथा प्रदेश मंत्री के दो पद खाली हो चुके हैं।
नवंबर में निकाय चुनाव होने हैं। अगले महीने अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। जाहिर है कि प्रत्याशी चयन का कार्य इसी महीने से शुरू करना होगा। पार्टी नहीं चाहेगी कि किसी भी स्तर पर इस चुनाव में कोई ढील रहे क्योंकि पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव से पहले निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के सामने संगठन को दरूस्त करने के लिए कोई ज्यादा समय नहीं है। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्हें इस कवायद में जुटना होगा कि पार्टी के किन कार्यकर्र्ताओं को इन पदों पर बैठाया जाए जिससे संगठन गतिशील होने के साथ-साथ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी कायम रहे। यद्यपि यह कोई मुश्किल कार्य नहीं है, संगठन में हमेशा यह प्रक्रिया चलती रही है, लेकिन खास यह है कि पहले की अपेक्षा आज की परिस्थितियां बदली हुई हैं। आज पार्टी केंद्र के साथ प्रदेश की सत्ता में है। लंबे समय बाद प्रदेश में सत्तासीन होने के कारण प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं की संगठन से तमाम अपेक्षाएं हैं। कार्यकर्ताओं को समायोजित करना संगठन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे दौर में जब दूसरे दलों से बड़े नेता अपना दल छोडक़र भाजपा में आ रहे हैं तब यह काम और मुश्किल हो जाता है। इन स्थितियों में प्रदेश की नई टीम तैयार करना प्रदेश अध्यक्ष के राजनीतिक कौशल की परीक्षा से कम नहीं है।

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