तीन तलाक को ‘तलाक’

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, आज से एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक
मुस्लिम महिलाओं को 1000 साल पुरानी कुप्रथा से मिली आजादी
शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में 2016 में याचिका दायर कर की थी तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर, कहा कोर्ट ने किया न्याय
तीन जज तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे तो वहीं 2 जज थे विपक्ष में

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4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। तीन तलाक के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया। कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए तीन तलाक पर 6 महीने तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में वह संसद में कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे तो वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शायरा बानो, आफरीं रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और अतिया साबरी की अपील के बाद शुरू हुई थी। सभी की ओर से तीन तलाक के अलावा निकाह हलाला और बहुविवाह के मुद्दे पर याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ तीन तलाक पर फैसला सुनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। इस मुद्दे पर बचाव पक्ष में ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट ने अपना पक्ष रखा। इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए आज का दिन मुकर्रर किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोडऩे के लिए यह सबसे खराब तरीका है। ये गैर-जरूरी है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है। इस खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं जिनमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा छह महीने में कानून बनाए केंद्र सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद को इस मामले पर कानून बनाना चाहिए। कोर्ट ने कानून बनाने के लिए 6 महीने का वक्त दिया है। सबसे पहले चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने अपना फैसला पढ़ा। चीफ जस्टिस ने कहा कि तीन तलाक संविधान के आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार), 15 (धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव के खिलाफ अधिकार), 21 (मान सम्मान के साथ जीने का अधिकार) और 25 (पब्लिक ऑर्डर, हेल्थ और नैतिकता के दायरे में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन नहीं है। चीफ जस्टिस के मुताबिक, यह प्रथा सुन्नी समुदाय का अभिन्न हिस्सा है और यह प्रथाा 1000 सालों से चली आ रही है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस नजीर ने अल्पमत में दिए फैसले में कहा कि तीन तलाक धार्मिक प्रैक्टिस है, इसलिए कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा। हालांकि दोनों जजों ने माना कि यह पाप है, इसलिए सरकार को इसमें दखल देना चाहिए और तलाक के लिए कानून बनना चाहिए। दोनों ने कहा कि तीन तलाक पर छह महीने का स्टे लगाया जाना चाहिए, इस बीच सरकार कानून बना ले और अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो स्टे जारी रहेगा। खेहर ने यह भी कहा कि सभी पार्टियों को राजनीति को अलग रखकर इस मामले पर फैसला लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबने किया स्वागत

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मुस्लिम महिलाओं के लिए स्वाभिमानपूर्ण एवं समानता के एक नए युग की शुरुआत है। यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की विजय है। दुनिया के दूसरे देशों में भी तीन तलाक का कानून अब अस्तित्व में नहीं है।
-अमित शाह, राष्टï्रीय अध्यक्ष, भाजपा

कोर्ट के निर्णय से बहुत खुश हंू। ऐतिहासिक फैसला है और सरकार पर कानून बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी है।
-मेनका गांधी, केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री

ऐतिहासिक फैसला है। पीडि़त महिलाओं को राहत मिलेगी। फैसला दूरगामी है।
-सलमान खुर्शीद, वरिष्ठï नेता, कांग्रेस

तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर सुप्रीम कोर्ट ने अच्छा कार्य किया है। ये स्वागत योग्य फैसला है। ये आधी आबादी को न्याय मिलने की शुरुआत है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में अच्छी शुरुआत है।
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश

तीन तलाक पर जो फैसला आया है वह एकदम सही है। इस फैसले का सभी मुस्लिम औरतें स्वागत करती हैं। कोर्ट ने तीन तलाक 6 महीने के लिए प्रतिबंधित किया है, उसे हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
-नाईश हसन, सामाजिक कार्यकर्ता

शरई एतबार से भी एक साथ तीन तलाक दिया जाना गलत है। कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं।
-प्रो.साबरा हबीब

सुप्रीम कोर्ट का फैसला एकदम दुरुस्त है। कोर्ट को शरई मामलात में दखल नहीं देना चाहिए और यह काम कोर्ट ने किया भी। कोर्ट के इस फैसले का हम लोग तहे दिल से स्वागत करते हैं।
-मौलाना अबुल इरफान मिया फरंगी महली शहर, काजी लखनऊ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। सरकार तीन तलाक के मामले पर कानून बनाएं। कानून से ही महिलाओं का उत्पीडऩ और शोषण बंद होगा।
-मौलाना सैफ अब्बास, अध्यक्ष शिया चांद कमेटी

कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कोर्ट ने तो अपना रुख साफ कर दिया है, लेकिन सरकार को इस तरह का कोई रास्ता निकालना चाहिए जिससे किसी के धर्म को ठेस ना पहुंचे।
काजिम रजा, वरिष्ठ पत्रकार

लोकसभा चुनाव में मुद्दा बना था तीन तलाक

लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तीन तलाक का मुद्दा बनाया था। चुनावी रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो वह इस मसले का हल ढूढेंगे। सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी इस दिशा में सक्रिय भी हुए। उत्तर प्रदेश चुनाव में भी बीजेपी ने तीन तलाक को मुद्दा बनाया था और चुनाव में बीजेपी को इसका लाभ भी मिला था। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में भी कहा था कि तीन तलाक के कारण कुछ महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही हैं, तीन तलाक से पीडि़त बहनों ने देश में आंदोलन खड़ा किया, मीडिया ने उनकी मदद की। तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली बहनों का मैं अभिनंदन करता हूं, पूरा देश उनकी मदद करेगा। गौरतलब है केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में साफ किया था कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं।

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